बिहार में दरोगा बहाली की मुख्य परीक्षा का आयोजन बेहद कड़ी सुरक्षा के बीच किया गया. इस परीक्षा को लेकर प्रदेश के युवाओं के साथ-साथ अन्य राज्यों के अभ्यर्थियों में भी भारी उत्साह देखने को मिला. परीक्षा केंद्रों के बाहर सुबह से ही परीक्षार्थियों की भारी भीड़ जमा हो गई थी. पहली पाली की परीक्षा समाप्त होने के बाद जब अभ्यर्थी परीक्षा केंद्रों से बाहर निकले, तो उनके चेहरों पर एक अलग ही आत्मविश्वास और संतोष देखने को मिला. परीक्षा देकर बाहर आए छात्र-छात्राओं ने परीक्षा के स्तर, अपनी तैयारियों और दरोगा बनने के अपने सपनों को लेकर खुलकर बातचीत की.
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पहली पाली का पेपर रहा सामान्य, जीके से तय होगी मेरिट
परीक्षा देकर बाहर निकले अभ्यर्थियों के मुताबिक पहली पाली में हिंदी का पेपर आयोजित किया गया था, जो कि क्वालीफाइंग नेचर का था. अधिकांश छात्रों ने इस पेपर को 'मॉडरेट' यानी मध्यम स्तर का बताया. अभ्यर्थियों का कहना था कि हिंदी के पेपर में पास होना बहुत ज्यादा मुश्किल नहीं है, असली परीक्षा तो दूसरी पाली में होने वाली सामान्य ज्ञान (जीके-जीएस) की है.
छात्रों ने साफ किया कि दोपहर 2:00 बजे से शुरू होने वाली दूसरी पाली के सामान्य ज्ञान के पेपर के आधार पर ही अंतिम मेरिट लिस्ट तैयार की जाएगी, इसलिए उनका पूरा ध्यान और असली परीक्षा उसी पेपर पर टिकी हुई है.
भौकाल बनाने और वर्दी के शौक के लिए बनना है दरोगा
परीक्षा देने आए अभ्यर्थियों से जब यह पूछा गया कि वे पुलिस महकमे में दरोगा ही क्यों बनना चाहते हैं, तो उन्होंने बेहद दिलचस्प और मजेदार जवाब दिए. मुजफ्फरपुर से आए एक अभ्यर्थी ने मुस्कुराते हुए कहा कि पुलिस महकमे में दरोगा का पद सबसे बेहतरीन माना जाता है क्योंकि इस पद पर आने के बाद समाज और महकमे में एक अलग ही भौकाल यानी रूतबा बनता है.
वहीं, पहली बार मुख्य परीक्षा में शामिल होने आई एक महिला अभ्यर्थी ने बताया कि पिछले साल ही उनका ग्रेजुएशन पूरा हुआ है और उनका यह पहला प्रयास है. उन्होंने कहा कि दरोगा के पद पर फील्ड वर्क की बेहतरीन अपॉर्चुनिटी मिलती है और इसके साथ ही खाकी वर्दी पहनने का जो सपना हर युवा का होता है, वह भी पूरा हो जाता है.
सालों की तपस्या और मध्य प्रदेश से पहुंचे छात्र
इस परीक्षा की दीवानगी का आलम यह था कि बिहार के सुदूर जिलों के अलावा दूसरे राज्यों के छात्र भी परीक्षा देने पहुंचे थे. मध्य प्रदेश के ग्वालियर से आए एक अभ्यर्थी ने बताया कि वह साल 2022-2023 यानी लॉकडाउन के समय से ही इस परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं. इसके अलावा हाजीपुर से आए एक अन्य परीक्षार्थी ने बताया कि वह पिछले लगभग 8 सालों से दरोगा बनने का सपना संजोए तैयारी में जुटे हुए हैं.
कैमूर, छपरा, सिवान और भभुआ जैसे जिलों से आए कई छात्रों का यह दूसरा या तीसरा प्रयास था. पिछले प्रयासों में मेरिट लिस्ट से बाहर हो चुके अभ्यर्थियों ने इस बार पूरी ताकत झोंक दी है और उन्हें पूरा भरोसा है कि इस बार वे अंतिम रूप से चयनित होकर दरोगा का पद हासिल कर लेंगे.
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