बिहार की राजनीति में विधानसभा चुनाव के बाद भी उथल-पुथल लगातार जारी है. कभी नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की बात को कभी निशांत कुमार की राजनीतिक एंट्री की चर्चाओं ने सियासी पारा काफी हाई कर रखा है. इसी बीच मु्ख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जदयू के अंदर चल रहे मतभेद सामने आया है. पार्टी ने अपने ही सांसद गिरधारी यादव की सदस्यता खत्म करने के लिए लोकसभा स्पीकर को नोटिस सौंप दिया है. उनपर पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप लगाया है. विस्तार से जानिए कौन हैं गिरधारी यादव और क्या है पूरा मामला?
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कौन हैं गिरधारी यादव?
गिरधारी यादव जदयू पार्टी के एक बड़े और कद्दावर नेताओं में से एक है. वे बांका लोकसभा क्षेत्र से सांसद है. गिरधारी यादव नीतीश कुमार के करीबी नेताओं में गिने जाते है. वे कई बार विधायक भी रह चुके है और बांका क्षेत्र में उनका अच्छा खासा प्रभाव भी देखने को मिलता है. पार्टी के अंदर भी गिरधारी यादव की एक मजबूत पकड़ है लेकिन अब पार्टी विरोधी गतिविधियों के कारण उनकी सदस्यता पर तलवार लटक रही है.
पार्टी ने क्यों लिया एक्शन?
गिरधारी यादव की सदस्यता रद्द करने के लिए पार्टी के संसदीय दल के नेता और सुपौल से सांसद दिलेश्वर कामत ने लोकसभा अध्यक्ष को नोटिस सौंपी है. बताया जा रहा है कि पार्टी ने उनपर दो बड़े आरोप लगाए है. एक तो उन्होंने SIR की प्रक्रिया के तहत पार्टी लाइन से हटकर बयान देते हुए पूरी प्रक्रिया पर ही सवाल उठा दिया था. दरअसल SIR की प्रक्रिया के दौरान विपक्ष लगातार सरकार को SIR पर घेर रहा था और ऐसे वक्त में गिरधारी यादव के बयान ने उन्हें और हवा दे दी थी. हालांकि पार्टी ने तब उनसे 15 दिन के अंदर जवाब मांगा था.
राजद कनेक्शन वाली कहानी आई सामने
गिरधारी यादव पर दूसरा बड़ा आरोप है कि उन्होंने साल 2025 के विधानसभा चुनाव में अपने बेटे के साथ राजद पार्टी का प्रचार प्रसार किया था. दरअसल विधानसभा चुनाव में उनके बेटे चाणक्य प्रकाश रंजन ने राजद का दामन थाम लिया था. पार्टी का आरोप है कि उन्होंने पार्टी के नियमों के खिलाफ जाकर अपने बेटे के लिए प्रचार-प्रसार किया और लोगों को राजद प्रत्याशी के लिए वोट देने की बात कही.
अब आगे क्या होगा?
नीतीश कुमार अब बिहार की राजनीति छोड़ दिल्ली जा सकते है. ऐसे में उनके बेटे निशांत कुमार पार्टी को संभाल सकते है लेकिन कमान नीतीश कुमार के हाथ में ही रहेगी. ऐसे में जाते-जाते नीतीश कुमार यह संदेश देना चाहते है कि वो कल भी पावर में थे और आज भी पावर में है. आपकों बता दें कि पार्टी ने गिरधारी यादव के खिलाफ कई सबूत भी लोकसभा अध्यक्ष को सौंप दिया है और उनसे सांसद की सदस्यता खत्म करने की मांग की है. अब देखना होगा कि लोकसभा अध्यक्ष इस पर क्या एक्शन लेते है.
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