बिहार में सत्ता परिवर्तन और सम्राट चौधरी के मुख्यमंत्री बनने के बाद अब सबकी नजरें आगामी 24 अप्रैल पर टिकी हैं. इस दिन नई सरकार विधानसभा में अपना विश्वास मत (Floor Test) हासिल करेगी. विधानसभा सचिवालय ने एक दिवसीय विशेष सत्र बुलाने की अधिसूचना जारी कर दी है, जिससे साफ है कि नई सरकार संवैधानिक प्रक्रिया को जल्द से जल्द पूरा करना चाहती है.
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24 अप्रैल को होगा शक्ति प्रदर्शन
विधानसभा सचिवालय द्वारा जारी नोटिस के अनुसार, शुक्रवार (24 अप्रैल) को सुबह 11:00 बजे से सदन की कार्यवाही शुरू होगी. इस विशेष सत्र का मुख्य एजेंडा सरकार द्वारा विश्वास मत पेश करना और उसे पारित कराना है. सचिवालय ने सभी विधायकों की सदन में उपस्थिति अनिवार्य कर दी है ताकि किसी भी तरह की राजनीतिक अनिश्चितता की स्थिति न बने.
विपक्ष की स्थिति कमजोर
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि वर्तमान में महागठबंधन की स्थिति काफी कमजोर नजर आ रही है. विपक्ष के पास फिलहाल सिर्फ 35 विधायकों का समर्थन बचता दिख रहा है. हाल ही में राज्यसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस और आरजेडी के कुछ विधायकों की अनुपस्थिति ने विपक्षी एकता की पोल खोल दी थी. ऐसे में सम्राट चौधरी सरकार के लिए फ्लोर टेस्ट महज एक औपचारिकता माना जा रहा है.
मंत्रिमंडल विस्तार की सुगबुगाहट
फ्लोर टेस्ट के बाद बिहार की राजनीति में सबसे बड़ी गतिविधि मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर होगी. वर्तमान में सरकार की कमान मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और दो उप-मुख्यमंत्री- विजय चौधरी और विजेंद्र प्रसाद यादव के हाथों में है. सूत्रों की मानें तो मई के पहले सप्ताह में कैबिनेट का विस्तार किया जा सकता है. संभावना है कि 4 मई को पांच राज्यों के चुनावी नतीजे आने के बाद नए मंत्रियों को शपथ दिलाई जाएगी.
सहयोगियों को साधने की चुनौती
भले ही एनडीए (NDA) के पास संख्या बल है, लेकिन मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर छोटे सहयोगी दलों के भीतर हलचल और बेचैनी देखी जा रही है. ये दल सरकार में अपनी भागीदारी अपने समर्थन के अनुपात में सुनिश्चित करना चाहते हैं. आने वाले दिनों में पटना से लेकर दिल्ली तक बैठकों का दौर तेज होने की संभावना है, ताकि मंत्रिमंडल में सभी सहयोगियों को सही प्रतिनिधित्व मिल सके.
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