Bihar Politics: इतनी आसानी से कुर्सी नहीं छोड़ेंगे नीतीश कुमार! PM मोदी और अमित शाह से मुलाकात में होगी 'बड़ी डील'

नीतीश कुमार 10 अप्रैल को राज्यसभा सदस्य की शपथ लेने के बाद पीएम मोदी और अमित शाह से मुलाकात करेंगे, जहां बिहार के नए मुख्यमंत्री और भविष्य के रोडमैप पर अंतिम मुहर लगेगी। इसके बाद ही उनके इस्तीफे की औपचारिक घोषणा होने की उम्मीद है.

Nitish Kumar
Nitish Kumar

आशीष अभिनव

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बिहार की सियासत में इन दिनों सबसे बड़ा सवाल यही है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार आखिर अपनी कुर्सी कब छोड़ेंगे? कयासों का बाजार गर्म है, लेकिन ताज़ा जानकारी के मुताबिक नीतीश कुमार यूं ही मुख्यमंत्री पद का त्याग नहीं करने वाले हैं. दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के साथ होने वाली उनकी मुलाकात में बिहार के भविष्य और सत्ता हस्तांतरण को लेकर एक 'बड़ी डील' होने की संभावना है.

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बैठकों का दौर और इस्तीफे की पटकथा

नीतीश कुमार के अगले कदम को लेकर दो महत्वपूर्ण बैठकें होने वाली हैं:

  • 6 अप्रैल: पटना में जेडीयू (JDU) की एक बड़ी बैठक बुलाई गई है.
  • 9 अप्रैल: दिल्ली में जेडीयू की राष्ट्रीय परिषद की बैठक होगी.
  • 10 अप्रैल: नीतीश कुमार राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ लेंगे.

माना जा रहा है कि शपथ लेने के बाद ही नीतीश कुमार प्रधानमंत्री मोदी और अमित शाह से मुलाकात करेंगे. चर्चा है कि दिल्ली से पटना लौटने के बाद वह किसी भी समय अपने पद से इस्तीफा दे सकते हैं.

क्या होगी नीतीश कुमार की 'बड़ी डील'?

नीतीश कुमार केंद्र की राजनीति में जाने से पहले बिहार को लेकर अपनी शर्तें साफ कर देना चाहते हैं. इस मुलाकात के मुख्य बिंदु हो सकते हैं:

  • बिहार सरकार का रोडमैप: नीतीश कुमार यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि उनके जाने के बाद बिहार में सरकार कैसे चलेगी और विकास के जो काम अभी चल रहे हैं, उन्हें कैसे गति दी जाएगी.
  • मंत्रिमंडल का स्वरूप: नई सरकार में जेडीयू के कितने मंत्री होंगे और उनका प्रभाव क्या रहेगा, इस पर भी बात होनी तय है.
  • अगला सीएम कौन? बीजेपी और जेडीयू दोनों ही दलों के नेताओं का कहना है कि अगला मुख्यमंत्री 'शीर्ष नेतृत्व' तय करेगा. नीतीश कुमार चाहते हैं कि नए चेहरे के चयन में उनकी मर्जी और राय को प्राथमिकता दी जाए.

राष्ट्रीय राजनीति में नीतीश का संदेश

राज्यसभा जाने के बावजूद नीतीश कुमार यह संदेश देना चाहते हैं कि बिहार की राजनीति में उनका प्रभाव कम नहीं हुआ है. बिना उनकी सहमति के बिहार एनडीए में कोई बड़ा फैसला नहीं लिया जा सकता. दिल्ली की बैठकों में वह पार्टी कार्यकर्ताओं की मांगों और जेडीयू के भविष्य को लेकर भी शीर्ष नेतृत्व से मंत्रणा करेंगे.

अब देखना दिलचस्प होगा कि दिल्ली से लौटने के बाद नीतीश कुमार कब आधिकारिक तौर पर इस्तीफा देते हैं और बिहार में नई सरकार के गठन की प्रक्रिया कैसे आगे बढ़ती है.

 

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