BPSC Patna Police Lathicharge: बिहार की राजधानी पटना की सड़कें एक बार फिर छात्रों के खून से लाल हो गई हैं. शुक्रवार, 8 मई 2026 को BPSC टीआरई-4 (Teacher Recruitment Examination-4) के विज्ञापन जारी करने की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे हजारों अभ्यर्थियों पर पुलिस ने जमकर लाठियां बरसाईं. जेपी गोलंबर से लेकर गांधी मैदान के इलाकों में पुलिसिया कार्रवाई के बाद अफरा-तफरी का माहौल रहा. इस संघर्ष में कई छात्र गंभीर रूप से घायल हुए हैं, जिनके सिर फटने और शरीर पर गहरे जख्मों की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं.
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15,000 छात्रों का महामार्च और पुलिस की घेराबंदी
आंदोलन की शुरुआत सुबह पटना कॉलेज से हुई, जहां करीब 10,000 से 15,000 अभ्यर्थी एकत्रित हुए थे. ये छात्र सरकार और शिक्षा विभाग के खिलाफ नारेबाजी करते हुए मुख्यमंत्री आवास की ओर बढ़ रहे थे. उनकी मुख्य मांग थी कि पिछले कई महीनों से लंबित 46,000 से अधिक शिक्षक पदों के लिए TRE-4 का नोटिफिकेशन तुरंत जारी किया जाए.
जैसे ही छात्रों का यह विशाल हुजूम गांधी मैदान के पास जेपी गोलंबर पहुंचा, वहां पहले से तैनात भारी पुलिस बल ने लोहे की बैरिकेडिंग लगाकर उन्हें रोक लिया. प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि पुलिस ने बिना किसी पूर्व चेतावनी या बातचीत की कोशिश किए सीधे लाठीचार्ज शुरू कर दिया.
छात्र नेता अमन की आपबीती: "मुर्दे की तरह पटक दिया"
इस लाठीचार्ज में सबसे ज्यादा चर्चा छात्र नेता अमन की हो रही है, जिनका सिर पुलिस की लाठी से फट गया. लहूलुहान हालत में अमन ने बताया, "पुलिस ने महिलाओं तक को नहीं बख्शा. जब एक अधिकारी ने एक महिला अभ्यर्थी पर लाठी चलाई, तो मैंने उन्हें बचाने की कोशिश की. इसके जवाब में तीन स्टार वाले डीएसपी ने सीधे मेरे सिर पर प्रहार किया. मैं वहीं बेहोश होकर गिर पड़ा."
अमन ने आगे कहा, "जब मुझे होश आया तो मेरी पूरी शर्ट खून से भीगी हुई थी. पुलिस ने मुझे प्राथमिक उपचार देने के बजाय किसी लाश की तरह उठाकर बैरिकेड के दूसरी तरफ पटक दिया. करीब 20-25 मिनट तक पुलिस मुझे घेरे रही और किसी साथी को पास नहीं आने दिया."
अस्पताल में 1.5 घंटे का इंतजार और सिसकता परिवार
घायल छात्र का आरोप है कि उन्हें इलाज के लिए जब पीएमसीएच (PMCH) ले जाया गया, तो वहां भी संवेदनहीनता का सामना करना पड़ा. अमन के मुताबिक, "मैं दर्द से कराह रहा था, सिर से खून बह रहा था, लेकिन अस्पताल में डेढ़ घंटे तक कोई इंजेक्शन या प्राथमिक उपचार नहीं मिला. घर पर पिता का एक्सीडेंट हुआ है, मां रो रही है कि बेटा अब तू भी सिर फुड़वा आया? क्या एक गरीब किसान के बच्चे का यही भविष्य है?"
क्या है छात्रों की मांगे?
अभ्यर्थी केवल विज्ञापन ही नहीं, बल्कि भर्ती प्रक्रिया के नियमों को लेकर भी नाराज हैं:
नोटिफिकेशन में देरी: छात्रों का कहना है कि विज्ञापन फरवरी-अप्रैल में आना था, लेकिन मई बीतने को है और सरकार खामोश है.
परीक्षा का पैटर्न: छात्रों की मांग है कि परीक्षा पूर्व की भांति एक ही पीटी (PT) के आधार पर हो. सरकार द्वारा पीटी और मेंस (PT-Mains) का नया पेच फंसाने की कोशिशों का कड़ा विरोध हो रहा है.
नेताओं पर तंज: छात्रों ने आक्रोश जताते हुए कहा कि मंत्रियों के अनपढ़ बेटों को विरासत में कुर्सी मिल जाती है, लेकिन हमें बीएड, सीटेट, एसटेट और BPSC पास करने के बाद भी लाठियां खानी पड़ती हैं.
आर-पार की लड़ाई: 'शहीद हो जाएंगे पर घर नहीं जाएंगे'
लाठीचार्ज के सबाद छात्रों ने अब गर्दनीबाग में डेरा डालने का फैसला किया है. प्रदर्शनकारियों ने साफ चेतावनी दी है कि चाहे पुलिस दोबारा लाठी चलाए या उन्हें जेल में डाल दे, वे बिना विज्ञापन लिए पटना की सरजमीं से वापस नहीं लौटेंगे. छात्रों का कहना है कि यह उनके दो सालों का दर्द है और अब वे शहादत देने को भी तैयार हैं.
बिहार की नई सरकार और नवनियुक्त मंत्रियों के लिए यह आंदोलन एक बड़ी चुनौती बनकर उभरा है. अब देखना यह होगा कि शिक्षा विभाग इस आक्रोश को शांत करने के लिए विज्ञापन की तारीखों का ऐलान कब करता है.
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