समस्तीपुर के सरायरंजन स्थित KSR कॉलेज को बचाने की मांग को लेकर अब आंदोलन तेज होने जा रहा है. समाजसेवी कुणाल कुमार के नेतृत्व में 16 अगस्त 2026 से सरायरंजन से पटना तक ऐतिहासिक पदयात्रा निकाली जाएगी. इस पदयात्रा का समापन मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष के आवास तक पहुंचकर अपनी मांग रखने के साथ होगा.
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'KSR कॉलेज बचाओ आंदोलन समिति' का क्या है आरोप?
'KSR कॉलेज बचाओ आंदोलन समिति' का आरोप है कि ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे परियोजना की आड़ में सरायरंजन की ऐतिहासिक शैक्षणिक धरोहर KSR कॉलेज के अस्तित्व को खतरा पैदा हो गया है. समिति का कहना है कि विकास जरूरी है, लेकिन शिक्षा और ऐतिहासिक विरासत की कीमत पर नहीं. आंदोलनकारियों ने एक्सप्रेसवे के लिए कॉलेज को प्रभावित न करने वाले वैकल्पिक और तर्कसंगत रूट की मांग की है.
समाजसेवी कुणाल कुमार ने उठाया मुद्दा
इस मुद्दे को समाजसेवी कुणाल कुमार और स्थानीय नागरिकों ने पहली बार 4 मई 2025 को उठाया था. इसके बाद 8 मई को मंत्री विजय कुमार चौधरी की ओर से बैठक बुलाए जाने और रूट बदलने का मौखिक भरोसा दिए जाने का दावा किया गया है. हालांकि, आंदोलन समिति का आरोप है कि कोई आधिकारिक अधिसूचना जारी नहीं हुई और स्थानीय स्तर पर तैयार की गई रिपोर्ट को लेकर भी सवाल खड़े हुए.
जमीन से जुड़े फैसलों को लेकर भी कई आरोप
आंदोलन समिति ने प्रशासनिक अधिकारियों की भूमिका और जमीन से जुड़े फैसलों को लेकर भी कई आरोप लगाए हैं. इसके अलावा सरायरंजन में प्रस्तावित पावर प्लांट के स्थान में बदलाव से सरकारी खजाने पर अतिरिक्त बोझ पड़ने का भी दावा किया गया है. हालांकि, ये सभी आरोप आंदोलन समिति की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में लगाए गए हैं. समिति का कहना है कि NHAI की ओर से जारी एक स्पष्टीकरण को बाद में हटाया गया. इसके पीछे अधिकारियों पर दबाव बनाए जाने का आरोप भी लगाया गया है.
समिति का बड़ा आरोप
आंदोलन समिति ने राजस्व विभाग के तत्कालीन जिला भू-अर्जन पदाधिकारी प्रवीण कुमार की पदस्थापना को लेकर भी सवाल उठाए हैं. समिति का आरोप है कि राजनीतिक प्रभाव के चलते अधिकारियों की पोस्टिंग और जमीन से जुड़े फैसलों का इस्तेमाल कुछ लोगों को फायदा पहुंचाने के लिए किया गया. कुणाल कुमार ने कहा है कि यह लड़ाई किसी व्यक्ति या राजनीतिक दल के खिलाफ नहीं, बल्कि सरायरंजन के भविष्य, शिक्षा और पारदर्शी व्यवस्था को बचाने के लिए है. उन्होंने छात्रों, अभिभावकों, शिक्षकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और आम लोगों से पदयात्रा में शामिल होने की अपील की है.
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