छात्रों को BPSC की तैयारी कराने वाले शिक्षक दंपति ने खुद मारी बाजी, पति बनेंगे SDM और पत्नी संभालेंगी DSP का पद

अनिकेत कुमार

• 08:27 PM • 03 Jul 2026

BPSC परीक्षा के नतीजों में एक अनोखी सफलता की कहानी सामने आई है. छात्रों को कोचिंग देने वाले शिक्षक पति-पत्नी ने खुद परीक्षा पास कर मिसाल कायम की है. पति एसडीएम और पत्नी डीएसपी पद पर चयनित हुई हैं. देखें उनका इंटरव्यू.

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शिक्षक दंपति ने क्लीयर किया BPSC.
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बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) के परिणाम आने के बाद राजधानी पटना में सफल छात्रों के लिए एक गौरव सम्मान समारोह का आयोजन किया गया. इस समारोह में यूं तो कई मेधावी छात्र पहुंचे थे, लेकिन वहां मौजूद एक ऐसा जोड़ा (दंपति) सबसे ज्यादा आकर्षण का केंद्र रहा, जिसने 'पढ़ाते-पढ़ाते खुद अफसर बनने' का अनोखा कारनामा कर दिखाया है. 

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हम बात कर रहे हैं विकास कुमार सिंह और उनकी पत्नी कोमल की. ये दोनों पटना के प्रसिद्ध कोचिंग संस्थान बीसीडब्ल्यू (BCW) से जुड़े हुए हैं और छात्रों को सिविल सर्विसेज की तैयारी के गुर सिखाते हैं. इस बार के नतीजों में न सिर्फ इनके पढ़ाए छात्र सफल हुए हैं, बल्कि इन दोनों ने भी एक साथ परीक्षा पास कर समाज के सामने सफलता की एक नई मिसाल पेश की है. 

पति बनेंगे SDM और पत्नी बनेंगी DYSP 

इस परीक्षा में विकास कुमार सिंह का चयन प्रतिष्ठित SDM (अनुमंडल पदाधिकारी) पद के लिए हुआ है. वहीं, उनकी पत्नी कोमल ने उनसे भी आगे निकलते हुए DYSP (पुलिस उपाधीक्षक/डीएसपी) का पद हासिल किया है. 

विकास कुमार सिंह ने अपनी इस यात्रा के बारे में बात करते हुए बताया कि वे साल 2012 से ही टीचिंग लाइन में सक्रिय हैं और 2017 से वे सिविल सर्विसेज के छात्रों को मेंटर कर रहे हैं. उनका मानना है कि बच्चों को पढ़ाते समय उन्हें खुद भी लगातार मोटिवेशन मिलता रहा. वे चाहते थे कि वे खुद परीक्षा पास कर बच्चों के सामने यह साबित करें कि उनके शिक्षक में दम है, ताकि छात्र और अधिक प्रेरित हो सकें. 

चौथे प्रयास में मिली बड़ी सफलता 

विकास ने बताया कि यह उनका चौथा प्रयास था. अपने पहले प्रयास में वे महज 6 नंबरों से फाइनल मेरिट लिस्ट में रहने से चूक गए थे, जबकि दूसरे और तीसरे प्रयास में उनका प्रीलिम्स (प्रारंभिक परीक्षा) भी क्लियर नहीं हो पाया था, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और चौथे प्रयास में प्रीलिम्स, मेंस और इंटरव्यू के तीनों चरणों को पार कर सीधे एसडीएम का पद हासिल कर लिया.

वहीं कोमल, जो खुद भी इसी संस्थान में मेंटरशिप प्रोग्राम से जुड़ी रही हैं, उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय अपनी कड़ी मेहनत, सेल्फ स्टडी और अपने पति के मार्गदर्शन को दिया है. विकास अपनी पत्नी की सफलता पर गर्व महसूस करते हुए कहते हैं कि "यदि कोई स्टूडेंट अपने टीचर से भी बेहतर प्रदर्शन करे, तो एक शिक्षक के लिए इससे बड़ा सम्मान और कुछ नहीं हो सकता."

असफल छात्रों के लिए दिए जरूरी टिप्स 

कोचिंग संस्थान के मेंटर रोहित सर ने उन छात्रों को खास सलाह दी है जो इस बार असफल रह गए हैं- 

गलतियों का विश्लेषण करें: असफल होने पर निराश होने के बजाय इस बात का एनालिसिस करें कि मार्क्स कहां कटे. प्रीलिम्स रुका या मेंस में कोई कमी रही, इसे पहचानना जरूरी है. 

स्कोरिंग सब्जेक्ट पर फोकस: परीक्षा में जो विषय ज्यादा नंबर दिलाने वाले हैं, उन पर मजबूत पकड़ बनाएं और अपनी कमजोरियों को मेंटर्स की मदद से दूर करें.

धैर्य रखें: सिविल सर्विसेज की तैयारी एक लंबी यात्रा है, जहां इंसान रोज कुछ नया सीखता है. ज्ञान का घड़ा जब पूरी तरह भर जाएगा, तो सफलता अपने आप मिल जाएगी.