बिहार की राजनीति में बाहुबल और जाति के साथ-साथ अब आर्थिक ताकत भी एक बड़ा फैक्टर बनकर उभरी है. एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) द्वारा जारी ताजा आंकड़ों ने राज्य के सबसे धनी विधायकों की सूची शेयर की है. चुनावी हलफनामों के आधार पर तैयार इस लिस्ट में मुंगेर के विधायक कुमार प्रणय बिहार के सबसे अमीर विधायक बनकर उभरे हैं.
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बिहार के सबसे अमीर विधायक
1. कुमार प्रणय (मुंगेर) - ₹170 करोड़
सूची में सबसे शीर्ष पर मुंगेर से विधायक कुमार प्रणय का नाम है. इनकी घोषित कुल संपत्ति लगभग 170 करोड़ रुपये है. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इतनी बड़ी आर्थिक शक्ति न केवल चुनावी रणनीतियों को प्रभावित करती है, बल्कि स्थानीय स्तर पर उनके सामाजिक प्रभाव को भी मजबूत करती है.
2. अनंत कुमार सिंह (मोकामा) - ₹100 करोड़+
मोकामा के कद्दावर और चर्चित नेता अनंत कुमार सिंह इस सूची में दूसरे स्थान पर हैं. 100 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति के मालिक अनंत सिंह का क्षेत्रीय प्रभुत्व और उनकी आर्थिक मजबूती लंबे समय से बिहार की राजनीति में चर्चा का विषय रही है.
3. कुमार पुष्पंजय (बरबीघा) - ₹94 करोड़
तीसरे पायदान पर बरबीघा से विधायक कुमार पुष्पंजय हैं. इनकी घोषित संपत्ति 94 करोड़ रुपये है. स्थानीय राजनीति में अपनी बढ़ती पकड़ के पीछे उनकी आर्थिक सुदृढ़ता को एक अहम कड़ी माना जाता है.
अन्य अमीर विधायक
मनोरमा देवी (बेलागंज): लगभग ₹75 करोड़ की संपत्ति के साथ चौथे स्थान पर हैं. उनका परिवार लंबे समय से राजनीतिक और आर्थिक रूप से प्रभावशाली रहा है.
माधव आनंद (मधुबनी): इनकी घोषित संपत्ति ₹56 करोड़ है और ये पांचवें नंबर पर आते हैं.
उदय कुमार सिंह (शेरघाटी): करीब ₹48 करोड़ की संपत्ति के मालिक उदय कुमार सिंह छठे स्थान पर हैं.
संजय कुमार सिंह (सिमरी बख्तियारपुर): ₹45 करोड़ से अधिक की संपत्ति के साथ ये सातवें स्थान पर काबिज हैं.
सिद्धार्थ गौतम (विक्रम): इनकी कुल संपत्ति ₹43 करोड़ से अधिक बताई गई है, जो इन्हें आठवें स्थान पर रखती है.
विशाल कुमार (नरकटिया): ₹41 करोड़ की घोषित संपत्ति के साथ विशाल कुमार नौवें स्थान पर हैं.
बबलू गुप्ता (सुगौली): ₹38 करोड़ की संपत्ति वाले बबलू गुप्ता बिहार के टॉप-10 अमीर विधायकों की सूची में दसवें पायदान पर हैं.
राजनीति में आर्थिक ताकत का महत्व
एडीआर की यह रिपोर्ट बताती है कि बिहार की राजनीति में संपत्ति केवल बैंक बैलेंस का लेखा-जोखा नहीं है, बल्कि यह चुनावी नतीजों को प्रभावित करने का एक बड़ा जरिया भी है. आर्थिक रूप से मजबूत नेता न केवल चुनाव प्रचार में भारी धनराशि खर्च करने में सक्षम होते हैं, बल्कि अपने जातीय और सामाजिक समूहों में भी अधिक प्रभाव पैदा कर पाते हैं.
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