पटना के गर्दनीबाग में छात्रों का 'छात्र न्याय सत्याग्रह' जारी है. आंदोलन के दौरान छात्र नेता दिलीप कुमार ने प्रतियोगी परीक्षाओं और लंबित भर्तियों से जुड़े कई मुद्दों को लेकर सरकार के सामने अपनी मांगें रखीं. उन्होंने छात्रों से अपील की कि वे घर, कोचिंग या लाइब्रेरी में बैठने के बजाय आंदोलन स्थल पर पहुंचें, ताकि सरकार तक छात्रों की आवाज मजबूती से पहुंचाई जा सके. दिलीप कुमार ने कहा कि छात्र न्याय सत्याग्रह की शुरुआत के कुछ घंटे बाद ही TR-4 भर्ती का विज्ञापन जारी किया गया, लेकिन छात्रों की कई अन्य मांगें अभी भी बाकी हैं. उनके मुताबिक आंदोलन सिर्फ शिक्षक भर्ती तक सीमित नहीं है, बल्कि BSSC, लाइब्रेरियन बहाली, दरोगा, सिपाही, BPSC और सिविल सेवा समेत कई परीक्षाओं और भर्तियों से जुड़े मुद्दे इसमें शामिल हैं.
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TR-4 में नेगेटिव मार्किंग हटाने की मांग
TR-4 भर्ती को लेकर दिलीप कुमार ने नेगेटिव मार्किंग खत्म करने की मांग की है. इसके साथ ही उन्होंने कहा कि भर्ती प्रक्रिया में एक ही परीक्षा होनी चाहिए, ताकि अभ्यर्थियों को बार-बार परीक्षा प्रक्रिया से नहीं गुजरना पड़े.
BSSC परीक्षा को लेकर भी सवाल
BSSC को लेकर छात्र नेता ने संविदा से जुड़े वेटेज को हटाने, परीक्षा ऑफलाइन मोड में कराने और परीक्षा की तारीख जल्द घोषित करने की मांग की है. उनका कहना है कि लंबे समय से परीक्षा और भर्ती प्रक्रिया को लेकर अभ्यर्थियों के बीच असमंजस की स्थिति बनी हुई है.
18 साल से लंबित लाइब्रेरियन बहाली का मुद्दा
दिलीप कुमार ने लाइब्रेरियन बहाली का मुद्दा भी उठाया. उन्होंने दावा किया कि यह बहाली करीब 18 वर्षों से लंबित है. इसके अलावा दरोगा भर्ती के 1799 पदों की मेंस परीक्षा में कथित गड़बड़ी की जांच और 17वीं BPSC परीक्षा में पारदर्शिता की मांग भी आंदोलन में शामिल है.
परीक्षा में पारदर्शिता की मांग
छात्र नेता ने परीक्षा प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए परीक्षा समाप्त होने के बाद अभ्यर्थियों को OMR शीट की कार्बन कॉपी, क्वेश्चन बुकलेट और आंसर की उपलब्ध कराने की मांग की. इसके साथ ही रिजल्ट जारी करते समय कट-ऑफ मार्क्स भी सार्वजनिक करने की मांग रखी गई है. उनका कहना है कि परीक्षा और रिजल्ट प्रक्रिया में पारदर्शिता रहने से अभ्यर्थियों के मन में उठने वाले सवालों और विवादों को कम किया जा सकता है.
छात्रों से आंदोलन में पहुंचने की अपील
गर्दनीबाग धरना स्थल से दिलीप कुमार ने छात्रों से बड़ी संख्या में आंदोलन में शामिल होने की अपील की. उन्होंने कहा कि अगर छात्र घर, कोचिंग और लाइब्रेरी से निकलकर धरना स्थल पर नहीं पहुंचेंगे और छात्रों की संख्या कम रहेगी, तो सरकार उनकी मांगों को गंभीरता से नहीं लेगी. उन्होंने यह भी कहा कि यह कोई राजनीतिक आंदोलन नहीं है, बल्कि छात्रों की मांगों को लेकर चलाया जा रहा आंदोलन है. साथ ही उन्होंने संकेत दिया कि अगर छात्रों की भागीदारी नहीं बढ़ती है तो आंदोलन को आगे जारी रखना मुश्किल होगा. फिलहाल गर्दनीबाग में चल रहे छात्र न्याय सत्याग्रह में भर्ती परीक्षाओं, लंबित नियुक्तियों और परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता जैसे मुद्दे प्रमुख बने हुए हैं. अब देखना होगा कि सरकार छात्रों की इन मांगों पर क्या कदम उठाती है.
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