BPSC New Rules: बिहार में अब अफसर बनना नहीं होगा आसान, BPSC ने इंटरव्यू से लेकर मुख्य परीक्षा तक बदले नियम

BPSC ने अपनी चयन प्रक्रिया में बड़े बदलाव करते हुए इंटरव्यू पैनल में वरिष्ठ IAS और IPS अधिकारियों को शामिल करने का निर्णय लिया है. साथ ही, परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए नेगेटिव मार्किंग और निबंध पेपर जैसे नए नियम लागू किए गए हैं.

BPSC New Rules
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ऋचा शर्मा

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बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) ने राज्य में प्रशासनिक अधिकारी बनने की तैयारी कर रहे लाखों अभ्यर्थियों के लिए बड़े बदलावों की घोषणा की है. आयोग ने चयन प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, पेशेवर और यूपीएससी (UPSC) की तर्ज पर आधुनिक बनाने के लिए कई नए नियम लागू किए हैं. इन बदलावों का मुख्य उद्देश्य केवल किताबी ज्ञान ही नहीं, बल्कि उम्मीदवार की निर्णय क्षमता और व्यक्तित्व का सही आकलन करना है.

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इंटरव्यू पैनल में होंगे IAS और IPS अधिकारी

सबसे बड़ा बदलाव साक्षात्कार (Interview) प्रक्रिया में किया गया है. अब बीपीएससी के इंटरव्यू पैनल में केवल शिक्षाविद ही नहीं, बल्कि भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) और भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल होंगे. [00:36] इन अधिकारियों की मौजूदगी से इंटरव्यू का स्तर बढ़ेगा और अभ्यर्थियों से वास्तविक जीवन की चुनौतियों, केस स्टडी और प्रशासनिक समस्याओं से जुड़े सवाल पूछे जाएंगे. अब उम्मीदवार की बॉडी लैंग्वेज, स्ट्रेस मैनेजमेंट और नैतिक मूल्यों पर खास ध्यान दिया जाएगा.

मुख्य परीक्षा और प्रीलिम्स में भी सुधार

आयोग ने 2023 से 2026 के बीच अपनी परीक्षा प्रणाली में कई क्रांतिकारी सुधार किए हैं:

  • नेगेटिव मार्किंग: प्रीलिम्स परीक्षा में अंदाजे से जवाब देने की प्रवृत्ति को रोकने के लिए नेगेटिव मार्किंग शुरू की गई है. 
  • निबंध का पेपर: मुख्य परीक्षा में 300 अंकों का एक निबंध पेपर जोड़ा गया है, ताकि अभ्यर्थियों की विश्लेषणात्मक सोच का परीक्षण किया जा सके. 
  • वैकल्पिक विषय: वैकल्पिक विषयों को केवल क्वालिफाइंग कर दिया गया है, जिससे लंबे समय से चले आ रहे स्केलिंग विवाद को खत्म करने में मदद मिली है. 

यूपीएससी जैसा सख्त कैलेंडर

बीपीएससी अब संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की कार्यप्रणाली को अपनाते हुए एक सख्त परीक्षा कैलेंडर पर काम कर रहा है. इसका सीधा फायदा यह होगा कि परीक्षाएं समय पर आयोजित होंगी और रिजल्ट घोषित होने में होने वाली देरी को कम किया जा सकेगा. आयोग का मानना है कि इन बदलावों से स्थानीय दबाव या पक्षपात की संभावना कम होगी और राज्य को अधिक सक्षम नेतृत्व वाले अधिकारी मिल सकेंगे. 

 

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