जन सुराज के संस्थापक और नवनिर्वाचित विधायक प्रशांत किशोर ने एक बार फिर बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व और पार्टी के प्रचारकों पर तीखा हमला बोला. बांकीपुर उपचुनाव में अपनी जीत के बाद एक बिहार तक से बातचीत के दौरान प्रशांत किशोर ने बीजेपी सांसद और प्रसिद्ध कलाकार मनोज तिवारी को सीधे चुनौती दी है. उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि यदि बीजेपी नेता वाकई बिहार की जनता के प्रति गंभीर हैं, तो उन्हें भरत तिवारी के परिवार को न्याय दिलाना चाहिए.
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क्या है पूरा मामला?
प्रशांत किशोर ने भरत तिवारी के मामले को उठाते हुए कहा कि चुनाव के दौरान मनोज तिवारी ने इस परिवार का इस्तेमाल सिर्फ वोट बैंक की तरह किया. पीके का आरोप है कि मानसिक रूप से परेशान स्थिति में मौजूद भरत तिवारी के परिवार को सम्राट चौधरी से मिलवाया गया और उन्हें कथित तौर पर आर्थिक प्रलोभन देने की कोशिश की गई. प्रशांत किशोर ने इसे 'ढोंग' करार देते हुए कहा, "मनोज तिवारी का काम सिर्फ आकर गाना गाना और वोट मांगना नहीं है. यदि आप न्याय की बात करते हैं, तो पहले इस परिवार को इंसाफ दिलाएं.
न्याय का अर्थ केवल मुआवजा नहीं
प्रशांत किशोर ने स्पष्ट किया कि उनके लिए 'न्याय' का अर्थ केवल आर्थिक मदद नहीं है. उन्होंने मांग की कि इस मामले में गृह विभाग की भूमिका की जांच होनी चाहिए और एसटीएफ (STF) के उन जवानों से जवाब मांगा जाना चाहिए जिन्होंने गोली चलाने का आदेश दिया था. उन्होंने चेतावनी दी कि बिहार अब दिल्ली नहीं है, जहां लोग चुपचाप सब देख लेंगे. उन्होंने कहा, "अगर आप न्याय नहीं दिला सकते, तो बिहार में आकर वोट मांगना बंद कर दीजिए. जनता आपको दौड़ा कर मारेगी और आप राज्य में घुस भी नहीं पाएंगे"
सम्राट चौधरी और भाजपा नेतृत्व पर निशाना
इस्तीफे की मांग पर पूछे गए एक सवाल के जवाब में प्रशांत किशोर ने कहा कि वे केवल सम्राट चौधरी के इस्तीफे की बात नहीं कर रहे, बल्कि बीजेपी के पूरे नेतृत्व से यह आग्रह कर रहे हैं कि बिहार की जनता ने उन्हें भारी बहुमत से जीत दिलाई थी. उन्होंने कहा, "बिहार की जनता अपने बच्चों के लिए बेहतर शिक्षा और रोजगार चाहती है. राज्य से पलायन बंद होना चाहिए और फैक्ट्रियां लगनी चाहिए. बहुत हो गया जाति, धर्म और अनाज की राजनीति. यदि सम्राट चौधरी ये सब करने में असमर्थ हैं, तो बीजेपी को किसी काबिल व्यक्ति को कमान सौंपनी चाहिए"
चुनाव नतीजों पर बोले पीके
सवर्ण और मुस्लिम मतदाताओं के शिफ्ट होने की चर्चाओं पर प्रशांत किशोर ने किसी भी तरह के भ्रम को खारिज कर दिया. उन्होंने कहा कि उनकी जीत किसी विशेष जाति के आधार पर नहीं, बल्कि 'जन सुराज' की तीन साल की मेहनत और उस सोच की जीत है जिसे लोगों ने अब अपना लिया है. पीके ने कहा कि बांकीपुर से जो बदलाव की शुरुआत हुई है, उसका असर आने वाले समय में पूरे बिहार में देखने को मिलेगा.
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