MLC Election 2026: अनंत सिंह ने नीतीश कुमार को लेकर ऐसा क्या कहा? नीरज कुमार से विवाद के बीच उठे बड़े सवाल

आशीष अभिनव

22 Oct 2026 (अपडेटेड: Oct 22 2026 10:07 AM)

पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के एमएलसी चुनाव में जेडीयू विधायक अनंत सिंह और पार्टी उम्मीदवार नीरज कुमार के बीच टकराव थमने का नाम नहीं ले रहा है. अनंत सिंह ने कहा कि नीतीश कुमार न तो उनकी तरफ हैं और न ही नीरज कुमार की तरफ. अब सवाल है कि इस बयान के क्या सियासी मायने हैं और पार्टी नेतृत्व क्या कदम उठाएगा.

MLC Election 2026
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बिहार की राजनीति में पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र का एमएलसी चुनाव सिर्फ उम्मीदवारों की जीत और हार तक सीमित नहीं रह गया है. इस चुनाव के बहाने जनता दल यूनाइटेड के भीतर दो नेताओं के बीच चल रहा टकराव भी खुलकर सामने आ गया है. एक तरफ पार्टी के उम्मीदवार नीरज कुमार हैं, तो दूसरी तरफ मोकामा से विधायक अनंत सिंह लगातार उनके खिलाफ बयान दे रहे हैं. अनंत सिंह ने जन सुराज के उम्मीदवार डॉ. अनुज सिंह का समर्थन भी किया है.

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प्रचार खत्म, विवाद जारी

चुनाव प्रचार समाप्त होने के बाद भी दोनों नेताओं के बीच विवाद थमता नहीं दिख रहा है. अब इस पूरे मामले में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को लेकर अनंत सिंह के बयान ने नई राजनीतिक चर्चा छेड़ दी है. उनके बयान के बाद सवाल उठ रहा है कि आखिर नीतीश कुमार की इस चुनाव में क्या भूमिका है और जेडीयू नेतृत्व अपने ही विधायक के रुख को किस तरह देख रहा है.

नीतीश कुमार को लेकर अनंत सिंह ने क्या कहा?

जब अनंत सिंह से एमएलसी चुनाव में नीतीश कुमार की भूमिका को लेकर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार न तो उनकी तरफ हैं और न ही नीरज कुमार की तरफ. उन्होंने यह भी कहा कि नीतीश कुमार का इस चुनाव से कोई मतलब नहीं है. इसी बातचीत में अनंत सिंह ने नीतीश कुमार के हवाले से कहा कि उन्होंने कहा था, 'जो जैसा किया है, वैसा पाएगा.' अनंत सिंह के इस बयान ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं. सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर नीतीश कुमार ने उनसे यह बात कब कही थी. क्या अनंत सिंह किसी बातचीत का जिक्र कर रहे थे या फिर नीरज कुमार के साथ अपने पुराने विवाद को लेकर यह टिप्पणी कर रहे थे? एमएलसी चुनाव से पहले अनंत सिंह की नीतीश कुमार से मुलाकात भी हुई थी. ऐसे में मुख्यमंत्री को लेकर उनकी टिप्पणी के राजनीतिक मायने तलाशे जा रहे हैं. हालांकि, इस बयान के आधार पर यह निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी कि नीतीश कुमार ने अनंत सिंह को किसी खास राजनीतिक कदम के लिए संकेत दिया है.

आखिर नीरज कुमार से क्यों नाराज हैं अनंत सिंह?

अनंत सिंह और नीरज कुमार के बीच विवाद की पृष्ठभूमि पुरानी है. अनंत सिंह कई मौकों पर नीरज कुमार पर आरोप लगाते रहे हैं कि उन्होंने मुश्किल समय में उनका साथ नहीं दिया. दोनों नेताओं का संबंध एक ही इलाके की राजनीति से भी जुड़ा है, इसलिए उनके बीच का टकराव स्थानीय राजनीतिक समीकरणों के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है. अनंत सिंह ने अपने बयानों में 2019 के एके-47 मामले का भी जिक्र किया है. उनका आरोप रहा है कि नीरज कुमार ने उन्हें इस मामले में फंसाया. दूसरी तरफ, नीरज कुमार ने भी विभिन्न मौकों पर अपनी स्थिति स्पष्ट की है. वह पार्टी नेतृत्व और संगठन के महत्व पर जोर देते रहे हैं. हालांकि अनंत सिंह पर हमले का एक भी मौका वो नहीं चूके हैं. 

अपनी ही पार्टी के उम्मीदवार के खिलाफ अनंत सिंह का रुख

इस विवाद का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि अनंत सिंह जेडीयू के विधायक हैं, जबकि नीरज कुमार पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से पार्टी के उम्मीदवार हैं. इसके बावजूद अनंत सिंह उनके समर्थन में खड़े होने के बजाय जन सुराज के उम्मीदवार डॉ. अनुज सिंह का समर्थन कर रहे हैं. ऐसी स्थिति में पार्टी के सामने संगठनात्मक अनुशासन और क्षेत्रीय राजनीतिक समीकरणों के बीच संतुलन बनाने की चुनौती है. एक तरफ पार्टी का आधिकारिक रुख अपने उम्मीदवार को जिताने का है, तो दूसरी तरफ पार्टी के ही एक विधायक का खुले तौर पर दूसरे उम्मीदवार का समर्थन करना राजनीतिक असहजता पैदा करता है. यही वजह है कि अनंत सिंह के खिलाफ कार्रवाई नहीं होने को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं. 

मौके का इंतजार कर रही है जेडीयू? 

अब बड़ा सवाल ये उठ रहा है कि क्या जेडीयू नेतृत्व इस पूरे विवाद को दो नेताओं के बीच व्यक्तिगत टकराव मान रहा है? क्या पार्टी फिलहाल किसी तरह की सार्वजनिक कार्रवाई से बचना चाहती है? या फिर अनंत सिंह के क्षेत्रीय प्रभाव को देखते हुए नेतृत्व किसी भी फैसले के राजनीतिक परिणामों पर विचार कर रहा है? इन संभावनाओं पर चर्चा जरूर हो रही है. देखना होगा कि चुनाव के बाद पार्टी की तरफ से क्या रुख अपनाया जा रहा है. 

नीतीश कुमार की चुप्पी क्यों? 

अक्सर नीतीश कुमार ऐसे मौके पर कम बोलते हैं. वो फैसले लेने के लिए जाने जाते हैं. लेकिन ये विवाद लंबे समय से चल रहा है. पार्टी के नेता भी इसपर बोलने से बचते रहे हैं. नीतीश कुमार की चुप्पी और अनंत सिंह के बयान ने इस पूरे मामले को और दिलचस्प बना दिया है. अब देखना होगा कि चुनाव के बाद जेडीयू नेतृत्व कोई कदम उठाता है या दोनों नेताओं के बीच विवाद को फिलहाल ऐसे ही चलने देता है.