NEET Success Story: बिहार के इस छोटे से गांव से निकला देश का चौथा टॉपर, आयुष ने 710 अंक लाकर रचा इतिहास

शरत कुमार

17 Jul 2026 (अपडेटेड: Jul 17 2026 10:02 AM)

बिहार के नवादा जिले के 18 साल के आयुष भालोटिया ने NEET UG 2026 में 710 अंक लाकर ऑल इंडिया रैंक-4 हासिल की है. प्रतिदिन 7-8 घंटे की बेहतर सेल्फ स्टडी और NCERT पुस्तकों पर मजबूत पकड़ बनाकर वे अपने गांव के पहले डॉक्टर बनने जा रहे हैं.

आयुष भालोटिया ने NEET में 710 नंबर लाकर AIR रैंक 4 हासिल की (Photo ITG)
आयुष भालोटिया ने NEET में 710 नंबर लाकर AIR रैंक 4 हासिल की (Photo ITG)
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कहते हैं कि अगर हौसलों में उड़ान हो तो बंद कमरे की तपस्या भी पूरे देश में गूंज उठती है. कुछ ऐसा ही कर दिखाया है बिहार के नवादा जिले के एक बेहद छोटे और शांत कस्बे वरीसालीगंज के रहने वाले 18 साल के आयुष भालोटिया ने. जब देश की सबसे प्रतिष्ठित और मुश्किल परीक्षाओं में से एक 'नीट-यूजी 2026' के नतीजे घोषित हुए, तो वरीसालीगंज में ढोल-नगाड़ों और मिठाइयों का दौर शुरू हो गया.

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वजह बेहद खास थी. आयुष ने इस परीक्षा में 720 में से 710 अंक हासिल कर पूरे देश में चौथी रैंक (AIR-4) हासिल की है. यह सफलता केवल आयुष की नहीं है, बल्कि उनके पूरे कस्बे के लिए एक ऐतिहासिक पल है. परिवार का दावा है कि आयुष अपने गाँव और इस छोटे से इलाके के पहले डॉक्टर बनने की राह पर हैं.

बचपन का सपना जो बन गया जिद

आयुष के लिए स्टेथॉस्कोप (आल्हा) गले में लटकाना सिर्फ एक करियर विकल्प नहीं था, बल्कि बचपन से सँजोया हुआ एक ख्वाब था. वे बचपन से ही मरीजों की सेवा करना चाहते थे. जैसे-जैसे वे बड़े हुए, उनका यह सपना उनके जीने की वजह बन गया. जब उनके उम्र के बाकी बच्चे अलग-अलग करियर ऑप्शन तलाश रहे थे तब आयुष का निशाना बिल्कुल साफ था.

10वीं और 12वीं में भी रहे अव्वल

ऐसा नहीं है कि आयुष की यह सफलता अचानक मिली है. वे शुरू से ही पढ़ाई में अव्वल रहे हैं. उन्होंने अपनी 10वीं की बोर्ड परीक्षा 96.2% अंकों के साथ और 12वीं की परीक्षा 93.8% अंकों के साथ पास की थी. इस मजबूत बुनियाद के बाद उन्होंने पूरी ताकत नीट की तैयारी में झोंक दी.

सफलता के वो राज, जो हर छात्र के काम आएंगे

जब आयुष से उनकी इस बेमिसाल कामयाबी की रणनीति पूछी गई, तो उन्होंने बड़े ही व्यावहारिक तरीके से अपने गुरुमंत्र साझा किए:

  • NCERT को बनाया अपना 'ग्रंथ': आयुष का मानना है कि नीट निकालने के लिए इधर-उधर की सैकड़ों किताबें पढ़ने से बेहतर है कि आप NCERT की किताबों को घोलकर पी जाएं. गहराई से समझ और सटीक रिवीजन ही असली गेम-चेंजर है.
  • मॉक टेस्ट और खुद की कमियों का एनालिसिस: वे सिर्फ टेस्ट देकर छोड़ नहीं देते थे. हर टेस्ट के बाद वे अपनी गलतियों की एक लिस्ट बनाते थे और खुद से पूछते थे- "यह गलती क्यों हुई और अगली बार इसे कैसे सुधारना है?"
  • 7 से 8 घंटे की क्वालिटी सेल्फ-स्टडी: एलन करियर इंस्टीट्यूट में नियमित क्लास करने के बाद वे रोजाना घर पर 7 से 8 घंटे खुद पढ़ाई करते थे. उनका ध्यान पढ़ाई के घंटों पर नहीं, बल्कि दिन के टारगेट को पूरा करने पर होता था.

काम आया 'सपोर्ट सिस्टम'

तैयारी के दो साल आसान नहीं थे. आयुष बताते हैं कि कई बार सिलेबस के भारी-भरकम बोझ और टेस्ट के नंबरों को देखकर मानसिक तनाव होने लगता था. ऐसे मुश्किल वक्त में उनके पिता सुनील कुमार भालोटिया (जो सीमेंट-स्टील के व्यवसायी हैं) और माँ किरण देवी ने उनका हौसला डगमगाने नहीं दिया.

इसके अलावा, आईआईटी दिल्ली से पढ़ाई कर चुके और वर्तमान में अमेरिका से पीएचडी कर रहे उनके बड़े भाई अर्पित भालोटिया ने उनके गाइड की भूमिका निभाई. अर्पित ने आयुष को न सिर्फ विषय समझाए, बल्कि परीक्षा के दौरान समय का सही इस्तेमाल करना और मानसिक संतुलन बनाए रखना भी सिखाया.

दिमाग को शांत रखने के लिए 'शतरंज की चालें'

लगातार घंटों पढ़ने के बीच जब दिमाग थक जाता था, तो आयुष कोई गैजेट उठाने के बजाय शतरंज (Chess) की बिसात पर बैठ जाते थे. उनका मानना है कि पढ़ाई के दबाव को कम करने और एकाग्रता को बढ़ाने के लिए कोई न कोई हॉबी होना बेहद जरूरी है.

"छोटे शहर या गांव से होना कभी भी आपकी सफलता में रोड़ा नहीं बनता. अगर इरादा पक्का हो और सही दिशा में मेहनत की जाए, तो सफलता कदम चूमती है."

- आयुष भालोटिया, AIR-4 (NEET UG)

टॉपर्स की रेस में एलन का जलवा

इस साल के नतीजों में एलन करियर इंस्टीट्यूट के छात्रों का दबदबा देखने को मिला. संस्थान के आर्यन गुप्ता और पंशुल बंसल ने 715 अंक हासिल किए, जहाँ टाई-ब्रेकर नियम के तहत आर्यन को AIR-1 और पंशुल को AIR-2 मिली. वहीं, आयुष भालोटिया ने 710 अंकों के साथ AIR-4 पाई और उनके साथी छात्र गौरव सिंह ने AIR-9 हासिल की. टॉप-10 की सूची में संस्थान के 4 छात्रों ने अपनी जगह बनाई है.

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