बिहार की राजनीति इस वक्त अपने सबसे बड़े बदलाव के मुहाने पर खड़ी है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार राज्यसभा सांसद के रूप में शपथ लेने दिल्ली पहुँच चुके हैं, और उनके पीछे-पीछे बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी भी दिल्ली में ही हैं. यह तस्वीर बिहार की भावी राजनीति का संकेत दे रही है, जहाँ पहली बार भारतीय जनता पार्टी (BJP) अपना मुख्यमंत्री बनाने की तैयारी में है. लेकिन सवाल यह है कि आखिर बीजेपी नाम का ऐलान करने में इतनी हिचक क्यों रही है?
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सम्राट चौधरी रेस में सबसे आगे, फिर भी सस्पेंस बरकरार
बिहार के अगले मुख्यमंत्री की रेस में सम्राट चौधरी का नाम सबसे ऊपर चल रहा है. हालांकि, दिल्ली से लेकर पटना तक उनके नाम की चर्चा है, लेकिन बीजेपी आलाकमान अभी भी अंतिम मुहर लगाने से पहले कई पहलुओं पर विचार कर रहा है. राजनीतिक जानकारों की मानें तो सम्राट चौधरी के साथ जुड़े कुछ पुराने विवाद बीजेपी के लिए चिंता का विषय हो सकते हैं. वहीं विपक्षी दल आरजेडी (RJD) भी तंज कस रही है कि अगर सम्राट सीएम बनते हैं, तो 'लालू स्कूल ऑफ पॉलिटिक्स' का एक छात्र बिहार की कमान संभालेगा.
नीतीश का इस्तीफा और नई सरकार का शपथ ग्रहण
तीश कुमार 10 अप्रैल को राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ ले रहे हैं. इसके बाद वह बिहार लौटकर अपनी कैबिनेट की आखिरी बैठक करेंगे. कयास लगाए जा रहे हैं कि 14 अप्रैल को नीतीश कुमार मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे सकते हैं. इस्तीफे के तुरंत बाद नई सरकार बनाने का दावा पेश किया जाएगा. सूत्रों के मुताबिक, 15 या 19 अप्रैल को बिहार में नई सरकार का शपथ ग्रहण समारोह हो सकता है.
क्या होगा नई सरकार का 'पावर फॉर्मूला'?
बिहार की नई सरकार में मंत्रियों की संख्या और विभागों के बंटवारे का फॉर्मूला भी लगभग तय माना जा रहा है. चर्चा है कि नई कैबिनेट में कुल 36 मंत्री हो सकते हैं:
- BJP: मुख्यमंत्री समेत 15 या 16 मंत्री.
- JDU: उपमुख्यमंत्री समेत 15 या 16 मंत्री.
- सहयोगी दल: चिराग पासवान की पार्टी (LJP-R) को 2, जीतन राम मांझी की पार्टी (HAM) को 1 और उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी (RLM) को 1 मंत्री पद मिल सकता है.
जेडीयू की पैनी नजर
भले ही मुख्यमंत्री बीजेपी का हो, लेकिन जेडीयू के नेता साफ कर चुके हैं कि सरकार 'नीतीश स्टाइल' में ही चलेगी. जेडीयू इस बात पर भी नजर रखे हुए है कि बीजेपी किस चेहरे को आगे लाती है, क्योंकि नए मुख्यमंत्री की तुलना सीधे तौर पर नीतीश कुमार के 20 साल के सुशासन से की जाएगी. बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष नितिन नवीन ने हालांकि किसी भी मतभेद से इनकार किया है और कहा है कि सब कुछ एनडीए के गठबंधन धर्म के अनुसार तय समय पर होगा.
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