बिहार की राजनीति में इन दिनों मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पुत्र निशांत कुमार और केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा के पुत्र दीपक प्रकाश की काफी चर्चा हो रही है. सम्राट चौधरी की सरकार में मंत्री पद की शपथ लेने वाले ये दोनों युवा नेता फिलहाल न तो विधानसभा के सदस्य हैं और ना ही विधान परिषद के. बिना किसी तंत्र के अनुभव और चुनावी जीत के सीधे मंत्री बनाए जाने पर विपक्ष ने नीतीश कुमार और एनडीए सरकार पर तीखे हमले किए थे. हालांकि, अब खबर आ रही है कि इन दोनों की राह आसान करने के लिए सेफ गेम की तैयारी कर ली गई है. विस्तार से जानिए पूरी बात.
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पिता के नक्शेकदम पर निशांत!
नीतीश कुमार ने अपने पिछले 20-21 सालों के मुख्यमंत्री काल में हमेशा विधान परिषद यानी MLC का ही रास्ता चुना है. अब उनके बेटे निशांत कुमार भी उसी सुरक्षित रास्ते पर चलते दिखाई दे रहे हैं. खबर है कि निशांत कुमार और दीपक प्रकाश को किसी विधानसभा उपचुनाव के जोखिम में डालने के बजाय सीधे एमएलसी बनाया जाएगा.
बिहार में 28 जून को विधान परिषद की 10 सीटें खाली हो रही हैं, जिनमें से 9 सीटें इसी तारीख को खाली होंगी और एक सीट जो कि नीतीश कुमार के इस्तीफे वाली है, पहले से ही रिक्त है. इन सीटों पर होने वाले चुनाव के जरिए निशांत और दीपक की सदन में एंट्री लगभग तय मानी जा रही है.
परिवारवाद के आरोपों के बीच एनडीए की दलील
नीतीश कुमार द्वारा अपने बेटे को राजनीति में उतारने और सीधे मंत्री पद देने पर तेजस्वी यादव सहित विपक्ष के कई नेताओं ने सवाल उठाए थे. विपक्ष का कहना था कि नीतीश कुमार ने 50 साल की अपनी सुचिता की राजनीति को परिवारवाद के लिए दांव पर लगा दिया. हालांकि, इसके जवाब में एनडीए की ओर से लालू परिवार का उदाहरण दिया गया.
लेकिन विपक्ष का तर्क है कि तेजस्वी और तेज प्रताप ने चुनाव लड़कर और जीतकर मंत्री पद हासिल किया था, जबकि निशांत और दीपक प्रकाश के लिए बिना चुनाव लड़े ही सीधे सत्ता के गलियारे खोल दिए गए हैं.
सीटों का गणित: एनडीए का पलड़ा भारी
28 जून को खाली हो रही 10 सीटों का मौजूदा समीकरण देखें तो इनमें से 7 पर एनडीए और 3 पर महागठबंधन का कब्जा है. जेडीयू कोटे से गुलाम गौस, भीष्म साहनी, कुमुद वर्मा और भगवान सिंह कुशवाहा (जो अब विधायक और मंत्री हैं) की सीटें खाली हो रही हैं. बीजेपी से सम्राट चौधरी और संजय मयूख की सीटें रिक्त हो रही हैं.
वहीं, आरजेडी से सुनील कुमार सिंह, मोहम्मद फारूक और कांग्रेस के समीर कुमार सिंह का कार्यकाल समाप्त हो रहा है. मौजूदा संख्या बल के आधार पर एनडीए के पास 201 विधायकों का समर्थन है, जिससे वे आसानी से 9 सीटें जीत सकते हैं.
तेजस्वी के लिए बढ़ सकती है मुश्किल
भोजपुर-बक्सर एमएलसी उपचुनाव में महागठबंधन की जीत से तेजस्वी यादव को एक मनोवैज्ञानिक बढ़त जरूर मिली है, लेकिन आगामी 10 सीटों के चुनाव में राह कठिन है. विधान परिषद चुनाव में एक सीट जीतने के लिए करीब 25 वोटों की जरूरत होती है. आरजेडी के पास फिलहाल अपने 25 विधायक हैं, जिसके आधार पर महागठबंधन केवल एक सीट ही सुरक्षित रूप से जीत सकता है.
इसका मतलब है कि उनकी वर्तमान 3 सीटों में से 2 का नुकसान होना तय है. वहीं, अंदरूनी सूत्रों की मानें तो बीजेपी इस कोशिश में भी है कि आरजेडी को वह एक सीट भी न जीतने दी जाए. ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि तेजस्वी यादव इस सियासी घेराबंदी को कैसे तोड़ते हैं.
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