इरादे अगर मजबूत हों और दिल में कुछ कर गुजरने का जज्बा हो, तो परिस्थितियां कभी भी आपके आड़े नहीं आ सकती हैं. इस बात को सच कर दिखाया है बिहार के राजू कुमार ने. राजू कुमार रक्सौल में भारत-नेपाल सीमा को जोड़ने वाली रेलवे गुमटी नंबर 33 पर गेटमैन के रूप में तैनात थे, लेकिन अब उनका चयन बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) की परीक्षा में डीएसपी (DSP) के पद पर हो गया है. तपती गर्मी, मूसलाधार बारिश और कड़ाके की ठंड में रेलवे ट्रैक पर अपनी ड्यूटी निभाते हुए राजू ने अपने बड़े सपनों को कभी मरने नहीं दिया और आखिरकार पहली ही कोशिश में यह बड़ी सफलता हासिल की. आइए विस्तार से जानते हैं उनकी पूरी कहानी.
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बचपन में ही उठ गया था पिता का साया
समस्तीपुर के रहने वाले राजू कुमार का जीवन शुरू से ही काफी संघर्षों भरा रहा है. जब वह महज 12 साल के थे और 10वीं कक्षा में पढ़ाई कर रहे थे, तभी उनके पिता का साया उनके सिर से उठ गया था. इसके बाद परिवार के सामने गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो गया. बिहार में 10वीं तक की पढ़ाई तो सरकारी स्कूलों में आसानी से हो जाती है, लेकिन 12वीं और ग्रेजुएशन के लिए बाहर जाने और पैसों की सख्त जरूरत थी.
ऐसे कठिन समय में राजू के मौसेरे भाई राजेश कुमार सुमन उनके लिए मददगार बनकर सामने आए. उन्होंने रोसड़ा में मुफ्त में 'बीएसएस क्लब' (BSS Club) चलाया, जहां वह प्रतियोगिता परीक्षाओं की तैयारी कराते थे. राजू को वहीं से सही मार्गदर्शन मिला और उन्होंने अपनी पढ़ाई जारी रखी.
ग्रुप डी की नौकरी और परिवार को सपोर्ट
राजू कुमार ने पढ़ाई के साथ-साथ रेलवे की ग्रुप-डी परीक्षा का फॉर्म भरा और पहली बार में ही उनका चयन रेलवे में हो गया. उन्हें रक्सौल में गेटमैन के रूप में जॉइनिंग मिली, जहां गुमटी खोलना और बंद करना उनकी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन गया. नौकरी मिलते ही जो भी सैलरी आती थी, उससे राजू ने अपनी मां और पूरे परिवार को आर्थिक रूप से सपोर्ट करना शुरू कर दिया. परिवार की स्थिति थोड़ी सुधरने के बाद राजू ने अपनी क्षमता और खुद के लक्ष्य के बारे में सोचना शुरू किया कि वह जीवन में आगे और क्या बेहतर कर सकते हैं.
दोस्तों की सलाह पर शुरू की बीपीएससी की तैयारी
रेलवे की ड्यूटी के दौरान राजू की मेहनत और लगन को देखकर उनके दोस्तों ने उन्हें प्रशासनिक सेवा में जाने की सलाह दी. दोस्तों के कहने और हौसला बढ़ाने के बाद राजू कुमार ने ग्रेजुएशन में एडमिशन लिया और साथ ही बीपीएससी की तैयारी भी शुरू कर दी. नौकरी के साथ पढ़ाई करना बेहद चुनौतीपूर्ण था, लेकिन राजू ने समय को ही अपना सबसे बड़ा हथियार बनाया. वह ड्यूटी के बाद बची हुई किताबों, मोबाइल पर ऑनलाइन क्लासेज और लगातार सेल्फ स्टडी के माध्यम से अपनी तैयारी में जुटे रहे.
पहले ही प्रयास में पाई 72वीं रैंक
राजू कुमार की दिन-रात की कड़ी मेहनत का नतीजा आखिरकार सबके सामने आया. उन्होंने 70वीं बीपीएससी परीक्षा में भाग लिया और पहले ही प्रयास में शानदार सफलता हासिल की. राजू ने इस परीक्षा में पूरे बिहार में 72वीं रैंक हासिल की है, जिसके बाद अब वह डीएसपी के पद पर तैनात होकर राज्य की कानून व्यवस्था संभालेंगे. दो भाइयों और एक बहन में सबसे छोटे राजू ने साबित कर दिया कि बड़ी सफलता के लिए महंगे कोचिंग संस्थानों या बड़ी सुविधाओं की नहीं, बल्कि अटूट इरादों और कड़ी मेहनत की जरूरत होती है.
सफलता के बाद भी जमीन से जुड़े रहे राजू
इतनी बड़ी कामयाबी मिलने और डीएसपी बनने के बाद भी राजू कुमार के पैर जमीन पर ही टिके रहे. परीक्षा का रिजल्ट आने के अगले ही दिन वह हमेशा की तरह रक्सौल की गुमटी नंबर 33 पर अपनी गेटमैन की ड्यूटी निभाने पहुंच गए. वहां बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों की भीड़ उन्हें बधाई देने के लिए जुटी, लेकिन राजू ने पूरी ईमानदारी से अपनी जिम्मेदारी को पहले निभाया. राजू अपनी इस ऐतिहासिक सफलता का सबसे बड़ा श्रेय अपनी मां को देते हैं, जिन्होंने हर मुश्किल और कमजोर दौर में उनका हौसला बढ़ाया और कभी भी हार नहीं मानने दी.
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