जमुई में नाबालिग से छेड़खानी के मामले में पुलिस की कार्रवाई के बाद अब जिला प्रशासन ने अगला लक्ष्य तय कर दिया है. प्रशासन की कोशिश है कि आरोपियों के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़े और मामले को स्पीडी ट्रायल के जरिए जल्द अंजाम तक पहुंचाया जाए. इसके लिए अगले 15 से 20 दिनों के भीतर जरूरी प्रक्रिया पूरी करने का लक्ष्य रखा गया है.
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15 से 20 दिनों में स्पीडी ट्रायल की प्रक्रिया पूरी करने का लक्ष्य
इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी की जिम्मेदारी डीएसपी दीप्ति मोनाली और उप विकास आयुक्त शिप्रा चौधरी को दी गई है. दोनों अधिकारियों को नोडल पदाधिकारी बनाया गया है. जमुई के जिलाधिकारी नवीन और एसपी विश्वजीत दयाल ने गुरुवार को संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में अब तक हुई कार्रवाई और आगे की रणनीति की जानकारी दी.
दो मुख्य आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद बढ़ी कार्रवाई
पुलिस के मुताबिक इस मामले में नंदन यादव और हरेराम यादव को गिरफ्तार किया जा चुका है. नंदन यादव को पुलिस कार्रवाई के दौरान पकड़ा गया, जबकि हरेराम यादव की गिरफ्तारी के बाद उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है. पुलिस ने बताया कि पूरे मामले में अब तक पांच लोगों की गिरफ्तारी हुई है. एक अन्य व्यक्ति की भूमिका की जांच अभी जारी है.
पुलिस के अनुसार नंदन यादव की गिरफ्तारी के दौरान फायरिंग की स्थिति बनी थी. पुलिस का कहना है कि नंदन यादव की तरफ से गोली चलाए जाने के बाद आत्मरक्षा में पुलिस ने जवाबी फायरिंग की और इसके बाद उसे गिरफ्तार किया गया.
आरोपी के परिवार और दूसरी गतिविधियों की भी जांच
प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रशासन की ओर से नंदन यादव के पिता गनौरी यादव का भी जिक्र किया गया. डीएम ने बताया कि गनौरी यादव के खिलाफ वर्ष 2003 के डबल मर्डर मामले में कार्रवाई हो चुकी है और उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था.
वहीं, हरेराम यादव से जुड़ी बालू खनन की गतिविधियों की भी जांच की जा रही है. यानी पुलिस की कार्रवाई अब केवल मौजूदा मामले तक सीमित नहीं है, बल्कि आरोपियों से जुड़ी दूसरी गतिविधियों की भी जानकारी जुटाई जा रही है.
सोशल मीडिया पर भी कार्रवाई का दायरा बढ़ा
जमुई की घटना के बाद सोशल मीडिया पर वायरल सामग्री भी पुलिस की जांच के दायरे में है. प्रशासन के मुताबिक घटना से जुड़े वीडियो, एआई से तैयार सामग्री और पीड़िता की पहचान सामने लाने वाली गतिविधियों को लेकर बड़ी संख्या में लोगों को चिन्हित किया गया है.
एसपी विश्वजीत दयाल ने बताया कि पीड़िता की पहचान उजागर करने के मामले में साइबर थाना में कांड संख्या 45/26 दर्ज किया गया है. इस मामले में 120 लोगों पर केस दर्ज होने की जानकारी दी गई है.
इसके अलावा एआई के जरिए वीडियो तैयार कर घटना को जातिगत रंग देने के मामले में साइबर थाना कांड संख्या 46/26 दर्ज किया गया है. पुलिस के मुताबिक अब तक 225 लोगों को चिन्हित किया जा चुका है. इन लोगों को नोटिस भेजकर कानून के मुताबिक आगे की कार्रवाई की जाएगी.
पीड़िता की पहचान सार्वजनिक करने पर सख्त रुख
प्रशासन ने साफ किया है कि सोशल मीडिया पर पीड़िता की पहचान से जुड़ी किसी भी तरह की जानकारी साझा करना उचित नहीं है. अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि पीड़िता के पहनावे, पहचान या घटना से जुड़े निजी पहलुओं को लेकर टिप्पणी न करें.
पुलिस और प्रशासन ने यह भी कहा है कि घटना से संबंधित अपुष्ट वीडियो और एआई से तैयार सामग्री को बिना पुष्टि के शेयर करने से बचना चाहिए. ऐसी सामग्री मामले की जांच को प्रभावित करने के साथ-साथ पीड़िता की निजता को भी नुकसान पहुंचा सकती है.
अब कानूनी प्रक्रिया पर प्रशासन की नजर
मुख्य आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद प्रशासन का फोकस अब मामले को अदालत में तेजी से आगे बढ़ाने पर है. डीएसपी दीप्ति मोनाली और डीडीसी शिप्रा चौधरी को नोडल अधिकारी बनाए जाने के बाद जांच से जुड़े दस्तावेज और अन्य जरूरी औपचारिकताओं को जल्द पूरा करने की तैयारी है.
प्रशासन ने 15 से 20 दिनों के भीतर स्पीडी ट्रायल से जुड़ी आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने का लक्ष्य रखा है. इसके बाद अदालत में मामले की सुनवाई को तेजी से आगे बढ़ाने की कोशिश की जाएगी.
जमुई से राकेश कुमार सिंह की रिपोर्ट
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