पंक्चर की दुकान और पाकिस्तान के लिए जासूसी! बिहार का 20 साल का नौशाद कैसे बना 'एजेंट'? सामने आई पूरी इनसाइड स्टोरी

Naushad Alam spy case: मुजफ्फरपुर का 20 वर्षीय नौशाद आलम, जो फरीदाबाद में पंक्चर की दुकान चलाता था, अब पाकिस्तानी जासूसी नेटवर्क से जुड़े होने के आरोप में गिरफ्त में है. सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक वह सेना की गतिविधियों की जानकारी सीमा पार भेजता था. जानिए कैसे एक साधारण युवक बना कथित एजेंट और क्या है पूरी इनसाइड स्टोरी.

Naushad Alam spy case inside story
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हर्षिता सिंह

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बिहार के मुजफ्फरपुर जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने सुरक्षा एजेंसियों से लेकर आम जनता तक को चौंका दिया है. महज 20 साल का एक युवक, जो हरियाणा के फरीदाबाद में एक मामूली पंक्चर की दुकान चलाता था, अब एक बड़े पाकिस्तानी जासूसी नेटवर्क का हिस्सा होने के आरोप में पुलिस की गिरफ्त में है. जैसे ही यह खबर सामने आई प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मचा हुआ है. जानिए इस मामले की पूरी इनसाइड स्टोरी.

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आर्थिक तंगी, छठी तक पढ़ाई और फिर जासूसी का रास्ता

नौशाद आलम मुजफ्फरपुर के एक साधारण परिवार से ताल्लुक रखता है. उसके पिता मजदूरी करते हैं और घर की माली हालत ठीक नहीं थी. इसी आर्थिक तंगी के कारण नौशाद ने छठी कक्षा के बाद पढ़ाई छोड़ दी थी. पिछले साल अक्टूबर में वह अपनी चचेरी बहन के साथ दिल्ली गया और फिर फरीदाबाद में पंक्चर की दुकान खोल ली. बाहर से देखने में वह एक साधारण मजदूर लगता था, लेकिन दुकान के भीतर से वह देश के खिलाफ गतिविधियों को अंजाम दे रहा था.

सेना के मूवमेंट और रणनीतिक ठिकानों पर थी नजर

जांच में खुलासा हुआ है कि नौशाद एक पाकिस्तानी हैंडलर के संपर्क में था. वह रेलवे स्टेशनों और अन्य रणनीतिक जगहों, जहां से सेना का मूवमेंट होता था, की जानकारी पाकिस्तान भेजता था. आरोप है कि उसने सोलर कैमरे लगाकर सेना की गतिविधियों पर नजर रखी और संवेदनशील सूचनाएं सीमा पार पहुंचाईं. उत्तर प्रदेश के कौशांबी में एक जासूसी नेटवर्क के पर्दाफाश के बाद नौशाद का नाम सामने आया.

16 मार्च का वो आखिरी फोन कॉल

नौशाद की मां ने बताया कि 15 मार्च को उसने फोन कर अच्छे से ईद मनाने की बात कही थी. लेकिन अगले ही दिन, 16 मार्च को उसका एक और कॉल आया जिसमें उसने घबराते हुए कहा कि उसे कुछ लोग (पुलिस वाले) उठाकर ले जा रहे हैं. तब से परिवार परेशान है और नौशाद की तलाश में जुटा है.

शक के घेरे में परिवार: मजदूरी और महंगी जमीनें

भले ही परिवार नौशाद को बेगुनाह बता रहा है, लेकिन गांव वालों की बातों ने मामले में नया मोड़ दे दिया है. ग्रामीणों का कहना है कि नौशाद के पिता, जो महज ₹500 दिहाड़ी पर मजदूरी करते हैं, अचानक गांव में महंगी जमीनें खरीदने लगे थे. एक गरीब परिवार के पास अचानक इतनी संपत्ति कहां से आई, इसे लेकर सुरक्षा एजेंसियां अब गहन जांच कर रही हैं. नौशाद का एक भाई, जो कोलकाता में काम करता है, वह भी अब जांच के दायरे में है.

सुरक्षा एजेंसियों की बड़ी कार्रवाई

सुरक्षा एजेंसियों ने इस मामले को गंभीरता से लिया है. नौशाद से लगातार पूछताछ की जा रही है ताकि इस पूरे जासूसी नेटवर्क के अन्य गुर्गों का पता लगाया जा सके. क्या वाकई नौशाद गरीबी की वजह से भटक गया या उसे किसी बड़े जाल में फंसाया गया है, यह जांच के बाद ही साफ होगा.

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