बिहार की राजधानी पटना में इन दिनों नगर निगम का बुलडोजर एक्शन चर्चा में है. बांसघाट और दीघा के इलाकों में कई अपार्टमेंट्स और घरों को तोड़ने के नोटिस दिए गए हैं. लेकिन एक ऐसा मामला सामने आया है जिसे सुनकर किसी का भी दिल पसीज जाए. जिस घर में कल बेटी की बारात आनी है, उसी मकान पर नगर निगम ने 'लाल निशान' लगाकर उसे तोड़ने का फरमान जारी कर दिया है. आइए जानते है पूरी कहानी.
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खुशियों के घर में पसरा मातम
पटना के बांसघाट इलाके में रहने वाले रविशंकर प्रसाद के घर में कल यानी 28 अप्रैल को बेटी की शादी है. आज घर में मड़वा और मटकोर की रस्म होनी थी, लेकिन घर के बाहर खुशियों की जगह 'Complete Building to be Demolished' का नोटिस चिपका हुआ है. नगर निगम की टीम ने मकान पर लाल रंग से क्रॉस का निशान लगा दिया है. स्थिति इतनी खराब हो गई कि परिवार को आनन-फानन में शादी का वेन्यू बदलकर बेटी को ननिहाल भेजना पड़ा है.
'30 दिन का नोटिस, पर 3 दिन में ही शुरू हुआ उपद्रव'
मकान मालिक और उनके परिजनों का कहना है कि नोटिस में 30 दिन का समय दिया गया था, लेकिन नगर निगम की टीम 2-3 दिन में ही आकर दबाव बनाने लगी. मकान मालिक की पत्नी पुष्पा देवी ने बताया कि जब घर में पुरुष नहीं थे, तब टीम ने आकर लाल निशान लगा दिए. परिजनों का आरोप है कि उन्हें डराया-धमकाया जा रहा है कि अगर उन्होंने खुद मकान नहीं तोड़ा, तो निगम बुलडोजर चलाएगा और उसका खर्च भी उन्हीं से वसूला जाएगा.
'पिक एंड चूज' का आरोप
स्थानीय लोगों का आरोप है कि नगर निगम 'पिक एंड चूज' की नीति अपना रहा है. एक गली में 40-50 मकान हैं, लेकिन नोटिस सिर्फ दो-तीन चुनिंदा मकानों को ही दिया गया है. नोटिस का आधार यह बताया जा रहा है कि मकान का नक्शा पास नहीं है या वह गंगा किनारे प्रतिबंधित क्षेत्र में आता है. स्थानीय निवासी विवेक कुमार ने सवाल उठाया कि अगर नक्शा पास न होना ही कारण है, तो पूरे पटना में कितने मकानों का नक्शा पास है?
नानी के घर से विदा होगी बेटी
जिस घर से बेटी की डोली उठनी थी, वहां अब डर और सिसकियों का माहौल है. परिवार का कहना है कि सरकार को कम से कम मानवीय आधार पर बेटी की शादी तक का समय देना चाहिए था. अब बेटी को ननिहाल से विदा करने की तैयारी है, जबकि घरवाले अपने सालों की कमाई से बनाए आशियाने को बचाने की गुहार लगा रहे हैं.
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