कांग्रेस कार्य समिति (CWC) की 29 सितंबर को इंदिरा भवन में हुई बैठक में बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और जेडीयू सांसद नीतीश कुमार के इंडिया गठबंधन से अलग होने के कारणों को लेकर एक बार फिर खुलकर चर्चा हुई. बैठक के दौरान पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने इस बात पर चर्चा की कि आखिर नीतीश कुमार ने क्यों एनडीए का दामन थामा था और गठबंधन छोड़ने के पीछे उनका असली मकसद क्या था. विस्तार से जानिए पूरी बात.
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'संयोजक बनना महज दिखावा था, राज्य की राजनीति में रहना चाहते थे नीतीश'
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने CWC की बैठक में नीतीश कुमार के इंडिया ब्लॉक छोड़ने की असली वजह पर रोशनी डालते हुए एक बड़ा खुलासा किया. खरगे ने बताया कि नीतीश कुमार का इंडिया ब्लॉक का संयोजक बनने की कोशिश करना केवल एक दिखावा मात्र था. उन्होंने स्पष्ट किया कि नीतीश कुमार ने पहले ही उनसे साफ तौर पर कह दिया था कि वे केंद्र की राजनीति के बजाय राज्य यानी बिहार की राजनीति में ही सक्रिय रहना चाहते हैं और केंद्र में केवल इंडिया ब्लॉक का समर्थन करेंगे.
'गठबंधन में रुकना ही नहीं चाहते थे नीतीश, नए रास्ते तलाश रहे थे'
कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी ने भी बैठक में इस मुद्दे पर अपनी बात रखते हुए कहा कि नीतीश कुमार का मन पहले से ही इंडिया ब्लॉक से बाहर जाने का बन चुका था और वे गठबंधन में रुकना नहीं चाहते थे. सोनिया गांधी के मुताबिक, नीतीश कुमार इंडिया ब्लॉक से बाहर निकलने के लिए लगातार नए-नए रास्ते और बहाने तलाश रहे थे, इसलिए उनका वक्त रहते बाहर चले जाना ही बेहतर था.
28 जनवरी 2024 को आधिकारिक रूप से टूटा था नाता
गौरतलब है कि 28 जनवरी 2024 को नीतीश कुमार ने आधिकारिक तौर पर विपक्षी गठबंधन इंडिया ब्लॉक से नाता तोड़ लिया था और महागठबंधन सरकार के सीएम पद से इस्तीफा देकर एनडीए में वापस लौट गए थे. इसके बाद हुए लोकसभा और बिहार विधानसभा चुनावों में वे एनडीए के साथ चुनावी मैदान में उतरे. हालांकि, चुनाव के बाद वे कुछ समय के लिए बिहार के सीएम बने, लेकिन 16 मार्च 2026 को राज्यसभा के लिए निर्वाचित होने और 10 अप्रैल 2026 को शपथ लेने के बाद उन्होंने 15 अप्रैल 2026 को बिहार की कमान बीजेपी के पहले सीएम सम्राट चौधरी को सौंप दी.
चुनाव आयोग और एसआईआर के मुद्दों पर आर-पार की लड़ाई का संकल्प
नीतीश कुमार के प्रकरण के अलावा CWC की इस बैठक में चुनाव आयोग के कामकाज और एसआईआर अनियमितताओं को लेकर भी कड़े प्रस्ताव पारित किए गए. बैठक में शामिल राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि देश में चुनावों के दौरान ईवीएम और वोटर लिस्ट में मैच फिक्सिंग जैसी स्थिति बन रही है और चुनाव आयोग अब केवल 'वन मैन शो' बनकर रह गया है. कांग्रेस नेताओं ने हालिया मीडिया रिपोर्ट्स का हवाला देते हुए चुनाव आयोग की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठाए. पार्टी ने संकल्प लिया है कि जब तक चुनाव आयोग को एक स्वतंत्र संवैधानिक संस्था के रूप में बहाल नहीं किया जाता, तब तक इस मुद्दे पर सड़क से लेकर संसद तक कड़ा विरोध प्रदर्शन जारी रखा जाएगा.
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