बिहार में शिक्षक भर्ती परीक्षा (BPSC TRE-4) को लेकर लंबे समय से चल रहा इंतजार आखिरकार समाप्त हो गया है, लेकिन इसके साथ ही छात्रों में भारी आक्रोश भी देखने को मिल रहा है. BPSC ने 32,388 पदों के लिए अधिसूचना जारी कर दी है, लेकिन नई परीक्षा नियमावली ने अभ्यर्थियों की चिंताएं बढ़ा दी हैं.
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प्रमुख मुद्दे और छात्रों की मांगें
छात्रों और विशेषज्ञों का मुख्य विरोध 'प्री (PT)' और 'मेंस (Mains)' की दोहरी परीक्षा प्रणाली को लेकर है. बिहार Tak से बातचीत में सत्यजीत सर ने चर्चा के दौरान बताया कि शिक्षक बनने के लिए अभ्यर्थी पहले ही बीएड/डीएलएड एंट्रेंस, कोर्स करिकुलम और पात्रता परीक्षाओं (CTET/STET) जैसे कठिन चरणों से गुजरते हैं. ऐसे में, नियुक्ति के लिए फिर से दो स्तरों पर परीक्षा लेना मानसिक यातना जैसा है. छात्रों की मांग है कि पिछली बार की तरह 'एकल परीक्षा प्रणाली' ही अपनाई जानी चाहिए.
चुनौतियां और भविष्य की राह
सत्यजीत सर ने बताया कि इस बार एसटीईटी और सीटेट के नए परिणाम आने के बाद अभ्यर्थियों की संख्या लगभग 15 लाख तक पहुंच सकती है, जबकि पदों की संख्या केवल 32,388 है. नई अधिसूचना में नेगेटिव मार्किंग का प्रावधान रखा गया है, जिससे छात्र काफी असंतुष्ट हैं.
पटना में आंदोलन की स्थिति
गर्दनी बाग में चल रहा छात्रों का प्रदर्शन केवल नोटिफिकेशन के लिए नहीं, बल्कि प्रणाली में सुधार के लिए है. सत्यजीत सर का मानना है कि नोटिफिकेशन आने के बाद भी छात्र पूरी तरह संतुष्ट नहीं हैं और उनका आंदोलन जारी रहने की संभावना है क्योंकि वे 'एकल परीक्षा' और 'सिलेबस में स्पष्टता' की मांग पर अड़े हैं.
क्या बिहार के युवाओं में है असंतोष?
यद्यपि अधिसूचना ने भर्ती प्रक्रिया को गति दी है, लेकिन दोहरी परीक्षा प्रणाली और पदों की घटती संख्या ने बिहार के युवाओं में असुरक्षा की भावना पैदा की है. सरकार और आयोग को अब इन अभ्यर्थियों के तर्कों पर गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है ताकि योग्य शिक्षकों का चयन बिना अनावश्यक मानसिक तनाव के हो सके.
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