बिहार सरकार पर नजर और बीजेपी को संदेश? नीतीश कुमार के बदले अंदाज ने बढ़ाई सियासी हलचल

Bihar Political News: बिहार की राजनीति में एक बार फिर नीतीश कुमार का बदला हुआ अंदाज चर्चा में है. विजय चौधरी को दिए खास निर्देश और सरकार के कामकाज की समीक्षा वाले वीडियो ने सियासी हलचल बढ़ा दी है. क्या मुख्यमंत्री पद छोड़ने के बाद भी बिहार सरकार पर नीतीश कुमार की पकड़ कायम है? विस्तार से जानिए पूरी कहानी.

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आशीष अभिनव

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बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान राज्यसभा सदस्य नीतीश कुमार को राजनीति का ऐसा चेहरा माना जाता है, जिन्हें समझ पाना अच्छे-अच्छे राजनीतिक विश्लेषकों के लिए भी बेहद मुश्किल है. नीतीश कुमार भले ही अब मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़ चुके हैं, लेकिन बिहार की सियासत में उनका पुराना अंदाज और रसूख आज भी जस का तस बरकरार है. हाल ही में नीतीश कुमार का एक नया वीडियो सामने आया है, जिसके बाद बिहार के सियासी गलियारों में एक बार फिर चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है. इस वीडियो में नीतीश कुमार एक बार फिर अपने पुराने रिव्यू मोड में नजर आ रहे हैं, जो यह साफ संकेत दे रहा है कि सरकार से हटने के बाद भी राज्य की व्यवस्था पर उनकी पकड़ ढीली नहीं हुई है.

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विजय चौधरी के आवास पर पहुंचे नीतीश, दिए खास निर्देश

नीतीश कुमार हाल ही में बिहार सरकार के डिप्टी सीएम और जेडीयू के वरिष्ठ नेता विजय चौधरी के आवास पर पहुंचे थे. मुलाकात के बाद जब नीतीश कुमार वहां से लौटने लगे, तो उन्होंने बेहद चिर-परिचित और सख्त अंदाज में विजय चौधरी से कहा, 'शाम में आइए बैठते हैं और एक-एक बात बताइए.' नीतीश कुमार का यह दो शब्दों का निर्देश सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में तेजी से वायरल हो रहा है. एक तरफ जहां मौजूदा मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी दिल्ली के दौरे पर हैं, वहीं दूसरी तरफ नीतीश कुमार का इस तरह नंबर दो की हैसियत रखने वाले मंत्री से सरकार के कामकाज का हिसाब मांगना कई बड़े राजनीतिक संदेश दे रहा है.

मार्गदर्शक की भूमिका में आए नीतीश कुमार

नीतीश कुमार ने जब मुख्यमंत्री पद की कुर्सी छोड़ी थी, तभी उन्होंने स्पष्ट कर दिया था कि भले ही वह सीधे तौर पर सरकार का हिस्सा नहीं हैं, लेकिन बिहार सरकार को उनका मार्गदर्शन हमेशा मिलता रहेगा. अब नीतीश कुमार पूरी तरीके से इसी मार्गदर्शक की भूमिका में आ चुके हैं. वे एक ऐसे मार्गदर्शक बनकर उभरे हैं जो सरकार के कामकाज पर पैनी नजर रख रहे हैं और लगातार फाइलों तथा नीतियों की समीक्षा कर रहे हैं.
 
उनके पास सरकार चलाने का 20 साल का लंबा और रिकॉर्ड तोड़ अनुभव है. सम्राट चौधरी को सत्ता सौंपने के बाद नीतीश कुमार यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि सरकार में जो भी नीतियां या फैसले लिए जा रहे हैं, उसकी पूरी रिपोर्ट उन तक जरूर पहुंचे.

सरकार और बीजेपी पर पकड़ बनाए रखने की कोशिश

नीतीश कुमार के इस समीक्षात्मक रवैये के पीछे की सबसे बड़ी वजह सरकार और अपनी सहयोगी पार्टी बीजेपी पर पकड़ बनाए रखना है. वर्तमान में बिहार विधानसभा में जनता दल यूनाइटेड के पास 85 विधायक हैं और नीतीश कुमार अपनी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष होने के नाते सर्वेसर्वा हैं. इस मजबूत संख्या बल के सहारे नीतीश कुमार भारतीय जनता पार्टी को भी यह एहसास कराना चाहते हैं कि राज्य में सरकार भले ही बदल गई हो, लेकिन सत्ता का रिमोट कंट्रोल और सरकार चलाने का मुख्य मार्गदर्शन उन्हीं के हाथों में रहेगा. वह अपनी इस राजनीतिक प्रासंगिकता को किसी भी कीमत पर कम नहीं होने देना चाहते हैं.

पार्टी और छात्रों के बीच लगातार सक्रियता

राज्य की राजनीति में खुद को पूरी तरह सक्रिय रखने के लिए नीतीश कुमार लगातार जेडीयू दफ्तर का दौरा कर रहे हैं, विधायकों और सांसदों के साथ बैठकें कर रहे हैं और लगातार मंत्रणा का दौर जारी रखे हुए हैं. इतना ही नहीं, जनसरोकार के मुद्दों पर भी उनकी सक्रियता कम नहीं हुई है. हाल ही में जब TRE 4 परीक्षा के छात्र ज्यादा वैकेंसी की मांग को लेकर लगातार प्रदर्शन कर रहे थे, तो छात्र नेता दिलीप भी नीतीश कुमार से मुलाकात करने पहुंचे. इन मुलाकातों से यह साफ है कि नीतीश कुमार राज्य के हर छोटे-बड़े घटनाक्रम पर अपनी सीधी नजर बनाए हुए हैं.

दिल्ली से लेकर पटना तक कायम है पुराना जलवा

नीतीश कुमार भले ही केंद्र की राजनीति में राज्यसभा सदस्य के तौर पर दिल्ली चले गए हों, लेकिन बिहार से उनका मोह और दखल कम नहीं हुआ है. वर्तमान में जहां बिहार में उनके पास 85 विधायक हैं, वहीं केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार में भी जेडीयू के 12 सांसदों के साथ पार्टी बेहद मजबूत और निर्णायक भूमिका में है. नीतीश कुमार का रिव्यू मोड में आकर बयान देना यह साबित करता है कि वह राजनीतिक रूप से पूरी तरह फिट और सक्रिय हैं. उन्होंने भले ही मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़ दी हो, लेकिन पटना से लेकर दिल्ली तक उनका पुराना राजनीतिक जलवा और दखल आज भी पूरी तरह से बरकरार है.

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