नदियों की गाद से सड़क बनाएगी सम्राट सरकार, बाढ़ से निपटने के लिए बिहार और केंद्र के बीच बड़ा MoU

बिहार में बाढ़ की समस्या कम करने के लिए सम्राट सरकार ने गाद प्रबंधन नीति 2026 के तहत नई पहल की है. नदियों, बैराजों और जलाशयों से निकाली गई गाद का इस्तेमाल सड़क निर्माण और तटबंध बनाने में किया जाएगा. इसको लेकर बिहार सरकार और केंद्र के बीच दिल्ली में MoU साइन हुआ है. सीएम सम्राट और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के बीच इसको लेकर चर्चा हुई है.

bihar river silt management policy
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बिहार में हर साल बाढ़ से होने वाले नुकसान को कम करने के लिए सम्राट चौधरी सरकार ने एक नई योजना पर काम शुरू किया है. अब तक नदियों में जमा गाद को बाढ़ की समस्या बढ़ाने वाले कारकों में गिना जाता रहा है, लेकिन सरकार इसी गाद का इस्तेमाल बुनियादी ढांचे के निर्माण में करने की तैयारी कर रही है. बिहार की नदियों से निकलने वाली उपयुक्त गाद और मिट्टी से सड़कें बनाई जाएंगी और तटबंधों के निर्माण एवं मरम्मत में भी इसका इस्तेमाल होगा.

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बिहार जलस्रोत पुनर्स्थापन एवं गाद प्रबंधन नीति 2026 लागू

इस पहल के लिए बिहार सरकार ने बिहार जलस्रोत पुनर्स्थापन एवं गाद प्रबंधन नीति 2026 लागू की है. इसके तहत राज्य की नदियों, बैराजों और जलाशयों से वैज्ञानिक तरीके से गाद निकालने की योजना बनाई गई है. सरकार का मानना है कि नदियों में जमा गाद हटने से उनकी जलधारण क्षमता में सुधार होगा और बाढ़ के खतरे को कम करने में मदद मिल सकती है.

नितिन गडकरी के साथ सम्राट चौधरी ने किया MoU

इस नीति को जमीन पर उतारने के लिए नई दिल्ली में बिहार सरकार और केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के बीच महत्वपूर्ण समझौता हुआ है. मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी की मौजूदगी में MoU पर हस्ताक्षर किए गए. इस समझौते के तहत बिहार की नदियों से ड्रेजिंग के जरिए गाद निकाली जाएगी और उपयुक्त सामग्री का इस्तेमाल राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं में किया जा सकेगा.

नदियों की सफाई के साथ सड़क निर्माण में भी होगा फायदा

इस योजना की खास बात यह है कि नदियों से निकाली गई गाद को बेकार नहीं छोड़ा जाएगा. उसकी गुणवत्ता और उपयोगिता के आधार पर निर्माण कार्यों में इस्तेमाल किया जाएगा. सड़क निर्माण, तटबंध बनाने और पुराने तटबंधों की मरम्मत में इसका उपयोग करने की योजना है. इससे एक तरफ नदियों में जमा गाद कम होगी, तो दूसरी तरफ बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए निर्माण सामग्री का एक अतिरिक्त स्रोत उपलब्ध हो सकेगा.

निर्माण लागत घटाने और परियोजनाओं में तेजी की उम्मीद

सरकार को उम्मीद है कि गाद के इस उपयोग से सड़क और अन्य बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की लागत कम करने में मदद मिलेगी. साथ ही निर्माण सामग्री की उपलब्धता बढ़ने से परियोजनाओं को तेजी से पूरा करने का रास्ता खुल सकता है. हालांकि, इसके लिए निकाली गई गाद की गुणवत्ता और निर्माण कार्यों में उसकी उपयुक्तता की जांच अहम होगी.

किसानों और जल प्रबंधन को भी मिल सकता है लाभ

गाद प्रबंधन की इस पहल से किसानों को भी फायदा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है. नदियों और जलाशयों की सफाई से जलस्रोतों की क्षमता में सुधार हो सकता है और बेहतर जल प्रबंधन में मदद मिल सकती है. वहीं, गाद के उपयोग से प्राकृतिक संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल संभव होगा. केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने भी बिहार की इस नीति की सराहना की है.

उत्तर बिहार की बाढ़ की समस्या पर रहेगी खास नजर

बिहार में बाढ़ नियंत्रण लंबे समय से बड़ी चुनौती रही है. हर साल नदियों का जलस्तर बढ़ने से उत्तर बिहार के कई जिले प्रभावित होते हैं. इससे जान-माल के साथ फसलों को भी नुकसान पहुंचता है. ऐसे में सरकार की नई गाद प्रबंधन नीति को बाढ़ के खतरे को कम करने की दिशा में एक पहल के तौर पर देखा जा रहा है. अब इस योजना की असली सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि नदियों से गाद निकालने और उसके निर्माण कार्यों में इस्तेमाल की प्रक्रिया कितनी प्रभावी तरीके से लागू होती है.