25 साल पुराना बिहार-झारखंड विवाद खत्म, सोन नदी के पानी में बिहार को 5.75 MAF और झारखंड को 2 MAF

आशीष अभिनव

• 06:58 PM • 31 Aug 2026

Son River Water Dispute: बिहार और झारखंड के बीच सोन नदी के पानी का 25 साल पुराना विवाद खत्म हो गया. MoU के तहत बिहार को 5.75 MAF और झारखंड को 2 MAF पानी मिलेगा.

Son River Water Dispute
25 साल पुराना बिहार-झारखंड विवाद खत्म
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बिहार और झारखंड के बीच सोन नदी के पानी के बंटवारे को लेकर पिछले करीब 25 साल से चला आ रहा विवाद अब खत्म हो गया है. दोनों राज्यों के बीच सोमवार, 31 अगस्त 2026 को दिल्ली में सोन नदी के जल बंटवारे को लेकर समझौता ज्ञापन यानी MoU पर हस्ताक्षर किए गए. समझौते के मुताबिक, सोन नदी के पानी में बिहार को 5.75 मिलियन एकड़ फीट (MAF) और झारखंड को 2.00 MAF पानी मिलेगा. इस समझौते से दोनों राज्यों के सूखा प्रभावित और पठारी इलाकों में सिंचाई, पेयजल और औद्योगिक जरूरतों के लिए पानी की उपलब्धता बेहतर होने की उम्मीद है.

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25 साल से क्यों अटका था विवाद?

दरअसल, सोन नदी के पानी के बंटवारे का मूल आधार 1973 का बाणसागर समझौता है. इस समझौते के तहत सोन नदी के कुल 14.25 MAF पानी में से मध्य प्रदेश को 5.25 MAF, उत्तर प्रदेश को 1.25 MAF और तत्कालीन अविभाजित बिहार को 7.75 MAF पानी आवंटित किया गया था. साल 2000 में बिहार से अलग होकर झारखंड नया राज्य बना. इसके बाद अविभाजित बिहार को मिले 7.75 MAF पानी को बिहार और झारखंड के बीच किस अनुपात में बांटा जाए, इसको लेकर दोनों राज्यों के बीच विवाद शुरू हो गया. यही विवाद करीब 25 वर्षों तक लंबित रहा.

अमित शाह की पहल से बनी सहमति

इस विवाद को सुलझाने की दिशा में 10 जुलाई 2025 को रांची में हुई पूर्वी क्षेत्रीय परिषद की 27वीं बैठक को महत्वपूर्ण माना जा रहा है. इस बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने की थी. इसके बाद दोनों राज्यों और केंद्र के स्तर पर कई दौर की बातचीत और तकनीकी चर्चा हुई. अब इन चर्चाओं के बाद दोनों राज्यों ने पानी के बंटवारे पर औपचारिक सहमति बना ली है. 

सीएम सम्राट ने जताया आभार

बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने इस समझौते के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का आभार जताया. उन्होंने कहा कि वर्षों से लंबित इस विवाद का समाधान केवल पानी के बंटवारे का समझौता नहीं है, बल्कि यह बिहार और झारखंड के बीच सहयोग और साझा विकास की दिशा में एक नया कदम है. इस मौके पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल,  झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और बिहार के उपमुख्यमंत्री सह जल संसाधन मंत्री विजय कुमार चौधरी समेत दोनों राज्यों और केंद्र सरकार के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे.


दक्षिण बिहार और झारखंड को क्या फायदा होगा?

नए समझौते का सबसे बड़ा फायदा दक्षिण बिहार और झारखंड के उन इलाकों को मिलने की उम्मीद है, जहां अक्सर पानी की कमी और सूखे की समस्या रहती है. सोन नदी के पानी का बेहतर इस्तेमाल होने से कई फायदे हैं. 

  • सिंचाई की सुविधाओं का विस्तार हो सकेगा.
  • सूखा प्रभावित इलाकों में पानी की उपलब्धता बढ़ सकती है.
  • पेयजल संकट को कम करने में मदद मिलेगी.
  • झारखंड और दक्षिण बिहार में औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा मिल सकता है.
  • दोनों राज्यों की लंबे समय की जल सुरक्षा मजबूत होगी.
  • सोन-फल्गु नदी जोड़ो परियोजना को भी मिलेगी रफ्तार

तर्पण और पिंडदान में सुविधा मिलने की उम्मीद

इस समझौते के बाद बिहार में सोन नदी से जुड़ी जल परियोजनाओं को भी आगे बढ़ाने की उम्मीद है. खास तौर पर सोन-फल्गु नदी जोड़ो परियोजना और जलाशय निर्माण की दिशा में काम तेज हो सकता है. इसका फायदा गया और आसपास के इलाकों को मिल सकता है. फल्गु नदी में पर्याप्त पानी उपलब्ध होने से गयाजी में पितृपक्ष मेले के दौरान आने वाले श्रद्धालुओं को भी तर्पण और पिंडदान में सुविधा मिलने की उम्मीद है.

पूरे पूर्वी भारत के लिए क्यों अहम है समझौता?

सोन नदी गंगा की प्रमुख दक्षिणी सहायक नदियों में से एक है. इसका जलग्रहण क्षेत्र बिहार, झारखंड और आसपास के इलाकों की कृषि और आर्थिक गतिविधियों के लिए महत्वपूर्ण है.ऐसे में बिहार और झारखंड के बीच हुआ यह समझौता सिर्फ दोनों राज्यों के लिए ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि पूर्वी भारत में पानी के बेहतर प्रबंधन और क्षेत्रीय विकास के लिहाज से भी अहम माना जा रहा है. मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि ऐसे अंतर्राज्यीय विवादों का समाधान आपसी बातचीत और सहकारी संघवाद की भावना से ही संभव है. उन्होंने उम्मीद जताई कि सोन नदी के पानी का यह समझौता आने वाले समय में किसानों, आम लोगों और दोनों राज्यों की आने वाली पीढ़ियों के लिए फायदेमंद साबित होगा.