बिहार की सत्ताधारी जनता दल यूनाइटेड (JDU) में मोकामा विधायक अनंत सिंह और पार्टी के मुख्य प्रवक्ता सह एमएलसी नीरज कुमार के बीच शुरू हुआ विवाद अब पार्टी नेतृत्व के लिए सिरदर्द बनता जा रहा है. पटना स्नातक विधान परिषद चुनाव को लेकर दोनों नेताओं के बीच सामने आए मतभेद को खत्म करने के लिए सोमवार को JDU प्रदेश कार्यालय में सुलह की बैठक बुलाई गई. बैठक में पार्टी के कई बड़े नेता मौजूद रहे, लेकिन बाहर निकलने के बाद अनंत सिंह की चुप्पी ने यह सवाल जरूर खड़ा कर दिया कि क्या पार्टी के भीतर सचमुच सबकुछ ठीक हो गया है?
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एक तरफ नीरज, दूसरी तरफ ‘छोटे सरकार’
इस पूरे विवाद की जड़ पटना स्नातक MLC चुनाव को लेकर है. JDU के वरिष्ठ नेता और एमएलसी नीरज कुमार इस सीट से लगातार तीन बार जीत दर्ज कर चुके हैं और एक बार फिर चुनावी मैदान में हैं. लेकिन इस बार उन्हें अपनी ही पार्टी के एक ताकतवर नेता से चुनौती मिल रही है. मोकामा विधायक अनंत सिंह ने खुले तौर पर नीरज कुमार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. अनंत सिंह ने नीरज कुमार के विरोधी उम्मीदवार डॉ. अनुज कुमार सिंह को समर्थन देने का ऐलान किया है.
अनंत सिंह का कहना है कि चुनावी मुकाबलों में जब उन्हें नीरज कुमार का साथ नहीं मिला, तो अब वह भी नीरज कुमार के लिए समर्थन क्यों करें?यही बयान JDU के भीतर बढ़ते मतभेद की वजह बन गया और मामला पार्टी नेतृत्व तक पहुंच गया.
पार्टी कार्यालय में घंटों चली ‘पैच-अप’ मीटिंग
विवाद को बढ़ने से रोकने के लिए JDU प्रदेश कार्यालय में दोनों नेताओं को आमने-सामने बैठाया गया. बैठक में अनंत सिंह और नीरज कुमार के अलावा JDU प्रदेश अध्यक्ष, बिहार सरकार के मंत्री श्रवण कुमार और वरिष्ठ नेता संजय गांधी भी मौजूद रहे.
बताया गया कि बैठक का मकसद दोनों नेताओं के बीच मतभेद खत्म करना और पार्टी को आगामी MLC चुनाव से पहले एकजुट रखना था. घंटों चली बातचीत में पार्टी नेतृत्व ने दोनों पक्षों को समझाने और विवाद को संगठन के अंदर ही सुलझाने की कोशिश की. बैठक खत्म होने के बाद नीरज कुमार ने भी यही संदेश देने की कोशिश की कि पार्टी में किसी तरह की दरार नहीं है.
नीरज कुमार बोले- ‘ऑल इज वेल’
बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में नीरज कुमार ने कहा कि पार्टी के नेता और कार्यकर्ता एकजुट हैं और आगे भी मिलकर काम करेंगे. मंत्री श्रवण कुमार ने भी बैठक को पार्टी के अंदर का संवाद बताया और अनुशासन को लेकर अपनी बात रखी. यानी पार्टी की ओर से साफ संदेश देने की कोशिश हुई कि विवाद खत्म हो चुका है और संगठन में सबकुछ सामान्य है.लेकिन कहानी का दूसरा हिस्सा तब सामने आया, जब बैठक से अनंत सिंह बाहर निकले.
सवाल पूछे गए, लेकिन ‘छोटे सरकार’ ने नहीं दिया जवाब
बैठक खत्म होने के बाद पत्रकारों ने अनंत सिंह से सीधे सवाल किया कि क्या विवाद खत्म हो गया है? क्या वह अब JDU के आधिकारिक उम्मीदवार नीरज कुमार का समर्थन करेंगे? लेकिन अनंत सिंह ने इन सवालों का कोई जवाब नहीं दिया. वह चुपचाप बाहर निकले, अपनी गाड़ी में बैठे और वहां से रवाना हो गए.उनकी यह खामोशी अब सियासी गलियारों में चर्चा का विषय बन गई है.
क्योंकि अगर बैठक में वाकई विवाद खत्म हो गया है, तो सबसे बड़ा सवाल यही है कि अनंत सिंह ने नीरज कुमार के समर्थन को लेकर अपनी स्थिति साफ क्यों नहीं की?
नीरज के लिए अनंत सिंह क्यों हैं बड़ी चुनौती?
अनंत सिंह का राजनीतिक प्रभाव सिर्फ मोकामा तक सीमित नहीं माना जाता. मोकामा, बाढ़ और आसपास के इलाकों में उनका मजबूत जनाधार है. पटना स्नातक MLC सीट के दायरे में आने वाले विधानसभा क्षेत्रों में उनके समर्थकों का प्रभाव चुनावी समीकरण को प्रभावित कर सकता है.यही वजह है कि अनंत सिंह का किसी उम्मीदवार के पक्ष में खुलकर उतरना JDU के लिए सामान्य राजनीतिक बयान नहीं माना जा रहा.
अगर अनंत सिंह अपने रुख पर कायम रहते हैं और उनके समर्थक डॉ. अनुज कुमार सिंह के पक्ष में मतदान करते हैं, तो इसका सीधा असर JDU उम्मीदवार नीरज कुमार के चुनावी समीकरण पर पड़ सकता है.
सुलह हुई या सिर्फ विवाद को दबाया गया?
JDU नेतृत्व ने फिलहाल दोनों नेताओं के बीच विवाद को सार्वजनिक रूप से खत्म करने की कोशिश जरूर की है. नीरज कुमार का ‘ऑल इज वेल’ वाला बयान भी सामने आ चुका है.लेकिन अनंत सिंह की खामोशी बताती है कि तस्वीर अभी पूरी तरह साफ नहीं हुई है. सवाल अब सिर्फ यह नहीं है कि अनंत सिंह और नीरज कुमार के बीच विवाद खत्म हुआ या नहीं.
असली सवाल यह है कि क्या अनंत सिंह पटना स्नातक MLC चुनाव में JDU के आधिकारिक उम्मीदवार नीरज कुमार के लिए मैदान में उतरेंगे? जब तक इस सवाल का जवाब खुद ‘छोटे सरकार’ नहीं देते, तब तक JDU की यह ‘पैच-अप’ मीटिंग कितनी सफल रही, इस पर सियासी अटकलें जारी रहेंगी.
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