MLC बनने के बाद अब मंत्री बनेंगे पवन सिंह? समझिए BJP का पूरा सियासी समीकरण

Pawan Singh Minister News: भोजपुरी स्टार और नवनिर्वाचित MLC पवन सिंह को लेकर बिहार की राजनीति में चर्चाएं तेज हो गई हैं. क्या पवन सिंह अब सम्राट चौधरी कैबिनेट में मंत्री बनेंगे? जानिए बिहार कैबिनेट का गणित, बीजेपी की रणनीति, राजपूत वोट बैंक का समीकरण और युवाओं के बीच पवन सिंह की लोकप्रियता को लेकर पार्टी का बड़ा सियासी प्लान.

Pawan Singh Minister News
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आशीष अभिनव

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भोजपुरी सिनेमा के पावरस्टार पवन सिंह को लेकर बिहार के सियासी गलियारों में चर्चाएं बेहद तेज हो गई हैं. हाल ही में निर्विरोध विधान परिषद (MLC) सदस्य निर्वाचित होने के बाद अब यह सवाल उठ रहा है कि क्या पवन सिंह यहीं तक सीमित रहेंगे या उन्हें बिहार सरकार में बड़ी जिम्मेदारी मिलेगी. सूत्रों के हवाले से बड़ी खबर सामने आ रही है कि पवन सिंह को सम्राट चौधरी की कैबिनेट में जगह दी जा सकती है और उन्हें मंत्री बनाया जा सकता है. भारतीय जनता पार्टी सिर्फ उन्हें सदन भेजने तक ही नहीं रुकने वाली, बल्कि उनके लिए एक बहुत बड़ा सियासी प्लान तैयार किया गया है.

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क्या है बिहार कैबिनेट का गणित और पवन सिंह के लिए मौका?

बिहार विधानसभा में कुल 243 सीटें हैं और संविधान के 91वें संशोधन के नियमों के मुताबिक, किसी भी राज्य में विधानसभा की कुल सीटों के अधिकतम 15 प्रतिशत सदस्य ही मंत्री बन सकते हैं. इस हिसाब से बिहार सरकार में मंत्रियों की अधिकतम संख्या 36 हो सकती है.

मौजूदा समय में सम्राट चौधरी की सरकार में कुल 35 मंत्री शामिल हैं, जिसका मतलब है कि कैबिनेट में अभी भी एक मंत्री पद खाली चल रहा है. राजनीतिक गलियारों में इस बात की पुरजोर चर्चा है कि इसी खाली पड़े कोटे को भरने के लिए पवन सिंह के नाम पर विचार किया जा रहा है और मुख्यमंत्री के विशेषाधिकार के तहत उन्हें इस कैबिनेट में शामिल किया जा सकता है.

राजपूत समाज को साधने का बड़ा दांव

पवन सिंह को मंत्री बनाने के पीछे बीजेपी का एक बहुत बड़ा सामाजिक समीकरण छिपा हुआ है. पवन सिंह राजपूत समाज से आते हैं और आरा-बक्सर के क्षेत्र में उनके समाज का अच्छा-खासा वर्चस्व है. वरिष्ठ पत्रकारों और राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि वर्तमान समय में बिहार के राजपूत मतदाताओं के बीच एनडीए को लेकर कुछ नाराजगी देखने को मिली है.

बीजेपी पवन सिंह को सरकार में बड़ा चेहरा बनाकर इसी नाराजगी को दूर करना चाहती है. राजपूत समाज में पवन सिंह की स्वीकार्यता और लोकप्रियता का सीधा फायदा बीजेपी और एनडीए को आने वाले चुनावों में मिल सकता है.

युवाओं में लोकप्रियता और 'क्राउड पुलर' की छवि

पवन सिंह की लोकप्रियता सिर्फ किसी एक जाति या सीमा तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे बिहार और पूर्वांचल के बेल्ट में उनका एक अलग ही जलवा है. बीजेपी उन्हें एक ऐसे युवा तुर्क और लोकप्रिय नेता के रूप में देख रही है जो युवाओं के बीच बेहद पसंद किए जाते हैं.

चुनाव प्रचार के दौरान यह साफ देखा गया कि पवन सिंह जहां भी जाते हैं, वहां भारी भीड़ जुटती है. वे एक बेहतरीन 'क्राउड पुलर' साबित हुए हैं. ऐसे में बीजेपी को बिहार में एक ऐसे ही चेहरे की जरूरत है, जो जनसभाओं में भीड़ को पार्टी की तरफ आकर्षित कर सके.

भविष्य की लीडरशिप तैयार करने का प्लान

लोकसभा चुनाव 2024 के दौरान पवन सिंह को लेकर काफी उठापटक देखने को मिली थी. बीजेपी ने उन्हें पहले आसनसोल से टिकट दिया था, लेकिन उन्होंने वहां से चुनाव लड़ने से इनकार कर दिया था. इसके बाद वे काराकाट सीट से निर्दलीय चुनाव मैदान में उतर गए, जिससे एनडीए के उम्मीदवार उपेंद्र कुशवाहा को करारी हार का सामना करना पड़ा.

इस झटके के बाद भी बीजेपी को शाहबाद और भोजपुरी बेल्ट में पवन सिंह की ताकत का अहसास हुआ. अब बीजेपी पवन सिंह को बड़ी जिम्मेदारी देकर पूरे बिहार में युवाओं के बीच घुमाने का मन बना रही है ताकि राज्य में एक नई और मजबूत लीडरशिप तैयार की जा सके, जो भविष्य में पार्टी के लिए 'तुरुप का इक्का' साबित हो सके.

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