बिहार की राजधानी पटना में फर्जीवाड़े और अधिकारियों पर धौंस जमाने का एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है. केंद्रीय पंचायती राज और ललन सिंह का 'फर्जी निजी सचिव' (PA) बनकर बेउर जेल के अधीक्षक को फोन करने वाले शातिर जालसाज को सचिवालय थाना पुलिस ने सलाखों के पीछे भेज दिया है. गिरफ्तार आरोपी की पहचान धीरज कुमार के रूप में हुई है.
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यह शातिर केंद्रीय मंत्री के नाम का इस्तेमाल करके भागलपुर जेल में बंद एक कैदी को पटना की हाई-प्रोफाइल बेउर जेल में ट्रांसफर कराने का हुक्म दे रहा था.
कैदी के ट्रांसफर के लिए जेल अधीक्षक पर बना रहा था दबाव
पूरा मामला तब शुरू हुआ जब पटना की बेउर जेल के अधीक्षक के पास एक अज्ञात नंबर से फोन आया. फोन करने वाले ने खुद को केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह का निजी सचिव बताया.
सामने वाले ने बेहद रोबीले अंदाज में बेउर जेल अधीक्षक को आदेश दिया कि— "भागलपुर जेल में बंद एक खास कैदी को तत्काल प्रभाव से पटना की बेउर जेल में शिफ्ट (ट्रांसफर) किया जाए."
मंत्री से संपर्क हुआ तो खुला 'फर्जीवाड़े' का राज
जेल अधीक्षक को फोन पर बातचीत के लहजे और कैदी के ट्रांसफर के आदेश पर कुछ शक हुआ. मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए जब केंद्रीय मंत्री ललन सिंह से सीधे संपर्क कर इसकी पुष्टि की गई, तो सच सामने आ गया.
केंद्रीय मंत्री ने साफ किया कि उनके या उनके किसी भी आधिकारिक सचिव की तरफ से बेउर जेल प्रशासन को ऐसा कोई फोन या निर्देश जारी नहीं किया गया है. मंत्री के नाम पर फर्जीवाड़े की बात सुनते ही पुलिस प्रशासन में हड़कंप मच गया.
सचिवालय थाने में FIR दर्ज, आरोपी धीरज कुमार सलाखों के पीछे
फर्जीवाड़े की पुष्टि होते ही तुरंत इस मामले में सचिवालय थाना में आरोपी धीरज कुमार के खिलाफ नामजद एफआईआर (FIR) दर्ज कराई गई.
मामला हाई-प्रोफाइल मंत्री और जेल प्रशासन से जुड़ा होने के कारण सचिवालय पुलिस तुरंत हरकत में आई. पुलिस ने तकनीकी सर्विलांस और सर्विलांस टीम की मदद से लोकेशन ट्रैक कर फर्जी सचिव धीरज कुमार को गिरफ्तार कर लिया.
पुलिस अब आरोपी धीरज कुमार से कड़ाई से पूछताछ कर रही है कि उसने भागलपुर के किस कैदी को बेउर जेल लाने के लिए यह फर्जीवाड़ा रचा था और इसके पीछे उसकी क्या मंशा या डील हुई थी.
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