बिहार में राजस्व से जुड़े मामलों खासकर दाखिल-खारिज (म्यूटेशन) और परिमार्जन के निपटारे को लेकर जारी रैंकिंग में बड़ा बदलाव देखने को मिला है. ताजा रिपोर्ट के अनुसार, सीतामढ़ी जिला पूरे बिहार में पहले स्थान पर रहा, जबकि सहरसा जिला सबसे नीचे पहुंच गया है. इस रिपोर्ट के बाद एक बार फिर सीतामढ़ी के डीएम रिची पांडेय की चर्चाएं तेज हो गई है. राज्य के सभी 38 जिलों में राजस्व संबंधी कार्यों की लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है. इस रैंकिंग में दाखिल-खारिज, परिमार्जन, जमाबंदी, ऑनलाइन आवेदनों का निष्पादन, अभियान के तहत कार्यों की प्रगति, आधार सीडिंग, डीएम और डीसीएलआर कोर्ट में मामलों का समाधान सहित कई मानकों को शामिल किया गया है.
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ऐसे तय होती है रैंकिंग
सरकार द्वारा तैयार इस रैंकिंग सिस्टम में कुल 100 अंकों का प्रावधान है. विभिन्न मानकों पर जिलों के प्रदर्शन के आधार पर अंक दिए जाते हैं. जो जिला सबसे अधिक अंक प्राप्त करता है, वही पहले स्थान पर आता है.
टॉप जिलों का प्रदर्शन
सीतामढ़ी- 82.93 अंक के साथ पहले स्थान पर
शेखपुरा- 81.81 अंक के साथ दूसरे स्थान पर
बांका- 81.75 अंक के साथ तीसरे स्थान पर
समस्तीपुर- 79.19 अंक के साथ चौथे स्थान पर
भोजपुर- 79.01 अंक के साथ पांचवें स्थान पर
खास बात यह है कि जनवरी की रैंकिंग में बांका पहले स्थान पर था, लेकिन फरवरी में वह खिसककर तीसरे स्थान पर पहुंच गया.
खराब प्रदर्शन करने वाले जिले
रिपोर्ट के अनुसार सबसे खराब प्रदर्शन करने वाले जिलों में:
पटना जिला- 64.67 अंक (35वां स्थान)
अररिया- 63.46 अंक (36वां स्थान)
लखीसराय- 60.97 अंक (37वां स्थान)
सहरसा- 60.71 अंक (38वां स्थान, सबसे नीचे)
रैंकिंग का आधार और मॉनिटरिंग सिस्टम
राज्य सरकार द्वारा राजस्व संबंधी कार्यों की नियमित मॉनिटरिंग की जा रही है. इस प्रक्रिया में जिलों के प्रदर्शन को कई मानकों पर परखा जाता है. इनमें प्रमुख रूप से-
- दाखिल-खारिज (Mutation) के मामलों का निष्पादन
- परिमार्जन (Correction) से जुड़े कार्य
- ऑनलाइन प्राप्त आवेदनों का समयबद्ध निपटारा
- अभियान के तहत लंबित मामलों का समाधान
- आधार सीडिंग की स्थिति
- डीएम और डीसीएलआर कोर्ट में मामलों का निष्पादन
- ई-मापी और अन्य डिजिटल प्रक्रियाओं का उपयोग
इन सभी मानकों को मिलाकर कुल 100 अंकों का स्कोर तय किया जाता है और उसी आधार पर जिलों की रैंकिंग तैयार की जाती है. राजधानी पटना का इस तरह पिछड़ना प्रशासनिक दृष्टिकोण से बड़ा सवाल खड़ा करता है, क्योंकि यहां संसाधन और निगरानी तंत्र अपेक्षाकृत मजबूत माने जाते हैं.
अंचल स्तर पर भी प्रतिस्पर्धा
राज्य सरकार ने सिर्फ जिला स्तर पर ही नहीं, बल्कि अंचल (सर्किल) स्तर पर भी रैंकिंग शुरू की है, ताकि जमीनी स्तर पर जवाबदेही तय की जा सके. बेहतर प्रदर्शन करने वाले अंचल में निम्नलिखित शामिल है:
- मुसरीघरारी (समस्तीपुर) - 93.38 अंक
- जगदीशपुर (भोजपुर) - 93.30 अंक
- बैरगनिया (सीतामढ़ी) - 92.85 अंक
- चौराौत (सीतामढ़ी) - 91.77 अंक
- खुदाबंदपुर (बेगूसराय) - 91.69 अंक
सबसे खराब प्रदर्शन
- पटना सिटी अंचल - 62.47 अंक (537वां स्थान)
- शाहपुर (भोजपुर) - 62.95 अंक
- बड़हरा (भोजपुर) - 62.95 अंक
यह आंकड़े बताते हैं कि कई जगहों पर जमीनी स्तर पर सुधार की अभी भी बड़ी जरूरत है.
क्या है सरकार की मंशा?
इस पूरी रैंकिंग प्रणाली का मुख्य उद्देश्य है:
- राजस्व कार्यों में पारदर्शिता लाना
- लंबित मामलों को तेजी से निपटाना
- डिजिटल प्रक्रियाओं को बढ़ावा देना
- अधिकारियों की जवाबदेही तय करना
सरकार चाहती है कि आम लोगों को जमीन से जुड़े मामलों में कम से कम परेशानी हो और उन्हें समय पर न्याय मिल सके.
क्यों अहम है यह रैंकिंग?
बिहार जैसे राज्य में भूमि विवाद एक बड़ा मुद्दा रहा है. दाखिल-खारिज और परिमार्जन जैसे कार्यों में देरी से आम जनता को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है. ऐसे में यह रैंकिंग न केवल प्रशासनिक सुधार का माध्यम है, बल्कि यह जिलों के बीच एक स्वस्थ प्रतिस्पर्धा भी पैदा करती है.
ताजा रैंकिंग से यह साफ हो गया है कि जहां कुछ जिलों ने उत्कृष्ट प्रदर्शन कर मिसाल पेश की है, वहीं कई जिलों को अपनी कार्यप्रणाली में सुधार करने की सख्त जरूरत है. खासकर राजधानी पटना और सहरसा जैसे जिलों का पिछड़ना प्रशासन के लिए चेतावनी है. आने वाले महीनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि पिछड़े जिले अपनी स्थिति सुधारने के लिए क्या कदम उठाते हैं और क्या वे टॉप जिलों की बराबरी कर पाते हैं.
कौन हैं DM रिची पांडेय?
रिची पांडेय बिहार कैडर की आईएएस अधिकारी हैं, जो अपने प्रशासनिक कार्यों और सख्त लेकिन संवेदनशील कार्यशैली के लिए जाने जाते हैं. उन्होंने विभिन्न जिलों में महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया है और प्रशासनिक सुधार, पारदर्शिता और जनहित से जुड़े मुद्दों पर सक्रिय भूमिका निभाई है. अपने कार्यकाल में उन्होंने राजस्व, शिक्षा और सामाजिक योजनाओं के क्रियान्वयन पर विशेष फोकस किया है. बेहतर मॉनिटरिंग सिस्टम और टीम वर्क के जरिए उन्होंने कई क्षेत्रों में प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत किया है.
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