बिहार की सियासत में इन दिनों हलचल तेज है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अब राज्यसभा के सांसद बन गए हैं और उन्होंने दिल्ली में शपथ भी ले ली है. इसके साथ ही बिहार के मुख्यमंत्री पद से उनके इस्तीफे की प्रक्रिया अब महज एक औपचारिकता रह गई है. हालांकि, नीतीश के इस कदम के बाद विपक्ष ने बीजेपी और एनडीए पर तीखे हमले शुरू कर दिए हैं. आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने बीजेपी पर वादाखिलाफी का बड़ा आरोप लगाया है.
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'25 से 30' का वादा 5 महीने में ही टूटा
बिहार चुनाव के दौरान एनडीए और जेडीयू ने एक बड़ा नारा दिया था- '25 से 30 फिर से नीतीश'. इस नारे के जरिए जनता को यह विश्वास दिलाया गया था कि अगले 5 साल तक नीतीश कुमार ही बिहार के मुख्यमंत्री बने रहेंगे. तेजस्वी यादव का आरोप है कि चुनाव में नीतीश के चेहरे का फायदा उठाकर 202 सीटें तो जीत ली गईं, लेकिन 5 साल का वादा महज 5 महीने के भीतर ही तोड़ दिया गया.
तेजस्वी का तंज
नीतीश कुमार के शपथ ग्रहण के बाद मीडिया से बातचीत में तेजस्वी यादव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह पर सीधा निशाना साधा. उन्होंने कहा कि अब जो भी मुख्यमंत्री बिहार की जनता पर थोपा जाएगा, वह केवल "दो गुजरातियों का रबर स्टैंप" होगा. तेजस्वी के अनुसार, आने वाले मुख्यमंत्री के पास न तो जनता का आशीर्वाद होगा और न ही जनादेश; उसे केवल दिल्ली के आकाओं का वरदहस्त प्राप्त होगा.
प्रशांत किशोर और तेजस्वी की भविष्यवाणी हुई सच?
दिलचस्प बात यह है कि चुनाव के दौरान ही तेजस्वी यादव और जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर लगातार यह दावा कर रहे थे कि नीतीश कुमार 5 साल तक मुख्यमंत्री नहीं रहेंगे. तेजस्वी ने महाराष्ट्र के 'एकनाथ शिंदे' वाले खेल का भी जिक्र किया था और कहा था कि बीजेपी नीतीश को बीच में ही हटा देगी. आज नीतीश के राज्यसभा जाने के बाद तेजस्वी इसे अपनी बात की जीत मान रहे हैं.
'भूंजा पार्टी' पर भी साधा निशाना
तेजस्वी यादव ने नीतीश कुमार के करीबी नेताओं (ललन सिंह, संजय झा, विजय चौधरी, अशोक चौधरी), जिन्हें वे अक्सर 'भूंजा पार्टी' कहते हैं, पर भी तंज कसा है. उनका कहना है कि इन लोगों ने भाजपा के साथ मिलकर नीतीश कुमार को अपमानित करने की साजिश रची.
अब सबकी निगाहें बीजेपी पर टिकी हैं कि वह बिहार की कमान किसे सौंपती है और क्या नए मुख्यमंत्री के पास राज्य चलाने का नैतिक जनादेश होगा या नहीं.
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