Hotel Chappal Kand: चिराग पासवान ने कहा- आरोप सही निकले तो होगी कार्रवाई, संजय सिंह ने भेजा 50 करोड़ का मानहानि नोटिस

आशीष अभिनव

• 03:29 PM • 01 Sep 2026

दिल्ली के फाइव स्टार होटल से जुड़े कथित चप्पल कांड पर बिहार की सियासत गरमा गई है. चिराग पासवान ने जांच और आरोप सही पाए जाने पर कार्रवाई की बात कही है. वहीं मंत्री संजय सिंह ने तेज प्रताप यादव को 50 करोड़ का मानहानि नोटिस भेजा है.

Hotel Chappal Kand
सांकेतिक इमेज
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दिल्ली के एक फाइव स्टार होटल से जुड़े कथित 'चप्पल कांड' को लेकर बिहार की सियासत में नया मोड़ आ गया है. इस मामले में जनशक्ति जनता दल के अध्यक्ष तेज प्रताप यादव ने बिहार सरकार के मंत्री संजय कुमार सिंह पर गंभीर आरोप लगाए थे. हालांकि, इन आरोपों की अभी तक किसी आधिकारिक एजेंसी की ओर से पुष्टि नहीं हुई है. इसी बीच संजय सिंह की ओर से तेज प्रताप यादव को 50 करोड़ रुपये का मानहानि नोटिस भेजे जाने की बात सामने आई है. वहीं, चिराग पासवान ने कहा है कि अगर आरोप सही पाए जाते हैं तो कार्रवाई की जाएगी.

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चिराग पासवान ने क्या कहा?

कथित चप्पल कांड पर प्रतिक्रिया देते हुए चिराग पासवान ने जांच की जरूरत बताई. उन्होंने कहा कि अगर लगाए गए आरोप सही साबित होते हैं तो कार्रवाई की जाएगी. चिराग के इस बयान ने मामले को राजनीतिक तौर पर और ज्यादा चर्चा में ला दिया है. खास बात यह है कि एक तरफ मंत्री संजय सिंह आरोपों को खारिज करते हुए कानूनी रास्ते पर आगे बढ़ रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ चिराग पासवान की ओर से जांच और आरोप सही पाए जाने की स्थिति में कार्रवाई की बात कही गई है. यही वजह है कि अब राजनीतिक गलियारों में सवाल उठ रहा है कि क्या चिराग पासवान का यह बयान सरकार के लिए जांच का संदेश है या फिर यह महज एक सैद्धांतिक राजनीतिक प्रतिक्रिया है.

क्या है पूरा 'चप्पल कांड'?

सोशल मीडिया पर अगस्त 2026 के आखिरी सप्ताह से दिल्ली के एक पॉश होटल या रेस्टोरेंट से जुड़ी एक कथित घटना चर्चा में है. दावा किया गया कि एक महिला कर्मचारी के साथ कथित बदसलूकी के बाद विवाद हुआ और मंत्री की चप्पल से पिटाई किए जाने की बात सामने आई. हालांकि, इस पूरी घटना को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक वीडियो, एफआईआर या प्रशासनिक पुष्टि सामने नहीं आई है. ऐसे में सोशल मीडिया पर किए जा रहे दावों को सत्यापित तथ्य के तौर पर पेश नहीं किया जा सकता.

तेज प्रताप यादव ने लगाए थे आरोप

तेज प्रताप यादव ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए मंत्री संजय सिंह पर गंभीर आरोप लगाए थे. उनके दावे के मुताबिक, दिल्ली के एक फाइव स्टार होटल में महिला कर्मचारी के साथ कथित अभद्र व्यवहार और शोषण की कोशिश की गई थी. उन्होंने यह भी दावा किया था कि होटल स्टाफ के हस्तक्षेप के बाद मामला शांत हुआ और बाद में कथित तौर पर पैसे के लेन-देन से मामले को दबाने की कोशिश की गई. तेज प्रताप ने घटना से जुड़े कथित वीडियो फुटेज सामने लाने की बात भी कही थी.

संजय सिंह ने भेजा 50 करोड़ का मानहानि नोटिस

तेज प्रताप यादव के आरोपों के बाद बिहार सरकार के मंत्री संजय सिंह ने कानूनी कार्रवाई का रास्ता अपनाया है. उनकी ओर से तेज प्रताप यादव को 50 करोड़ रुपये का मानहानि नोटिस भेजे जाने की जानकारी सामने आई है. नोटिस में सोशल मीडिया पर लगाए गए आरोपों को झूठा, बेबुनियाद और दुर्भावनापूर्ण बताया गया है. संजय सिंह की ओर से आरोप लगाया गया है कि इन बयानों से उनकी सार्वजनिक छवि और प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा है. बताया गया है कि नोटिस में सोशल मीडिया पोस्ट हटाने और सार्वजनिक रूप से बिना शर्त माफी मांगने की मांग की गई है. मांग पूरी नहीं होने की स्थिति में कानूनी कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है.

सवाल- आरोपों का आधार क्या है?

इस पूरे विवाद में सबसे बड़ा सवाल यही है कि किसी व्यक्ति पर इतने गंभीर आरोप लगाए जाने का आधार क्या है? सोशल मीडिया पर किसी घटना का दावा वायरल होना और उसका आधिकारिक तौर पर सत्यापित होना दो अलग-अलग बातें हैं. जब तक किसी आरोप के समर्थन में विश्वसनीय दस्तावेज, वीडियो, प्रत्यक्ष साक्ष्य या आधिकारिक जांच सामने नहीं आती, तब तक उसे स्थापित तथ्य मानना उचित नहीं होगा.ऐसे में यह सवाल भी अहम है कि अगर घटना वास्तव में हुई थी तो उसके सबूत कहां हैं? क्या होटल के सीसीटीवी फुटेज सामने आएंगे? क्या कोई आधिकारिक शिकायत दर्ज हुई? क्या पुलिस या किसी अन्य एजेंसी ने मामले की जांच शुरू की है? दूसरी तरफ, अगर आरोप गलत हैं तो किसी सार्वजनिक व्यक्ति की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने वाले ऐसे दावों पर कानूनी कार्रवाई का रास्ता अपनाया जाना भी स्वाभाविक है.

चिराग के बयान से बढ़ी राजनीतिक हलचल

चिराग पासवान के बयान के बाद इस मामले ने एक नया राजनीतिक मोड़ ले लिया है. एक तरफ मंत्री संजय सिंह ने मानहानि नोटिस के जरिए आरोपों को चुनौती दी है, तो दूसरी तरफ चिराग पासवान ने आरोप सही पाए जाने पर कार्रवाई की बात कही है. इसी विरोधाभासी स्थिति ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं. क्या सरकार इस मामले की औपचारिक जांच कराएगी? क्या संबंधित होटल के सीसीटीवी फुटेज की जांच होगी? क्या कथित घटना से जुड़े कोई ठोस सबूत सामने आएंगे? फिलहाल इतना साफ है कि 'चप्पल कांड' की चर्चा सोशल मीडिया से निकलकर बिहार की राजनीति और कानूनी लड़ाई तक पहुंच चुकी है. अब निगाह इस बात पर है कि इस मामले में कोई आधिकारिक जांच होती है या नहीं और अगर जांच होती है तो उसके नतीजे क्या सामने आते हैं.