राष्ट्रीय जनता दल के वरिष्ठ नेता और पूर्व प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी के इस्तीफे के बाद बिहार की राजनीति में गरमाहट आ गई है. इसी बीच मृत्युंजय तिवारी ने पार्टी छोड़ने की असली वजहों का खुलकर खुलासा किया है. उन्होंने बताया कि किस तरह से उनके आत्मसम्मान को ठेस पहुंची और पार्टी के भीतर निष्ठावान कार्यकर्ताओं की अनदेखी की जा रही है. उन्होंने साफ किया कि उनके इस फैसले से पार्टी का एक-एक नेता और कार्यकर्ता दुखी है. विस्तार से जानिए मृत्युंजय तिवारी के पार्टी छोड़ने के पीछे की पूरी कहानी.
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अब्दुल बारी सिद्दीकी से मुलाकात और पुराने संबंध
मृत्युंजय तिवारी ने RJD के राष्ट्रीय प्रधान महासचिव अब्दुल बारी सिद्दीकी से मुलाकात की. उन्होंने सिद्दीकी साहब को अपना अभिभावक और गार्जियन बताते हुए कहा कि उनके साथ संबंध तब से हैं जब वह खेल मंत्री हुआ करते थे. उन्होंने कहा कि वह सिद्दीकी साहब के पास अपना सुख-दुख साझा करने आए थे क्योंकि उनके साथ बहुत ही निजी और पुराने रिश्ते हैं. पार्टी में उनके इस इस्तीफे के फैसले से हर कोई दुखी है और सबको पता है कि उन्हें किस मजबूरी में यह कदम उठाना पड़ा है.
सम्मान को ठेस पहुंचने पर उठाया सख्त कदम
अपने इस्तीफे पर बात करते हुए तिवारी ने कहा कि वह सिर्फ सम्मान के भूखे हैं. जब किसी के सम्मान को ठेस लगती है और भावनाएं आहत होती हैं, तो कोई भी व्यक्ति ऐसा सख्त कदम उठाने के लिए मजबूर हो जाता है. उन्होंने स्पष्ट किया कि जब पार्टी दो-दो बार बिहार की सरकार में रही, तब भी वह कभी अपने स्वार्थ के लिए किसी नेता के पास कोई सिफारिश लेकर नहीं गए और न ही उन्होंने पार्टी से अपने लिए कुछ मांगा.
'दीमक' की तरह पार्टी को खोखला कर रहे स्वार्थी लोग
पार्टी के मौजूदा हालात पर तीखा हमला बोलते हुए उन्होंने कहा कि जो लोग सिर्फ पद और टिकट के लालच में पार्टी से जुड़े हैं, वे इसे दीमक की तरह चाटकर खोखला कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि ऐसे स्वार्थी लोगों ने पार्टी की दुर्गति कर दी है और इसका जवाब पार्टी नेतृत्व को इन लोगों से मांगना चाहिए. उन्होंने सवाल उठाया कि ऐसे लोगों को आखिर श्री तेजस्वी यादव जी ताकत देकर क्यों रखे हुए हैं, जिसकी वजह से निष्ठावान और समर्पित कार्यकर्ता आहत होकर पार्टी छोड़ रहे हैं.
लालू यादव का भरोसा और पुराना दौर
तिवारी ने पार्टी के प्रति अपनी निष्ठा को याद करते हुए बताया कि जब राष्ट्रीय जनता दल अपने सबसे बुरे दौर से गुजर रहा था, तब आदरणीय राष्ट्रीय अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव ने खुद उन्हें बुलाकर प्रवक्ता और मीडिया प्रभारी की बड़ी जिम्मेदारी सौंपी थी. उनके कार्यकाल के दौरान पार्टी ने दो-दो विधानसभा चुनावों में नंबर वन बनने का सौभाग्य प्राप्त किया था. उन्होंने सवाल उठाया कि आज जब प्रवक्ताओं की इतनी बड़ी फौज है, तो फिर पार्टी की ऐसी दुर्गति क्यों हो रही है और इसकी जिम्मेदारी किसकी है.
तेजस्वी यादव और वरिष्ठ नेताओं से नहीं मिली कोई सुनवाई
उन्होंने नेतृत्व पर सीधा आरोप लगाते हुए कहा कि वह पिछले 8-10 महीनों से तेजस्वी यादव और पार्टी के सभी सीनियर नेताओं को अंदरूनी हालात के बारे में बता रहे थे. लेकिन दुर्भाग्य से किसी ने भी उनकी बात नहीं सुनी और कोई सुनवाई नहीं हुई. उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि यदि मेरे जैसे समर्पित भाव से काम करने वाले कार्यकर्ताओं को पार्टी में सम्मान नहीं मिलेगा, तो आने वाले समय में पार्टी को और भी बुरे दिन देखने को मिल सकते हैं.
भविष्य के कदम पर सस्पेंस बरकरार
जब मृत्युंजय तिवारी से उनके अगले राजनीतिक कदम के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने फिलहाल सस्पेंस बरकरार रखा. उन्होंने कहा कि उनके अगले कदम की जानकारी वह अगली बार देंगे. फिलहाल वह अपने निजी संबंधों के कारण अब्दुल बारी सिद्दीकी से मिलने आए थे और आगे की रणनीति का खुलासा वह आने वाले दिनों में करेंगे.
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