विकासशील इंसान पार्टी (VIP) के प्रमुख और बिहार के कद्दावर नेता मुकेश सहनी के उत्तर प्रदेश दौरे को लेकर राज्य में सियासी घमासान छिड़ गया है. शाहजहांपुर और मिर्जापुर के प्रस्तावित दौरे पर निकलने से ठीक पहले पुलिस ने मुकेश सहनी को लखनऊ में ही हाउस अरेस्ट कर लिया है. पुलिस की इस अचानक हुई कार्रवाई के बाद मुकेश सहनी और उनके समर्थकों ने उत्तर प्रदेश की सरकार और प्रशासन पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं. वीआईपी प्रमुख ने इस पूरी कार्रवाई को लोकतंत्र की मूल भावना के खिलाफ बताया है और दावा किया है कि उत्तर प्रदेश में इस वक्त अघोषित आपातकाल जैसी स्थिति बनी हुई है.
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कानून व्यवस्था बिगड़ने का दिया गया हवाला
पार्टी द्वारा जारी किए गए आधिकारिक बयान और प्रशासनिक सूत्रों के मुताबिक, शाहजहांपुर के पुलिस अधीक्षक (SP) के एक पत्र के आधार पर लखनऊ प्रशासन ने मुकेश सहनी को रोकने के निर्देश जारी किए हैं. इस सरकारी पत्र में साफ तौर पर आशंका जताई गई थी कि मुकेश सहनी के जनपद भ्रमण यानी शाहजहांपुर आने से क्षेत्र की कानून व्यवस्था और सामाजिक सौहार्द प्रभावित हो सकता है.
इसी खुफिया इनपुट के आधार पर प्रशासन ने वीआईपी प्रमुख को लखनऊ में ही रोकने और उनके आवागमन पर कड़ी निगरानी रखने का फैसला किया. तय कार्यक्रम के मुताबिक, मुकेश सहनी का आज मिर्जापुर में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करने और रात में वहीं प्रवास करने का कार्यक्रम भी निर्धारित था, जिस पर अब पानी फिर गया है.
पुलिस और मुकेश सहनी के बीच खाने और होटल जाने को लेकर हुई बहस
हाउस अरेस्ट के दौरान मुकेश सहनी के आवास से एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें वे और उनके सहयोगी पुलिस अधिकारियों से तीखी बातचीत करते हुए नजर आ रहे हैं. वीडियो में मुकेश सहनी के सहयोगी पुलिस अधिकारियों से कहते दिख रहे हैं कि यदि कल के कार्यक्रम को लेकर कोई संदेह है, तो पुलिस उनके साथ चले क्योंकि रात में कुछ लोग डिनर पर नेताजी का इंतजार कर रहे हैं.
बातचीत के दौरान जब पुलिस ने नोटिस का हवाला दिया तो वीआईपी समर्थकों ने आरोप लगाया कि प्रशासन उन्हें खाना खाने के लिए होटल तक भी नहीं जाने दे रहा है और रात के 12 बजने के बाद इस तरह भूखा रखने की कोशिश की जा रही है. इस पर पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि पाबंदी सिर्फ उनके सार्वजनिक कार्यक्रमों में भाग लेने और शाहजहांपुर जाने पर है, खाना खाने पर कोई रोक नहीं है.
मुकेश सहनी ने सरकार की कार्रवाई को बताया 'गुंडागर्दी'
पुलिस की इस घेराबंदी से नाराज मुकेश सहनी ने मौके पर ही इसे सरकार की गुंडागर्दी करार दिया. उन्होंने पुलिस अधिकारियों से सीधे तौर पर सवाल किया कि उनके खाना खाने या कहीं आने-जाने से आखिर कौन सी कानून व्यवस्था बिगड़ने वाली है. सहनी ने अधिकारियों से यह भी पूछा कि क्या वे इस कार्यक्रम का समय समाप्त होने के बाद पटना या कहीं और जाने के लिए स्वतंत्र होंगे, जिस पर अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि कार्यक्रम की अवधि खत्म होने के बाद वे अपनी मर्जी के अनुसार जाने के लिए स्वतंत्र रहेंगे.
'आरक्षण और हक की लड़ाई आखिरी दम तक लड़ेंगे'
प्रशासन द्वारा रोके जाने के बाद मुकेश सहनी ने उत्तर प्रदेश सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि यह निषाद समाज के हक, अधिकार और आरक्षण की लड़ाई को दबाने की एक सोची-समझी कोशिश है. उन्होंने साफ लफ्जों में चेतावनी दी कि सरकार की इस तरह की दमनकारी कार्रवाई से उनका आंदोलन कमजोर होने वाला नहीं है. वीआईपी प्रमुख ने दावा किया कि अब पूरा निषाद समाज अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हो चुका है और अपने मान-सम्मान व हक की इस लड़ाई को आखिरी दम तक लड़ता रहेगा.
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