Charchit Chehra: कौन हैं डॉ. जाह्नवी दास जिन्होंने पर्दे के पीछे रहकर प्रशांत किशोर का दिया साथ? बांकीपुर उपचुनाव से तेज हुईं चर्चाएं

रूपक प्रियदर्शी

• 12:19 PM • 15 Jul 2026

Charchit Chehra Jahnavi Das: बांकीपुर उपचुनाव में प्रशांत किशोर के नामांकन के दौरान पहली बार कैमरों के सामने नजर आईं उनकी पत्नी डॉ. जाह्नवी दास अचानक चर्चा का केंद्र बन गई हैं. चर्चित चेहरा के इस एपिसोड में जानिए आखिर कौन हैं डॉ. जाह्नवी दास, जिनकी अफ्रीका के चाड में संयुक्त राष्ट्र (UN) मिशन के दौरान प्रशांत किशोर से मुलाकात हुई और कैसे यह मुलाकात एक खूबसूरत प्रेम कहानी में बदल गई और कैसे किया लगातार सपोर्ट.

Jahnavi Das Biography
डॉ जाह्नवी दास ने प्रशांत किशोर को लगातार किया सपोर्ट
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प्रशांत किशोर ने जब गुजरात के सीएम नरेंद्र मोदी के साथ काम करना शुरू किया तब से उनकी चर्चाएं शुरू हुईं. 2014 में जब सीएम मोदी देश के पीएम बन गए तो प्रशांत किशोर एकदम से नेशनल पॉलिटिक्स के हीरो बन गए. बीजेपी की जीत का बहुत सारा क्रेडिट प्रशांत किशोर को गया जो इलेक्शन मैनेजमेंट संभाल रहे थे. अभी तक देश ने प्रशांत किशोर (PK) को बड़े-बड़े मुख्यमंत्रियों और कड़े राजनीतिक मंचों पर अकेले ही देखा था. साथ ही उनकी पत्नी डॉ. जाह्नवी दास हमेशा लाइमलाइट और कैमरों से कोसों दूर रहीं.

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लेकिन बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव के नामांकन के दिन पटना के मैदान में कुछ ऐसा हुआ जिसने सुर्खियां बटोर लीं. हमेशा पर्दे के पीछे रहने वाली डॉ. जाह्नवी दास अचानक प्रशांत किशोर के नामांकन में दौड़ती भागती मीडिया से बचती-बचाती पहुंचीं. सादगी, सोवर, और बिहार की राजनीति के मैदान में उनकी इस पहली एक्टिव मौजूदगी ने महफिल लूट ली. लोगों को अटकलें लगाने का मौका मिला कि डॉ. जाह्नवी अब जन सुराज की राजनीति में आकर आधी आबादी को जोड़ने में पीके का सीधा साथ देने वाली हैं.

क्या आपने कभी सोचा है कि देश के सबसे बड़े चुनावी रणनीतिकार और जन सुराज पार्टी के सूत्रधार प्रशांत किशोर को पर्दे के पीछे से कौन संभालता है? बिहार की राजनीति में सबसे बड़ा धमाका हुआ जब सबको चुनाव लड़ाने वाले प्रशांत किशोर पहली बार खुद चुनाव लड़ने उतरे हैं पटना की बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में. नामांकन दाखिल करते ही प्रशांत किशोर की नहीं, बल्कि उनकी पत्नी डॉ. जाह्नवी दास की संपत्ति ने पूरे देश को चौंका दिया. 

चुनावी हलफनामे में उम्मीदवार को अपना ही नहीं, लाइफ पार्टनर पति या पत्नी की भी संपत्ति का हर डिटेल देनी होती है. प्रशांत किशोर के हलफनामे से पता चला कि PK के पास तो 96 करोड़ ही हैं, उनसे कहीं ज्यादा अमीर तो उनकी पत्नी हैं, जो 101 करोड़ प्लस संपत्ति की  मालकिन हैं. गुवाहाटी की एक साधारण डॉक्टर कैसे बनीं प्रशांत किशोर की हमसफर और कैसे आज वो करोड़ों के साम्राज्य को संभाल रही हैं? चर्चित चेहरा के इस खास एपिसोड में आज जानेंगे डॉ. जाह्नवी दास और प्रशांत किशोर की अनदेखी और अनसुनी कहानियां.

प्रशांत और जाह्नवी की लव-स्टोरी!

बिहार के प्रशांत और असम की जाह्नवी की कहानी की शुरुआत बिहार या दिल्ली में नहीं, बल्कि अफ्रीका के चाड देश में हुई थी. बात साल 2000 के आसपास की है. तब प्रशांत किशोर संयुक्त राष्ट्र (UN) के हेल्थ प्रोग्राम में एडमिनिस्ट्रेटर के तौर पर काम कर रहे थे. उसी दौरान असम के गुवाहाटी की रहने वाली डॉ. जाह्नवी दास MBBS भी उसी यूएन मिशन का हिस्सा बनकर वहां पहुंची थीं. दोनों यूएन के एक ही मिशन पर थे-दुनिया को बीमारियों और कुपोषण से मुक्त कराने के लिए लड़ना. 

साथ काम करते-करते दोनों की मुलाकातें हुईं. न जाने कब वर्किंग रिलेशनशिप पर्सनल होती गई. फिर गहरे प्यार में डूबती गई. ऐसे देश, ऐसे माहौल में लव स्टोरी जवां होती गई जहां  मखमली कालीन या फाइव-स्टार होटल नहीं था. अफ्रीका के सबसे पिछड़े देशों में से एक चाड में रोमांस कर रहे थे. जहां न बिजली ठीक से आती थी, न साफ पानी था, और चारों तरफ मलेरिया और कुपोषण का साया था.

कौन हैं जाह्नवी दास?

जाह्नवी दास जिस फैमिली बैकग्राउंड से आती हैं उसमें राजनीति कहीं थी ही नहीं. उनके पिता गुवाहाटी के जाने-माने डॉक्टर और सोशल वर्कर रहे. वहीं से जाह्नवी को भी मेडिकल में जाने की प्रेरणा मिली होगी. गुवाहाटी से स्कूलिंग के बाद उन्होंने गुवाहाटी मेडिकल कॉलेज से MBBS की डिग्री हासिल की. उन्हें ऐसा डॉक्टर नहीं बनना था जो सिर्फ अस्पताल में नौकरी करते हुए या क्लीनिक खोलकर इलाज करें. मेडिकल प्रैक्टिस के साथ-साथ पब्लिक हेल्थ और सोशल एडमिनिस्ट्रेशन में एक्सपर्ट बनीं. 

2000 के आसपास संयुक्त राष्ट्र और विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) अफ्रीका में कुपोषण, मलेरिया और पोलियो जैसी महामारियों से लड़ने के लिए 'ग्लोबल हेल्थ मिशन' चला रहे थे, तब उन्हें भारत जैसे विकासशील देशों से ऐसे काबिल डॉक्टरों की जरूरत थी जो चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में जमीनी स्तर पर काम कर सकें.

डॉ. जाह्नवी ने यूएन के इंटरनेशनल हेल्थ एंड न्यूट्रिशन प्रोग्राम (UN Health Program) के कड़े ग्लोबल रिक्रूटमेंट प्रोसेस और इंटरव्यू को पास किया. यूएन ने उन्हें भी मेडिकल कंसलटेंट और हेल्थ एक्सपर्ट के तौर पर अफ्रीका के चाड (Chad) देश के मिशन पर तैनात किया, जहां उनकी मुलाकात प्रशांत किशोर से हुई. वहां पीके 'सोशल पॉलिसी हेड' थे और जाह्नवी 'मेडिकल विंग' संभाल रही थीं .

क्यों लौटे थे दोनों भारत?

यूएन की नौकरियों में दोनों सेट हो चुके थे. 2008 में जब उनके बेटे दैबिक का जन्म हुआ, तब प्रायोरिटीज बदलने लगीं. यूएन की लगातार विदेश यात्राओं वाली नौकरी  के साथ छोटे बच्चे को संभालना नामुमकिन था. परिवार के लिए उन्होंने यूएन का फुल-टाइम ग्लोबल रोल छोड़ दिया. भारत आकर डॉ. जाह्नवी दास ने दिल्ली के अपोलो इंद्रप्रस्थ अस्पताल में सीनियर एडवाइजर बनकर कॉरपोरेट मेडिकल करियर की शुरुआत की, जबकि पीके यूएन के लिए भारत में ही काम करते रहे. 

कैसे प्रशांत किशोर को मिली थी UN में नौकरी?

प्रशांत किशोर के बारे में अक्सर ये सवाल उठते रहे कि वो कोई आईएएस, आईएफएस, डॉक्टर, नहीं तो उन्हें UN में नौकरी कैसे मिल गई? प्रशांत किशोर ने बिहार के बक्सर से स्कूलिंग की है. 1991 से 1993 के बीच उन्होंने पटना साइंस कॉलेज से इंटरमीडिएट की पढ़ाई की. आगे लखनऊ यूनिवर्सिटी से BBA किया. आगे प्रशांत किशोर ने वो कोर्स किया, जिसने संयुक्त राष्ट्र के दरवाजे खोले. पब्लिक हेल्थ में पोस्ट ग्रेजुएशन करने के बाद अलग-अलग राज्यों में पब्लिक हेल्थ एक्टिविस्ट के तौर पर काम किया. यूएन में सेलेक्शन मिड-2000 में यूएन ट्रेनिंग प्रोग्राम के लिए हुआ.

प्रशांत किशोर ने संयुक्त राष्ट्र फंडेड प्रोग्राम में करीब 8 साल 2011 तक इंटरनेशनल सिविल सर्वेंट के रूप में काम किया. शुरुआत में भारत में पोस्टिंग के बाद यूएन हेडक्वार्टर न्यूयॉर्क में रहे. बड़ी पोस्टिंग अफ्रीका के चाड (Chad) देश में हुई, जहां वे UNICEF के 'हेड ऑफ सोशल पॉलिसी एंड प्लानिंग'(Social Policy and Planning Head) बने. यूएन में पोस्टिंग के दौरान उन्होंने भारतीय राजनीति तो नहीं देखी लेकिन डेटा, एडमिनिस्ट्रेशन और पब्लिक हेल्थ के इंटरनेशनल एक्सपर्ट बन गए. भारत लौटे तो डेटा, ग्राउंड एडमिनिस्ट्रेशन, गांव-गांव की रियलिटी को राजनीति से जोड़ा और बन गए चुनावी रणनीति के सबसे माहिर खिलाड़ी.

पीके को सपोर्ट करने के लिए जाह्नवी ने लगातार किए त्याग!

2011 में जब प्रशांत किशोर की मुलाकात गुजरात के सीएम नरेंद्र मोदी से हुई, तो उन्होंने यूएन की शानदार नौकरी छोड़ने का फैसला किया. पीके के पिता इस फैसले से 6 महीने तक नाराज रहे, लेकिन पीके भारतीय राजनीति को बदलने का मन बना चुके थे. इस मुश्किल वक्त में डॉ. जाह्नवी ने यूएन का फुल-टाइम रोल छोड़कर पूरे परिवार और बच्चे की जिम्मेदारी उठाई.

कहानी यहीं खत्म नहीं होती. जब प्रशांत किशोर ने नेताओं को जिताने का काम बंद किया और बिहार की सड़कों पर 'जन सुराज' की 2 साल लंबी पदयात्रा शुरू की, तो डॉ. जाह्नवी ने एक और बड़ा त्याग किया. उन्होंने अपने एक्टिव मेडिकल प्रैक्टिस से भी ब्रेक ले लिया. पीके अपने भाषण में कहा भी कि लोग सोचते हैं कि प्रशांत किशोर बड़ी तपस्या कर रहा है, लेकिन असली तपस्या दिल्ली में बैठी मेरी पत्नी कर रही है, जिसने मेरे इस पागलपन के लिए अपने करियर और ऐशो-आराम की जिंदगी को पीछे छोड़ दिया. अगर जाह्नवी दिल्ली में रहकर घर और हमारे बेटे दैबिक की जिम्मेदारी पूरी तरह नहीं संभालतीं, तो मैं बिहार के गांवों की खाक नहीं छान पाता. अब जब पीके बिहार की मुख्यधारा की राजनीति में पार्टी उतार चुके हैं, तो करोड़ों की मालकिन डॉ. जाह्नवी दास भी गुवाहाटी से चाड, दिल्ली होते हुए पटना शिफ्ट हो चुकी हैं ताकि वो पीके की इस सबसे बड़ी सियासी जंग में उनकी ढाल बन सकें. 

क्या है प्रशांत और जाह्नवी के कमाई के पीछे की कहानी?

चुनावी हलफनामे के मुताबिक प्रशांत किशोर और डॉ. जाह्नवी दास की लगभग 198 करोड़ रुपए की संपत्ति के पीछे कोई जादुई कहानी नहीं, बल्कि कॉर्पोरेट कंसल्टेंसी, फीस और बेहद स्मार्ट कॉर्पोरेट इन्वेस्टमेंट, बिजनेस पोर्टफोलियो का कॉम्बिनेशन है. देश के तमाम बड़े अमीर नेताओं के साथ काम करते हुए प्रशांत किशोर कितने कमाते हैं, कितनी फीस लेते हैं, ये बरसों तक रहस्य रहा. रहस्य तब खुला जब उन्होंने खुद बताया कि वो उन्होंने पिछले 3 सालों में लगभग 241 करोड़ की कमाई की है. इसमें से 98 करोड़ से ज्यादा जन सुराज पार्टी को चंदे में दे दिया. 

प्रशांत किशोर ने खुद नेशनल मीडिया पर कबूल किया कि वो देश के सबसे महंगे कंसलटेंट हैं और महज 2 घंटे की कॉर्पोरेट सलाह के लिए 11 करोड़ रुपए की फीस लेते हैं. पीके जहां से कमाते हैं, उनकी पत्नी डॉ. जाह्नवी उसे बहुत समझदारी से इन्वेस्ट करती हैं. 101 करोड़ प्लस की संपत्ति का सबसे बड़ा राज है उनकी कंपनी वेधास वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड (Vedhas Ventures Private Limited). 

डॉक्टर के तौर पर उनकी अपनी कंसल्टेंसी फीस, रेंटल इनकम और बैंकों से मिलने वाले डिविडेंड्स ने वेल्थ को लगातार बढ़ा रहे हैं. कमाई से पति-पत्नी ने दिल्ली के वसंत विहार, गाजियाबाद और पटना की पाटलिपुत्र कॉलोनी जैसी सबसे पॉश जगहों पर करीब 60 करोड़ की सेल्फ-अक्वायर्ड प्रॉपर्टीज खरीदीं. करोड़ों के मालिक होने के बावजूद पति-पत्नी के पास कोई कार नहीं है. पीके और उनकी पत्नी की कमाई के पीछे न कोई सट्टा है, न कोई शेल कंपनियां और न ही कोई भ्रष्टाचार. यह सीधे तौर पर उनकी 'ब्रेन पावर' और 'कॉर्पोरेट इन्वेस्टमेंट' की ताकत है. जहां पीके अपनी रणनीतिक बुद्धि बेचकर करोड़ों कमाते हैं, वहीं डॉ. जाह्नवी दास उसे बिजनेस और कॉर्पोरेट शेयरों में लगाकर अरबों में तब्दील कर देती हैं.

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