चुनाव आयोग की निष्पक्षता को लेकर चल रही बहस के बीच प्रशांत किशोर ने आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं. उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग की निष्पक्षता को लेकर सवाल आज से नहीं उठ रहे हैं, बल्कि वह 2021 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के समय से ही इस मुद्दे पर अपनी बात रखते रहे हैं. प्रशांत किशोर ने कहा कि चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर सवाल किसी एक फैसले या किसी एक विवाद तक सीमित नहीं हैं. उन्होंने चुनावी प्रक्रिया के कई स्तरों का जिक्र करते हुए आयोग की कार्यशैली पर सवाल खड़े किए.
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वोटर लिस्ट से काउंटिंग तक उठाए सवाल
प्रशांत किशोर ने मतदाता सूची तैयार करने से लेकर चुनाव परिणाम आने तक की प्रक्रिया का जिक्र किया. उन्होंने वोटर लिस्ट, आचार संहिता लागू करने, राजनीतिक दलों के संसाधनों, सरकारी संसाधनों के कथित इस्तेमाल और मतगणना को लेकर सवाल उठाए. उनका आरोप है कि चुनाव प्रक्रिया के अलग-अलग चरणों में सत्तारूढ़ दल को फायदा मिलता है. उन्होंने चुनावी खर्च का मुद्दा भी उठाया और कहा कि बड़ी रकम खर्च होने के बावजूद उस पर प्रभावी रोक नहीं दिखाई देती. प्रशांत किशोर ने चुनाव के दौरान जन सुराज से जुड़े लोगों पर कार्रवाई का भी जिक्र किया. उनका दावा है कि इस दौरान चुनाव आयोग की भूमिका प्रभावी नजर नहीं आई. ये प्रशांत किशोर के आरोप हैं और इस बयान में चुनाव आयोग का पक्ष शामिल नहीं है.
2021 के बंगाल चुनाव का किया जिक्र
प्रशांत किशोर ने अपनी बात को 2021 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से जोड़ते हुए कहा कि उस समय भी उन्होंने चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाए थे. उन्होंने चुनाव परिणाम के बाद दिए अपने बयान का हवाला देते हुए कहा कि अगर चुनाव आयोग निष्पक्ष तरीके से काम करता तो बीजेपी की सीटों की संख्या अलग होती. प्रशांत किशोर का कहना है कि चुनाव आयोग को लेकर उनकी आपत्ति मौजूदा विवाद के बाद अचानक सामने नहीं आई है.
ज्ञानेश कुमार पर भी निशाना
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर भी प्रशांत किशोर ने सवाल उठाए. उन्होंने चुनाव आयोग के पूर्व प्रमुखों की सेवानिवृत्ति के बाद हुई नियुक्तियों का उदाहरण देते हुए चुनाव आयोग की संस्थागत स्वतंत्रता और अधिकारियों की बाद की भूमिकाओं पर सवाल खड़े किए. प्रशांत किशोर का आरोप है कि चुनाव आयोग अगर सत्तारूढ़ दल के पक्ष में काम करता है तो इससे चुनावी व्यवस्था में लोगों का भरोसा प्रभावित हो सकता है. हालांकि, यह उनका राजनीतिक आरोप है, जिसे स्वतंत्र तथ्य के तौर पर पेश नहीं किया जा सकता.
SIR को लेकर पहले से जारी है बहस
चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर यह बहस ऐसे समय में हो रही है जब विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर भी राजनीतिक विवाद जारी है. मतदाता सूची के सत्यापन और उसमें बदलाव की प्रक्रिया को लेकर विपक्षी दल सवाल उठा रहे हैं, जबकि चुनाव आयोग इसे अपनी संवैधानिक जिम्मेदारी के तहत की जा रही प्रक्रिया बता रहा है. इसी माहौल में प्रशांत किशोर ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर अपने पुराने सवालों को फिर सामने रखा है. उन्होंने कहा कि चुनावी प्रक्रिया में सभी राजनीतिक दलों को समान अवसर मिलना जरूरी है.
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