बिहार के दरभंगा जिले का हरिनगर गांव इन दिनों भारी तनाव और सन्नाटे के साये में है. पैसों के लेनदेन और मजदूरी के हक से शुरू हुआ एक मामूली विवाद अब एक बड़े जातीय संघर्ष और पुलिसिया कार्रवाई का केंद्र बन चुका है. घटना के एक सप्ताह बाद भी गांव की स्थिति सामान्य नहीं हो पाई . इसी बीच बिहार तक की टीम हरिनगर गांव पहुंची और वहां स्थिति का जायजा लिया. इसी ग्राउंड रिपोर्ट में सामने आया है कि किस तरह एक वायरल वीडियो ने इस पूरे विवाद की परतें खोल दी हैं. आइए जानते हैं पूरा मामला.
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मजदूरी के हक की लड़ाई और विवाद की शुरुआत
इस पूरे विवाद की जड़ में मजदूरी के पैसों का बकाया होना बताया जा रहा है. स्थानीय सूत्रों और वायरल वीडियो के आधार पर, यह मामला कैलाश पासवान और हेमकांत झा के परिवार के बीच का है. बताया जा रहा है कि कैलाश पासवान ने झा परिवार के किसी रिश्तेदार के यहां काम किया था, जिसके बदले वह करीब 2 लाख रुपये की मजदूरी का दावा कर रहे थे. वहीं दूसरी ओर, झा परिवार इन दावों को पूरी तरह खारिज कर रहा था. गांव में इस मसले को सुलझाने के लिए पंचायत की कोशिशें भी हुईं, लेकिन पैसों के हिसाब को लेकर दोनों पक्षों के बीच सहमति नहीं बन सकी और विवाद गहराता चला गया.
क्या कहता है 30 तारीख का वायरल वीडियो?
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे 30 तारीख के वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि विवाद ने उस दिन हिंसक मोड़ लेना शुरू कर दिया था. वीडियो में हेमकांत झा के घर के पास बनी गली और ट्यूबवेल के पास दोनों पक्षों के बीच तीखी नोकझोंक और धक्का-मुक्की हो रही है. चश्मदीद गवाह मंजुला मिश्रा ने बताया कि उन्होंने खुद अपनी आंखों से देखा कि किस तरह खींचतान और बहस हो रही थी. झा परिवार की महिलाएं और पुरुष एक तरफ थे, तो दूसरी तरफ पासवान पक्ष अपने हक के लिए अड़ा हुआ था. चश्मदीद महिला का मानना है कि यदि मजदूर को उसके काम का पैसा मिल जाता, तो शायद यह नौबत नहीं आती.
हिंसा का तांडव और पुलिस की भारी दबिश
30 जनवरी को हुई इस धक्का-मुक्की ने अगले ही दिन यानी 31 जनवरी को भयानक हिंसा का रूप ले लिया. विवाद इतना भड़क गया कि दोनों पक्षों के बीच जमकर मारपीट हुई और जमकर तोड़फोड़ की गई. इस घटना में कई लोग गंभीर रूप से घायल हुए, जिसके बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई. पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तुरंत मोर्चा संभाला और SC/ST एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई शुरू की. घटना वाले दिन ही 12 लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया था, लेकिन अब तक करीब 70 लोगों के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज की जा चुकी है, जिससे गांव में दहशत का माहौल है.
गांव में पसरा सन्नाटा
वर्तमान में हरिनगर गांव की स्थिति किसी अघोषित कर्फ्यू जैसी नजर आती है. पुलिस की लगातार छापेमारी और गिरफ्तारी के डर से गांव के लगभग सभी पुरुष घर छोड़कर भाग गए हैं. गांव की गलियों में सन्नाटा पसरा है और घरों में केवल बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे ही बचे हैं. स्थानीय महिलाओं का कहना है कि पुलिस के खौफ के कारण खेती-बारी का काम भी ठप पड़ा है. हालांकि पुलिस का दावा है कि वह केवल दोषियों पर कार्रवाई कर रही है, लेकिन ग्रामीणों में इस बात का डर है कि निर्दोषों को भी इस मामले में घसीटा जा सकता है. फिलहाल गांव में पुलिस कैंप कर रही है और स्थिति पर नजर बनाए हुए है.
यहां देखें वीडियो
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