बाढ़ आपदा में पहली बार दरवाजे तक पहुंची सरकार...बाढ़ के बीच ग्रामीणों की आंखों में दिखी उम्मीद

आशीष अभिनव

• 02:52 PM • 17 Sep 2026

बिहार के 13 जिले बाढ़ से प्रभावित हैं. बाढ़ पीड़ितों के लिए सरकार अब उनके घर तक पहुंचकर आपदा से राहत दिलाने की कोशिश कर रही है. बाढ़ की मुश्किलों के बीच जब केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान और मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी बाढ़ प्रभावित इलाकों में पहुंचे, तो ग्रामीणों ने अपनी परेशानियां सीधे उनके सामने रखीं.

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वैशाली: बिहार के कई जिले बाढ़ से प्रभावित हैं. बाढ़ पीड़ितों के लिए सरकार अब उनके घर तक पहुंचकर आपदा से राहत दिलाने की कोशिश कर रही है. बिहार में बाढ़ की मुश्किलों के बीच जब केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान और मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी बाढ़ प्रभावित इलाकों में पहुंचे, तो ग्रामीणों ने अपनी परेशानियां सीधे उनके सामने रखीं. किसी ने राहत की उम्मीद जताई तो किसी ने कहा कि सरकार का उनके दरवाजे तक पहुंचना ही बड़ी बात है. 

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बाढ़ प्रभावित इलाकों में पहुंचे शिवराज और सम्राट चौधरी

16 सितंबर को केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बिहार के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्देश पर पहुंचे केंद्रीय मंत्री ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और अधिकारियों के साथ प्रभावित इलाकों का जायजा लिया. टीम ने वैशाली के बाढ़ प्रभावित गांवों में नाव और ट्रैक्टर से पहुंचकर लोगों से बातचीत की. इसके बाद मुंगेर और भागलपुर में भी राहत शिविरों और प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण किया गया. अधिकारियों के मुताबिक, दौरे के दौरान बाढ़ से फसलों, घरों और अन्य संपत्तियों को हुए नुकसान का आकलन भी किया गया.

ग्रामीणों ने सीधे बताई अपनी परेशानी

दौरे के दौरान ग्रामीणों ने बाढ़ से पैदा हुई परेशानियों और नुकसान को लेकर अपनी बात रखी. बिटी देवी ने कहा कि सरकार को अपने दरवाजे पर देखकर अच्छा लग रहा है और वे अपनी समस्याएं सरकार के सामने रखेंगे. सरायपुर, वैशाली के चंदन कुमार ने कहा कि जिला प्रशासन की ओर से काम किया जा रहा है, लेकिन बाढ़ से हुए नुकसान को सरकार अपनी आंखों से देखेगी तो स्थिति को बेहतर तरीके से समझ पाएगी. वहीं भागलपुर के एक बाढ़ पीड़ित ने कहा कि सरकार का जनता के बीच पहुंचना बेहतर शासन की पहचान है और इस पहल की सराहना की जानी चाहिए. वैशाली के राघोपुर निवासी संतु दास ने कहा, "खराब परिस्थिति में सरकार को जनता के यहां आना चाहिए. पहली बार यहां पर कोई मंत्री आ रहा है. जो परेशानी हो रही है, सब कहेंगे. यही तो सरकार का फर्ज होना चाहिए." ग्रामीणों की ये बातें सिर्फ राहत की मांग नहीं थीं, बल्कि उस उम्मीद को भी दिखा रही थीं कि बाढ़ से हुए नुकसान को सरकार जमीन पर आकर देखे और उनकी समस्याओं का समाधान निकाले.


7 हजार रुपये की राहत राशि का भी जिक्र

बिहार सरकार ने बाढ़ प्रभावित परिवारों के लिए अंतरिम राहत के तौर पर 7,000 रुपये की सहायता राशि जारी की है. 15 सितंबर को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने 8.27 लाख से अधिक प्रभावित परिवारों के खातों में कुल 579.23 करोड़ रुपये DBT के जरिए ट्रांसफर किए थे. सरकार के मुताबिक, बाढ़ से प्रभावित परिवारों और किसानों को नुकसान के आकलन के बाद नियमानुसार आगे भी सहायता उपलब्ध कराई जाएगी.

12 राहत शिविर, 784 सामुदायिक रसोई और 1,156 नावें

16 सितंबर को जारी आंकड़ों के मुताबिक, बिहार में बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए 12 राहत शिविर चल रहे थे. इन शिविरों में 10,353 लोगों के लिए रहने, भोजन और चिकित्सा समेत जरूरी सुविधाओं की व्यवस्था की गई थी. इसके अलावा 784 सामुदायिक रसोई के जरिए बाढ़ प्रभावित लोगों को भोजन उपलब्ध कराया जा रहा था. अब तक 1.62 करोड़ से ज्यादा भोजन परोसे जाने की जानकारी दी गई है. राहत और आवाजाही के लिए 1,156 सरकारी नावें भी संचालित की जा रही थीं. बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव के लिए SDRF और NDRF की टीमें भी तैनात हैं. पशुओं के लिए चारे की व्यवस्था के साथ पॉलीथिन शीट, ड्राई राशन और फूड पैकेट भी वितरित किए गए हैं.

बाढ़ के बीच सरकार के दौरे से क्या उम्मीद?

ग्रामीणों के लिए सरकार के प्रतिनिधियों का उनके बीच पहुंचना सिर्फ निरीक्षण का हिस्सा नहीं, बल्कि अपनी परेशानियां सीधे बताने का मौका भी बना. बाढ़ से घर, फसल और रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित होने के बीच ग्रामीण अब राहत के साथ-साथ नुकसान के उचित आकलन और आगे की सहायता की उम्मीद कर रहे हैं. केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी कहा है कि केंद्र सरकार बाढ़ प्रभावित बिहार के साथ खड़ी है और नुकसान के आकलन के आधार पर हरसंभव सहायता उपलब्ध कराई जाएगी. फिलहाल बाढ़ प्रभावित परिवारों की नजर इस बात पर है कि सरकारी दौरे और नुकसान के आकलन के बाद राहत और पुनर्वास की प्रक्रिया किस तरह आगे बढ़ती है.