23 जून को दिल्ली के जंतर-मंतर पर 'कॉकरोच जनता पार्टी' के प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा का मामला अब राजनीतिक और सोशल मीडिया पर एक बड़े तूफान में बदल चुका है, इस पूरे बवाल के केंद्र में हैं 14 साल की निशु आजाद, उनके पिता संजय आजाद और हिंदुवादी एक्टिविस्ट स्वतंत्र भारद्वाज.
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पॉडकास्ट के बयान से भड़का विवाद
मामले ने तूल तब पकड़ा जब स्वतंत्र भारद्वाज का एक पॉडकास्ट वीडियो इंटरनेट पर वायरल हुआ. वीडियो में स्वतंत्र बड़े ही बेबाक और आक्रामक अंदाज में जंतर-मंतर पर संजय आजाद के साथ हुई मारपीट की बात स्वीकार करते नजर आए. उन्होंने दावा किया कि हमले के कारण संजय के सिर में सात टांके आए. इसके साथ ही स्वतंत्र ने वीडियो में कपिल मिश्रा और चिराग पासवान जैसे बड़े नेताओं से अपने करीबी संबंधों और भाईचारे का हवाला भी दिया.
इस वीडियो के सामने आते ही सोशल मीडिया पर लोगों का गुस्सा फूट पड़ा और दिल्ली पुलिस की भूमिका पर सवाल उठने लगे.
निशु ने राहुल गांधी से मांगी मदद
अपने पिता पर हुए हमले और आरोपी की गिरफ्तारी न होने से परेशान निशु आजाद ने सोशल मीडिया के जरिए कांग्रेस नेता राहुल गांधी से मदद की गुहार लगाई. राहुल गांधी ने इस पर तुरंत प्रतिक्रिया देते हुए निशु को न्याय दिलाने का भरोसा दिया और कहा कि वह इस लड़ाई में पूरी तरह उनके साथ खड़े हैं. राहुल गांधी के इस बयान के बाद इस मुद्दे ने राष्ट्रीय राजनीति में तूल पकड़ लिया और विपक्ष ने दिल्ली पुलिस व सरकार को घेरना शुरू कर दिया.
बढ़ते दबाव के बीच स्वतंत्र की सफाई
चौतरफा घिरने और मीडिया में मामला तूल पकड़ने के बाद स्वतंत्र भारद्वाज ने अपनी सफाई पेश की. हालांकि, उनकी इस नई सफाई ने मामले को सुलझाने के बजाय और उलझा दिया है.
मूल रूप से बिहार (पटना के कंकड़बाग) के रहने वाले स्वतंत्र फिलहाल दिल्ली में रहते हैं. अपने बारे में बात करते हुए उन्होंने बताया कि वे मिथिला ब्राह्मण हैं और उन्हें छात्र जीवन से ही आंदोलनों का शौक रहा है. उन्होंने 2019-20 में पटना यूनिवर्सिटी के दौरान पहली बार किसी बड़े प्रदर्शन में हिस्सा लिया था, जिसके बाद से उनकी सक्रियता राजनीति और आंदोलनों में बढ़ती चली गई.
दिल्ली पुलिस और सीजेपी की प्रतिक्रिया
मामले में उठ रहे सवालों के बीच दिल्ली पुलिस ने अपनी स्थिति साफ की है:
मेडिकल रिपोर्ट: पुलिस के अनुसार, RML अस्पताल की मेडिकल जांच में संजय आजाद की चोट को 'मामूली' बताया गया है. डॉक्टरों का कहना है कि चोट सिर में क्रैक की वजह से नहीं, बल्कि हाथ में पहने कड़े से लगी थी.
कानूनी कार्रवाई: संजय कुमार के बयान के आधार पर पार्लियामेंट स्ट्रीट थाने में BNS की संबंधित धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की गई है.
हिरासत और नोटिस: पुलिस ने घटना के बाद स्वतंत्र भारद्वाज और सूरज कुमार को मौके से हिरासत में लेकर पूछताछ की थी और उन्हें कानूनी नोटिस थमाया था. पुलिस का कहना है कि जल्द ही अदालत में चार्जशीट पेश की जाएगी और किसी भी राजनीतिक दबाव का आरोप बेबुनियाद है.
दूसरी तरफ, सीजेपी (CJP) के प्रवक्ता सौरव दास ने दिल्ली पुलिस के इन दावों को खारिज करते हुए आरोप लगाया है कि पुलिस जानबूझकर मुख्य अभियुक्त को बचाने की कोशिश कर रही है. फिलहाल, सोशल मीडिया पर वायरल दावों, पुलिस की थ्योरी और राजनीतिक बयानों के बीच यह मामला लगातार गर्माया हुआ है.
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