"मार दिया तो मार दिया..." दिल्ली में बिहारी युवक की हत्या पर मांझी का शर्मनाक बयान, भड़के तेजस्वी यादव ने यूं दिया जवाब

दिल्ली में खगड़िया के युवक पांडव कुमार की 'बिहारी' पहचान के कारण हुई हत्या पर केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने विवादित बयान दिया है, जिसकी तेजस्वी यादव ने कड़ी निंदा करते हुए माफी की मांग की है.

जीतन राम मांझी
जीतन राम मांझी

न्यूज तक डेस्क

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देश की राजधानी दिल्ली में एक बिहारी युवक की हत्या के मामले ने अब राजनीतिक तूल पकड़ लिया है. इस घटना पर केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी द्वारा दिए गए एक बयान ने बिहार की सियासत में उबाल ला दिया है. युवक की हत्या पर संवेदना व्यक्त करने के बजाय मांझी का यह कहना कि "मार दिया तो मार दिया, इसमें कौन सी बड़ी बात है", अब उनके लिए गले की फांस बन गया है.

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क्या है पूरा मामला?

दिल्ली में खगड़िया के रहने वाले एक युवक, जिसका नाम पांडव कुमार था, की गोली मारकर हत्या कर दी गई. परिजनों का आरोप है कि पांडव की हत्या सिर्फ इसलिए की गई क्योंकि वह 'बिहारी' था. मृतक के परिवार का कहना है कि आरोपी ने पहले पांडव से उसकी पहचान पूछी और 'बिहारी' होने की पुष्टि होने पर उसे गोली मार दी. पांडव अपने घर का इकलौता कमाने वाला सदस्य था.

जीतन राम मांझी का 'शर्मनाक' बयान

जब मीडिया ने इस घटना पर केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी से सवाल पूछा, तो उन्होंने बेहद लापरवाही भरा जवाब दिया. मांझी ने कहा, "मार दिया तो मार दिया, इसमें कौन बड़ी बात है? कोई ऐसी ही गोली नहीं चलाता है, कुछ तो बात हुई होगी. जांच होगी फिर पता चलेगा. आपको कोई क्यों नहीं गोली मार देता?" मांझी के इस बयान की चौतरफा निंदा हो रही है और इसे बिहारियों का अपमान बताया जा रहा है.

तेजस्वी यादव का पलटवार

नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने इस बयान पर कड़ी आपत्ति जताते हुए इसे 'घटिया' करार दिया है. तेजस्वी ने कहा, "सत्ता में बैठे लोग चुप हैं और जो मुंह खोल रहे हैं, उनके पास संवेदना के शब्द नहीं हैं. मांझी जी का बयान बेहद घटिया है, उन्हें बिहार के लोगों से माफी मांगनी चाहिए. दिल्ली में सरकार उनकी है, पुलिस उनकी है, फिर भी बिहारियों को चुन-चुन कर निशाना बनाया जा रहा है."

परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल

मृतक पांडव का परिवार इस समय गहरे सदमे में है. रोते-बिलखते माता-पिता और बहन का कहना है कि घर का चिराग बुझ गया है. वे सरकार से न्याय की गुहार लगा रहे हैं, लेकिन सत्ता में बैठे नेताओं के ऐसे बयान उनके जख्मों पर नमक छिड़कने जैसा काम कर रहे हैं.

 

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