बिहार के जमुई में नाबालिग लड़के-लड़की से बदसलूकी और छेड़खानी के मामले में पुलिस प्रशासन ने बेहद कड़ा रुख अपनाया है. घटना का आपत्तिजनक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने और पीड़िता की पहचान उजागर करने के जुर्म में साइबर थाने में 120 से अधिक सोशल मीडिया प्रोफाइल्स के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई है. इस संवेदनशील मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए पुलिस अब तक तीन नाबालिग आरोपियों को शिकंजे में ले चुकी है.
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वीडियो शेयर करना पड़ा भारी
जमुई के पुलिस अधीक्षक (SP) विश्वजीत दयाल ने बताया कि किसी भी नाबालिग पीड़िता का वीडियो या उसकी पहचान सोशल मीडिया पर सार्वजनिक करना कानूनन संगीन अपराध है. उन्होंने स्पष्ट किया कि इस मामले को बेहद गंभीरता से लिया जा रहा है. अलग-अलग सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर पीड़िता की पहचान उजागर कर वीडियो शेयर करने वाले 120 प्रोफाइल धारकों को नामजद कर कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है. इन सभी पर पोक्सो एक्ट (POCSO Act) और आईटी एक्ट (IT Act) की संबंधित धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है.
एसआईटी कर रही जांच, मुख्य आरोपी की तलाश जारी
घटना की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस विभाग पूरी मुस्तैदी से जुटा है. एडीजी (लॉ एंड ऑर्डर) के.एस. अनुपम के अनुसार, मामले की पारदर्शी और त्वरित जांच के लिए एक विशेष जांच टीम (SIT) गठित की गई है, जिसकी कमान जमुई एसडीपीओ (SDPO) को सौंपी गई है.
यह पूरी वारदात जमुई-लखीसराय मुख्य मार्ग से दूर एक पहाड़ी इलाके में शाम के समय घटी थी. मामले में अब तक 7 से 8 युवकों के शामिल होने की बात सामने आई है. गिरफ्तार किए गए तीनों आरोपियों में दो की उम्र 17 से 18 वर्ष के बीच है. पुलिस का कहना है कि मुख्य आरोपी को भी जल्द गिरफ्तार कर लिया जाएगा और सभी के आपराधिक रिकॉर्ड को भी खंगाला जा रहा है.
प्रशासन की सख्त अपील, ना करें वीडियो फॉरवर्ड
मामले की गंभीरता को देखते हुए एसपी ने आम लोगों और सोशल मीडिया यूजर्स से भावुक अपील की है. उन्होंने कहा कि पीड़िता की गरिमा का ध्यान रखते हुए इस तरह के किसी भी वीडियो को लाइक, शेयर या फॉरवर्ड न करें. पुलिस प्रशासन निष्पक्षता से काम कर रहा है और कानून का उल्लंघन करने वाले किसी भी शख्स को बख्शा नहीं जाएगा.
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