Darbhanga AIIMS: घोषणा के 11 साल बाद भी कागजों में अटका बिहार का दूसरा एम्स, बजट 59% बढ़ा, RTI के जवाब से मंचा हड़कंप!

Darbhanga AIIMS: बिहार के दरभंगा एम्स (Darbhanga AIIMS) की घोषणा के 11 साल और शिलान्यास के डेढ़ साल बाद भी मुख्य अस्पताल और पढ़ाई के ब्लॉक का काम शुरू नहीं हो सका है. प्रोजेक्ट का बजट 59% बढ़कर ₹2006 करोड़ हो गया है, लेकिन अब तक सिर्फ 1% पैसा ही खर्च हो पाया है.

Darbhanga AIIMS
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अशोक उपाध्याय

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Darbhanga AIIMS: बिहार के दरभंगा में बनने वाले दूसरे AIIMS  को लेकर एक बड़ा खुलासा हुआ है. इस बड़े प्रोजेक्ट की घोषणा हुए 11 साल बीत चुके हैं और देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा इसका शिलान्यास किए हुए भी डेढ़ साल का समय हो गया है. इसके बावजूद, अस्पताल के मुख्य भवन और अकादमिक (Academic) ब्लॉक का निर्माण कार्य अब तक शुरू नहीं हो पाया है.

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इंडिया टुडे को एक RTI से मिली जानकारी के मुताबिक, इस प्रोजेक्ट की लागत अब तक 59 प्रतिशत बढ़ चुकी है. शुरुआती अनुमान के मुकाबले अब इसका बजट ₹2,006 करोड़ रुपये हो गया है. हैरान करने वाली बात यह है कि इस बढ़े हुए बजट में से अब तक 1 फीसदी राशि भी जमीन पर खर्च नहीं की जा सकी है.

अस्पताल से पहले गेट बनकर तैयार, RTI में खुला राज

आरटीआई रिपोर्ट से मिली जानकारी के मुताबिक,  दरभंगा एम्स के निर्माण कार्य को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए हैं. इस परियोजना में सबसे अजीब बात इसके 'मुख्य प्रवेश द्वार' (Main Gate) को लेकर सामने आई है. जहां एक तरफ अस्पताल की मुख्य इमारत, डॉक्टरों-स्टाफ के रहने के लिए आवासीय परिसर और पढ़ाई के ब्लॉक का काम शुरू भी नहीं हुआ है, वहीं इसका मुख्य गेट पहले ही बनकर तैयार हो गया है. यह गेट अब इस प्रोजेक्ट की देरी का सबसे बड़ा प्रतीक बन चुका है.

जब आरटीआई के जरिए इस गेट पर हुए खर्च और इसकी मंजूरी की जानकारी मांगी गई, तो निर्माण कार्य संभाल रही सरकारी कंपनी एचएससीसी (HSCC) लिमिटेड ने चौंकाने वाला जवाब दिया. कंपनी ने कहा कि मुख्य गेट के लिए कोई अलग से टेंडर या मंजूरी पत्र जारी नहीं किया गया था और पूरा काम अभी प्रक्रिया के अधीन है. ऐसे में यह साफ नहीं हो पाया है कि अस्पताल की मुख्य इमारत से पहले इस गेट को बनाने की मंजूरी किसने और क्यों दी.

2015 में हुई थी घोषणा, अब तक क्या हुआ?

पटना के बाद बिहार को दूसरे एम्स की सौगात देने के लिए साल 2015 में दरभंगा एम्स की घोषणा की गई थी. इसे मिथिलांचल क्षेत्र के लोगों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं के लिहाज से एक बड़ा वरदान माना जा रहा था.  केंद्रीय कैबिनेट ने 2020 में इस प्रोजेक्ट को आधिकारिक मंजूरी दी. बाद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 13 नवंबर 2024 को इसका शिलान्यास किया.

यह संस्थान 187 एकड़ से ज्यादा क्षेत्र में बनाया जाना है. शुरुआत में इसकी लागत 1,264 करोड़ रुपये तय की गई थी, लेकिन अब परियोजना की लागत बढ़कर 2,006 करोड़ रुपये पहुंच चुकी है. यानी शुरुआती अनुमान की तुलना में करीब 59 प्रतिशत की बढ़ोतरी हो चुकी है.

मंजूरी के इंतजार में अटका काम

एचएससीसी (HSCC) के मुताबिक, अस्पताल और अन्य मुख्य ढांचागत सुविधाओं का निर्माण तभी शुरू होगा, जब उन्हें अंतिम मंजूरी मिल जाएगी. इसका सीधा मतलब यह है कि बड़े स्तर पर शिलान्यास होने के बाद भी कागजी मंजूरियों का खेल अभी तक खत्म नहीं हुआ है.

कंपनी ने दरभंगा एम्स को पूरी तरह चालू करने के लिए जुलाई 2029 का समय तय किया है. आंकड़ों के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2024-25 में इस पर केवल 21.33 लाख रुपये और वित्तीय वर्ष 2025-26 में 19.18 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं. अब तक कुल खर्च लगभग 19.39 करोड़ रुपये ही हुआ है, जो कुल बजट का एक प्रतिशत भी नहीं है. ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या अगले तीन-चार सालों में मिथिलांचल के लोगों को यह अस्पताल मिल पाएगा या उन्हें अभी और लंबा इंतजार करना होगा.

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