जहां कभी जल संकट हुआ करता था, अब वहां पानी है. जो इलाके पानी की बूंद के लिए मोहताज थे, अब वहां हरियाली है. ये बात हम ऐसे ही नहीं कह रहे! ये बिहार सरकार के आंकड़े हैं. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के ड्रीम प्रोजेक्ट “जल-जीवन-हरियाली अभियान” का असर अब धरातल पर दिखने लगा है. लघु जल संसाधन विभाग ने राज्यभर में परंपरागत जलस्रोतों के पुनरुद्धार और नई योजनाओं के जरिए अब तक सुखाड़ वाले भूमि में सिंचाई की सुविधा पहुंचा दी है.
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2,70,697 हेक्टेयर भूमि तक पहुंचा पानी
बताते चलें कि विभाग की ओर से स्वीकृत 2,507 योजनाओं में से 2,297 योजनाएं पूरी हो चुकी हैं. सभी योजनाएं पूरी होने के बाद राज्य में कुल 2,70,697 हेक्टेयर भूमि में सिंचाई क्षमता पूरी हो जाएगी. इसके साथ ही 993 लाख घनमीटर जल संचयन क्षमता को रीस्टोर किया गया है.
जल संकट से निपटने की बड़ी पहल
बीते वर्षों में जलवायु परिवर्तन, वर्षा में कमी और भूगर्भ जल के अत्यधिक दोहन से बिहार के कई जिलों को गंभीर जल संकट का सामना करना पड़ा था. इसी चुनौती से निपटने के लिए 2019 में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने “जल-जीवन-हरियाली अभियान” की शुरुआत की.
रोजगार भी, हरियाली भी
इस अभियान ने जहां रोजगार के नए अवसर खोले हैं, वहीं जलस्रोतों में पानी जमा होने से भूगर्भ जलस्तर में भी सुधार दर्ज किया गया है. आहर-पईनों, तालाबों और पोखरों की मेढ़ पर किए गए वृक्षारोपण ने हरित क्षेत्र को बढ़ावा दिया है, जिससे इलाके में हरियाली भी बढ़ी है.
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