Katihar Flood: पानी में डूबा स्कूल, नाव बनी पाठशाला, शिक्षक मो. साहेब ने बाढ़ के बीच जारी रखी बच्चों की पढ़ाई

ऋचा शर्मा

• 06:19 PM • 16 Sep 2026

कटिहार के अमदाबाद में बाढ़ ने स्कूल और गांव को पानी में डुबो दिया, लेकिन बच्चों की पढ़ाई का सफर नहीं रुका. शिक्षक मो. साहेब ने नाव को ही पाठशाला बना दिया, जहां अभिभावकों की सहमति से बच्चे रोज सुरक्षित तरीके से पढ़ाई कर रहे हैं. बाढ़ के बीच सामने आई ‘नाव वाली पाठशाला’ की ये तस्वीर शिक्षा के प्रति बच्चों और शिक्षक के जज्बे की अनूठी मिसाल है.

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बिहार में बाढ़ की विभीषिका के बीच कटिहार से शिक्षा और हौसले की एक प्रेरणादायक तस्वीर सामने आई है. जिले के अमदाबाद प्रखंड के रघुनाथपुर गांव में बाढ़ के पानी ने स्कूल, सड़क और घरों को अपनी चपेट में ले लिया है, लेकिन इस मुश्किल हालात में भी बच्चों की पढ़ाई नहीं रुकी. एक शिक्षक ने नाव को ही पाठशाला बना दिया है और उसी पर बच्चों को पढ़ा रहे हैं.

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स्कूल डूबा तो नाव बनी बच्चों की पाठशाला

रघुनाथपुर गांव में बाढ़ का पानी भरा हुआ है. ऐसे में बच्चों के लिए स्कूल तक पहुंचना मुश्किल हो गया है. बाढ़ के कारण पढ़ाई का सिलसिला लंबे समय तक प्रभावित न हो, इसके लिए प्राइवेट कोचिंग चलाने वाले शिक्षक मो. साहेब ने एक अनूठा रास्ता निकाला. उन्होंने गांव में अपेक्षाकृत शांत और कम गहरे पानी वाले स्थान पर नाव को पढ़ाई की जगह बना दिया. इसी नाव पर बच्चे बैठकर रोजाना पढ़ाई कर रहे हैं. शिक्षक खुद बच्चों को उनके घर से नाव तक लाते हैं और क्लास खत्म होने के बाद उन्हें सुरक्षित वापस घर पहुंचाते हैं.

अभिभावकों की सहमति से चल रही क्लास

शिक्षक के मुताबिक, नाव पर पढ़ाई शुरू करने से पहले बच्चों के अभिभावकों की सहमति ली गई है. जिस जगह पर क्लास चल रही है, वहां पानी का बहाव शांत और गहराई कम बताई जा रही है. सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए बच्चों को नाव पर पढ़ाया जा रहा है. मो. साहेब का कहना है कि बाढ़ का असर खत्म होने में काफी समय लग सकता है. अगर इस दौरान बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह रुक गई तो उनके सीखने और स्किल डेवलपमेंट पर असर पड़ेगा. इसी वजह से उन्होंने मुश्किल हालात में भी पढ़ाई जारी रखने का फैसला किया.

'आपदा के बीच भी पढ़ाई जरूरी'

नाव पर बच्चों को पढ़ाने वाले शिक्षक मो. साहेब कहते हैं कि बिहार में बाढ़ हर साल बड़ी चुनौती लेकर आती है, लेकिन बच्चों की पढ़ाई को रोका नहीं जा सकता. उनका कहना है कि सुरक्षित परिस्थितियों में नाव पर क्लास चलाकर बच्चों की पढ़ाई जारी रखी जा सकती है.

नाव पर पढ़ते बच्चों में दिखा उत्साह

नाव पर बैठकर पढ़ रहे बच्चों के चेहरे पर डर के बजाय पढ़ाई को लेकर उत्साह नजर आया. कक्षा 5 के छात्र सत्यम ने बताया कि गांव और स्कूल के आसपास पानी भरा हुआ है. नाव वाले स्थान पर पानी कम है और शिक्षक खुद बच्चों को लेकर आते हैं, इसलिए अभिभावकों ने पढ़ाई की अनुमति दी है. वहीं कक्षा 6 की छात्रा अन्नू ने बताया कि रोज करीब एक से डेढ़ घंटे तक नाव पर पढ़ाई होती है. उसके मुताबिक, पानी कम होने की वजह से उसे नाव पर पढ़ने में डर नहीं लगता और आपदा के बावजूद पढ़ाई जारी रखना जरूरी है.

बाढ़ के बीच दिखा शिक्षा के प्रति जज्बा

कटिहार के अमदाबाद से सामने आई यह तस्वीर बताती है कि प्राकृतिक आपदा के बीच भी पढ़ाई को जारी रखने की कोशिशें की जा रही हैं. बाढ़ ने गांव के रास्ते और स्कूल को जरूर प्रभावित किया है, लेकिन शिक्षक और बच्चों का पढ़ाई जारी रखने का जज्बा कायम है. नाव पर चल रही यह पाठशाला मुश्किल हालात में शिक्षा के प्रति समर्पण की एक अलग तस्वीर पेश कर रही है.