Motihari Traffic Jam: बिहार का मोतिहारी शहर इन दिनों सोशल मीडिया पर एक बेहद अनोखे और वायरल वीडियो की वजह से देश भर में चर्चा का विषय बना हुआ है. शहर की आम जनता ने बिना कोई हंगामा किए, बिना पत्थरबाजी या नारेबाजी के, सिर्फ अपने वाहनों का हॉर्न बजाकर वीआईपी कल्चर और प्रशासनिक व्यवस्था को ऐसा आईना दिखाया है कि पुलिसकर्मी भी हैरान रह गए.
ADVERTISEMENT
47 डिग्री की धूप में वीआईपी मूवमेंट के नाम पर थमा शहर
मिली जानकारी के अनुसार, यह घटना महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह के दौरान की है, जहां देश के उपराष्ट्रपति के आगमन को लेकर कड़े सुरक्षा इंतजाम किए गए थे. वीआईपी मूवमेंट के नाम पर शहर के कचहरी चौक समेत कई मुख्य रास्तों पर पुलिस ने ट्रैफिक को पूरी तरह रोक दिया था. एक तरफ 47 डिग्री जैसी झुलसा देने वाली भीषण गर्मी और माथे से बहता पसीना, तो दूसरी तरफ सड़क पर घंटों से फंसी एंबुलेंस, बाइक, ऑटो और आम लोग. इस जाम में छात्र, मजदूर, मरीज, नौकरीपेशा लोग और नन्हे बच्चों के साथ महिलाएं घंटों से परेशान हो रही थीं.
बिना हिंसा, सिर्फ 'हॉर्न' को बनाया लोकतांत्रिक हथियार
इस बार मोतिहारी की जनता ने तमाशबीन बनकर चुपचाप परेशानी झेलने से इंकार कर दिया. लेकिन खास बात यह रही कि किसी ने न तो बैरिकेड तोड़ा और न ही पुलिसकर्मियों के साथ बदसलूकी की. जनता ने विरोध दर्ज कराने के लिए अपने सबसे अनोखे और लोकतांत्रिक हथियार 'हॉर्न' का इस्तेमाल किया. सड़क पर फंसे सैकड़ों वाहनों के हॉर्न एक साथ बजने शुरू हो गए.
हॉर्न के शोर से झुका सिस्टम, खोलना पड़ा रास्ता
कुछ ही मिनटों में पूरा कचहरी चौक हॉर्न की गगनभेदी आवाज से गूंज उठा. ऐसा लग रहा था मानो सड़क पर खड़ी हर गाड़ी एक सुर में कह रही हो कि लोकतंत्र में जनता ही सबसे बड़ी वीआईपी है. पहले तो ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों ने लोगों को समझाने और शांत कराने की कोशिश की, लेकिन जब सामूहिक असहमति की यह आवाज थमी नहीं, तो पुलिस के पसीने छूट गए. आखिरकार भारी दबाव के आगे प्रशासन को झुकना पड़ा, सुरक्षा घेरा ढीला किया गया और रास्ता खोलना पड़ा.
सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल, वीआईपी मानसिकता पर उठे सवाल
यह पूरा वाकया उस समय और तेजी से चर्चा में आया जब कल्पना श्रीवास्तव नाम की एक महिला यूजर ने इसका वीडियो अपने सोशल मीडिया हैंडल 'एक्स' (पहले ट्विटर) पर साझा किया. देखते ही देखते यह वीडियो वायरल हो गया और हजारों लोग मोतिहारी की जनता के इस शांतिपूर्ण और प्रभावी विरोध के समर्थन में उतर आए. लोगों का कहना है कि लोकतंत्र में सबसे बड़ा वीआईपी वो आम आदमी है जो टैक्स देता है और वोट देता है, इसलिए वीआईपी मूवमेंट का मतलब जनता की परेशानी नहीं, बल्कि उनकी सहूलियत होना चाहिए.
ADVERTISEMENT


