PM Kisan Yojana: बिहार के 32 लाख किसानों पर संकट, किसान सम्मान योजना के नियम बदले

ऋचा शर्मा

• 03:11 PM • 03 Sep 2026

बिहार के 32 लाख से ज्यादा किसानों की Farmer ID अभी तक नहीं बनी है. PM Kisan Samman Nidhi समेत दूसरी सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में इन किसानों को परेशानी हो सकती है. जमीन की Jamabandi अपने नाम होना और Aadhaar से mobile link होना जरूरी है. बटाईदार किसानों की चिंता भी बढ़ी है.

NewsTak
Google CTA

बिहार के लाखों किसानों के लिए ये खबर बेहद अहम है. प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत अब किसानों के लिए फार्मर आईडी और जमीन से जुड़े रिकॉर्ड महत्वपूर्ण हो गए हैं. बिहार में करीब 32 लाख से ज्यादा किसान ऐसे हैं, जिनकी फार्मर आईडी अभी तक नहीं बन पाई है. ऐसे में इन किसानों के सामने सरकारी योजनाओं का लाभ मिलने में परेशानी खड़ी हो सकती है. आखिर फार्मर आईडी क्यों जरूरी हो गई है और किन किसानों को सबसे ज्यादा मुश्किल हो सकती है, देखिए ये रिपोर्ट.

Read more!

प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना का लाभ लेने वाले बिहार के लाखों किसानों के सामने अब नई चुनौती खड़ी हो गई है. फार्मर आईडी नहीं बनी तो सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में दिक्कत आ सकती है. केंद्र सरकार की किसान रजिस्ट्री व्यवस्था के तहत किसानों को एक विशिष्ट पहचान यानी फार्मर आईडी दी जा रही है. बिहार में पहले चरण में पीएम किसान सम्मान निधि के करीब 85.53 लाख लाभार्थियों की फार्मर आईडी तैयार की जानी है.

लेकिन अब तक करीब 53.45 लाख किसानों की ही फार्मर आईडी बन पाई है. यानी करीब 32 लाख से ज्यादा किसान अभी इस प्रक्रिया से बाहर हैं.सरकार की ओर से फार्मर आईडी को लेकर प्रक्रिया तेज करने के लिए विशेष अभियान भी चलाया गया, लेकिन बड़ी संख्या में किसानों का रजिस्ट्रेशन अब तक नहीं हो पाया है.

जमीन का रिकॉर्ड बना सबसे बड़ी अड़चन

फार्मर आईडी नहीं बनने के पीछे सबसे बड़ी वजह जमीन के रिकॉर्ड से जुड़ी समस्या बताई जा रही है. कई किसानों के पास जमीन है, लेकिन राजस्व रिकॉर्ड में जमीन उनके नाम पर नहीं है. जमीन अभी भी पिता, दादा या परिवार के दूसरे सदस्यों के नाम पर दर्ज है. यही वजह है कि ऐसे किसानों के सामने फार्मर रजिस्ट्री कराने में परेशानी आ रही है. इसके अलावा बिहार के बड़ी संख्या में किसान रोजी-रोटी के लिए दूसरे राज्यों में रहते हैं. ऐसे किसानों का रजिस्ट्रेशन भी चुनौती बना हुआ है.

इन किसानों के लिए बढ़ सकती है परेशानी

फार्मर रजिस्ट्री के लिए किसान का मोबाइल नंबर आधार से लिंक होना जरूरी है. साथ ही जमीन की जमाबंदी भी किसान के अपने नाम पर होनी चाहिए. यानी जिन किसानों के नाम पर जमीन का रिकॉर्ड दर्ज नहीं है, उनके लिए फार्मर आईडी बनवाना आसान नहीं होगा. और यही वजह है कि बिहार के करीब 32 लाख किसानों को लेकर चिंता बढ़ गई है.

बटाईदार किसानों की भी बड़ी चिंता

इस पूरी व्यवस्था को लेकर बटाईदार किसानों की परेशानी भी सामने आ रही है. अखिल भारतीय किसान महासभा के राज्य सचिव उमेश सिंह का कहना है कि बिहार में बड़ी संख्या में किसान बटाई पर खेती करते हैं. ऐसे किसानों के पास जमीन उनके नाम पर नहीं होती, लेकिन खेती वही करते हैं. ऐसे में सवाल है कि अगर सरकारी योजनाओं का लाभ फार्मर आईडी और जमीन के रिकॉर्ड से जोड़ दिया गया, तो वास्तविक खेती करने वाले बटाईदार किसानों का क्या होगा?

किसान संगठनों की मांग है कि बटाईदार किसानों के लिए भी ऐसी व्यवस्था हो, जिससे वे सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित न हों. अब तस्वीर दो तरह की है.एक तरफ सरकार किसानों का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार कर रही है और योजनाओं का लाभ सही व्यक्ति तक पहुंचाने की कोशिश कर रही है. दूसरी तरफ बिहार में ऐसे लाखों किसान हैं, जिनके जमीन के कागजात उनके नाम पर नहीं हैं.

ऐसे में आने वाले दिनों में फार्मर आईडी बिहार के किसानों के लिए सिर्फ एक पहचान पत्र नहीं, बल्कि सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए बेहद अहम दस्तावेज बन सकती है. अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि बिहार के करीब 32 लाख किसानों की फार्मर आईडी कब तक बनेगी और जिन किसानों के नाम पर जमीन नहीं है, उनके लिए सरकार क्या रास्ता निकालेगी?