बिहार के सरकारी स्कूलों में पढ़ाने वाले लाखों शिक्षकों के लिए राहत भरी और बड़ी खबर सामने आई है. अब शिक्षकों को आकस्मिक (CL), मेडिकल या अन्य किसी भी प्रकार की छुट्टी मंजूर कराने के लिए जिला शिक्षा कार्यालयों (DEO Office) के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे और न ही बाबू-अधिकारियों की मिन्नतें करनी पड़ेंगी.
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बिहार के शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी के निर्देश पर शिक्षा विभाग छुट्टियों की पूरी प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल और ऑनलाइन करने जा रहा है. इसके लिए जिलावार विशेष पोर्टल तैयार किया जा रहा है, जिससे महज 24 घंटे के भीतर छुट्टी का निपटारा हो जाएगा.
मोबाइल से करें आवेदन, 24 घंटे में मिलेगा फैसला
शिक्षा विभाग की नई योजना के मुताबिक, राज्य के सभी जिलों में अलग-अलग पोर्टल शुरू किए जाएंगे. इनकी सीधी निगरानी संबंधित जिले के जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) और जिला शिक्षा अधीक्षक (DSE) करेंगे.
1. डिजिटल आवेदन: शिक्षक अपने नियंत्रित अधिकारी के अनुसार सीधे पोर्टल पर मोबाइल या कंप्यूटर के जरिए छुट्टी के लिए अप्लाई कर सकेंगे.
2.तुरंत अपडेट: आवेदन सबमिट होते ही शिक्षक के रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर कन्फर्मेशन मैसेज आ जाएगा.
3.24 घंटे की डेडलाइन: अधिकारी को 24 घंटे के अंदर आवेदन पर फैसला (स्वीकृत या अस्वीकृत) लेना अनिवार्य होगा, जिसकी जानकारी तुरंत शिक्षक को एसएमएस/मैसेज से मिल जाएगी.
पोर्टल पर उपलब्ध रहेगा छुट्टियों का पूरा लेखा-जोखा
इस नए ऑनलाइन सिस्टम का एक बड़ा फायदा यह होगा कि पोर्टल पर हर शिक्षक का व्यक्तिगत अवकाश रिकॉर्ड दर्ज रहेगा.
शिक्षक जब भी पोर्टल खोलेंगे, उन्हें पता चल जाएगा कि उनके खाते में कितनी मेडिकल लीव, कैजुअल लीव (CL) या अन्य छुट्टियां बची हैं. छुट्टी का आवेदन करते समय शिक्षकों को वजह चुननी होगी और उपलब्ध लीव के आधार पर सिस्टम अपने आप प्रोसेस करेगा.
'भ्रष्टाचार और देरी पर लगेगा लगाम': शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी
शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने बताया कि उन्होंने स्वयं इस पारदर्शी व्यवस्था को लागू करने के निर्देश दिए हैं.
मंत्री ने दिया साफ निर्देश
"छुट्टी मंजूर कराने के नाम पर शिक्षकों से होने वाली अनावश्यक दौड़-धूप और भ्रष्टाचार की शिकायतों को खत्म करने के लिए यह कदम उठाया गया है. ऑनलाइन पोर्टल से पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी. पोर्टल को विकसित करने और चलाने में जो भी खर्च आएगा, उसे पूरी तरह शिक्षा विभाग वहन करेगा; शिक्षकों से एक भी रुपया नहीं लिया जाएगा."
इस नई व्यवस्था के लागू होने से न केवल शिक्षकों का समय और ऊर्जा बचेगी, बल्कि शिक्षा विभाग में छुट्टी से जुड़े बिचौलियों के सिंडिकेट पर भी करारा प्रहार होगा.
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