बिहार की सियासत में इन दिनों एक ही सवाल हर किसी की जुबान पर है- क्या नीतीश कुमार मुख्यमंत्री का पद छोड़ने वाले हैं? और अगर हाँ, तो नई सरकार का गणित क्या होगा? सूत्रों के हवाले से मिल रही बड़ी जानकारी के मुताबिक, भारतीय जनता पार्टी (BJP) और जनता दल यूनाइटेड (JDU) के बीच सरकार गठन को लेकर '50-50' का फॉर्मूला लगभग तय माना जा रहा है. इस नए समीकरण में मुख्यमंत्री की कुर्सी से लेकर मंत्रियों की संख्या तक का पूरा खाका तैयार कर लिया गया है.
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क्या होगा नई सरकार का 'पावर फॉर्मूला'?
सूत्रों के मुताबिक, नई सरकार में शक्ति का संतुलन कुछ इस तरह हो सकता है:
- मुख्यमंत्री: इस बार मुख्यमंत्री का पद भारतीय जनता पार्टी के कोटे में जा सकता है.
- मंत्रिमंडल (BJP): बीजेपी के कोटे से मुख्यमंत्री के अलावा 15 मंत्री बनाए जा सकते हैं.
- मंत्रिमंडल (JDU): जेडीयू खेमे से 16 मंत्री हो सकते हैं, जिसमें दो डिप्टी सीएम के पद भी शामिल हो सकते हैं.
- स्पीकर का पद: बीजेपी विधानसभा स्पीकर के पद पर अपना कब्जा बरकरार रखना चाहती है. वर्तमान में डॉ. प्रेम कुमार इस पद पर हैं, और सरकार के सुचारू संचालन के लिए बीजेपी इस पावरफुल पोस्ट को छोड़ने के पक्ष में नहीं है.
सीएम की रेस में कौन है सबसे आगे?
मुख्यमंत्री पद के लिए वैसे तो कई नाम चर्चा में हैं, लेकिन सम्राट चौधरी का पलड़ा सबसे भारी नजर आ रहा है. इसके पीछे दो मुख्य कारण हैं:
नीतीश की पसंद: सम्राट चौधरी और नीतीश कुमार के बीच हाल के दिनों में अच्छी बॉन्डिंग देखी गई है. सम्राट चौधरी 'लव-कुश' समीकरण (कुशवाहा समाज) में फिट बैठते हैं, जिसे साधना नीतीश कुमार की राजनीति का अहम हिस्सा रहा है.
बीजेपी का भरोसा: बतौर डिप्टी सीएम और गृह मंत्री सम्राट चौधरी ने संगठन और सरकार के बीच बेहतर तालमेल दिखाया है. हालांकि, बीजेपी अपनी चौंकाने वाली राजनीति के लिए जानी जाती है, ऐसे में विजय सिन्हा या किसी अन्य नए चेहरे से भी इनकार नहीं किया जा सकता.
कब होगा बड़ा बदलाव?
सूत्रों की मानें तो बदलाव की तारीखें भी लगभग तय हो गई हैं:
- 13 अप्रैल: इस दिन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अपने पद से इस्तीफा दे सकते हैं, जिसके साथ ही वर्तमान मंत्रिपरिषद भंग हो जाएगी.
- 15 अप्रैल: नई सरकार का शपथ ग्रहण समारोह आयोजित हो सकता है.
नीतीश की चुप्पी और दिल्ली दौरा
इन तमाम अटकलों के बीच नीतीश कुमार ने फिलहाल चुप्पी साध रखी है. न तो उन्होंने मुख्यमंत्री पद छोड़ने पर कोई आधिकारिक बयान दिया है और न ही राज्यसभा जाने की चर्चाओं पर कुछ कहा है. हालांकि, उनके दिल्ली दौरे से पहले इस '50-50' फॉर्मूले की खबरों ने बिहार की राजनीति में उबाल ला दिया है. अब देखना दिलचस्प होगा कि 15 अप्रैल को बिहार को नया मुख्यमंत्री मिलता है या नीतीश कुमार एक बार फिर कोई नया दांव चलते हैं.
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