बिहार की सियासत से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है. राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के कद्दावर नेता और पार्टी का प्रमुख चेहरा रहे मृत्युंजय तिवारी ने पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया है. साल 2014 से लगातार पार्टी की विचारधारा को मजबूती से रखने वाले और आरजेडी के संकटमोचक माने जाने वाले मृत्युंजय तिवारी ने पार्टी आलाकमान पर अनदेखी और लगातार अपमानित करने के बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं. इस फैसले के बाद बिहार के राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है. साथ ही उनके पाला बदलने की चर्चाएं भी तेज हो गई है. विस्तार से जानिए पूरी कहानी.
ADVERTISEMENT
इस्तीफे के बाद छलका मृत्युंजय तिवारी का दर्द
इस्तीफे की घोषणा करने के बाद मृत्युंजय तिवारी काफी भावुक नजर आए. उन्होंने बताया कि उन्होंने पार्टी के लिए अपनी पूरी जवानी और करीब 20 साल समर्पित कर दिए. जब साल 2014 में पार्टी अपने सबसे बुरे दौर से गुजर रही थी, तब खुद राष्ट्रीय अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव ने उन्हें बुलाकर प्रवक्ता और मीडिया प्रभारी की बड़ी जिम्मेदारी सौंपी थी.
मृत्युंजय तिवारी ने दावा किया कि उन्होंने हर परिस्थिति में पार्टी का झंडा झुकने नहीं दिया और अपनी बात प्रखरता से रखी. उन्होंने याद दिलाया कि जिस पार्टी के कभी महज 10 से 22 विधायक टूट गए थे, उसे अपने दम पर और अपनी मेहनत से दोबारा 80 विधायकों वाली सबसे बड़ी पार्टी बनाने में उन्होंने मुख्य भूमिका निभाई थी. लेकिन इतने समर्पण के बाद भी पिछले 7-8 महीनों से उन्हें लगातार अपमानित करने का प्रयास किया गया, जिससे उनका धैर्य जवाब दे गया.
तेजस्वी यादव और उनके करीबियों पर गंभीर आरोप
मृत्युंजय तिवारी ने पार्टी के भीतर चल रहे अंतर्विरोधों और नेतृत्व पर सीधे सवाल खड़े किए हैं. उन्होंने कहा कि आरजेडी में कुछ लोग खुद को इतना बड़ा समझने लगे हैं कि उनके सामने पार्टी के नेता तेजस्वी यादव की भी नहीं चल रही है. उन्होंने इस पूरे अपमानजनक व्यवहार की शिकायत तेजस्वी यादव से भी की थी, लेकिन उनकी तरफ से कोई संज्ञान या कार्रवाई नहीं की गई.
तिवारी ने आरोप लगाया कि तेजस्वी यादव आज किसी और के इशारे पर काम कर रहे हैं और उनके पास सही-गलत का फैसला करने का वक्त नहीं है. उन्होंने कहा कि लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी अब सक्रिय रूप से पार्टी के फैसले नहीं देखते हैं, जिसका फायदा उठाकर कुछ लोग पार्टी को दीमक की तरह चाट रहे हैं और तेजस्वी यादव मूकदर्शक बने हुए हैं.
पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के सामने छलके आंसू
अपने इस्तीफे की परिस्थितियों को बयां करते हुए मृत्युंजय तिवारी ने बताया कि उन्होंने पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष मंगनी लाल मंडल और अन्य वरिष्ठ नेताओं के सामने खुलकर अपना पक्ष रखा. इस दौरान वे इतने भावुक हो गए कि उनकी आंखें डबडबा गईं.
उन्होंने बताया कि प्रदेश अध्यक्ष और वहां मौजूद अन्य नेताओं ने भी माना कि उनके साथ न्याय नहीं हुआ है, लेकिन हर कोई बेबस नजर आ रहा है. इससे पहले उन्होंने पूर्व प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद सिंह और वरिष्ठ नेता अब्दुल बारी सिद्दीकी के सामने भी अपनी बातें रखी थीं, लेकिन कोई भी कुछ बोलने की स्थिति में नहीं था. तिवारी ने साफ किया कि घुट-घुट कर रोज अपमान का घूंट पीने से बेहतर उन्होंने अपनी राह अलग करना समझा.
क्या बीजेपी में शामिल होंगे मृत्युंजय तिवारी?
जब मृत्युंजय तिवारी से सवाल पूछा गया कि क्या वे बीजेपी या किसी अन्य पार्टी में शामिल होने जा रहे हैं, तो उन्होंने इस पर खुलकर कोई जवाब नहीं दिया. उन्होंने केवल इतना कहा कि लोकतंत्र में सबको अपना राजनीतिक फैसला लेने का अधिकार है. उन्होंने पार्टी से कभी कोई व्यक्तिगत लाभ नहीं लिया और हमेशा एक पैर पर खड़े होकर काम किया. उन्होंने स्पष्ट किया कि वह कल (शनिवार) को पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से मिलकर अपना लिखित इस्तीफा सौंप देंगे, जिसके बाद ही अपने राजनीतिक भविष्य और अगले कदम को लेकर कोई अंतिम फैसला लेंगे.
ADVERTISEMENT


