नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने और बेटे निशांत की राजनीति में एंट्री पर प्रशांत किशोर का बड़ा हमला, बिहार की जनता को दी ये नसीहत

PK on Nitish Kumar: बिहार की राजनीति में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की चर्चाओं और उनके बेटे निशांत कुमार की राजनीति में एंट्री को लेकर प्रशांत किशोर ने बड़ा हमला बोला है.पीके ने कहा कि नीतीश कुमार अब सिर्फ 'कागजी मुख्यमंत्री' रह गए हैं. साथ ही उन्होंने निशांत कुमार की राजनीति में एंट्री पर वंशवाद को लेकर सवाल उठाया है. विस्तार से जानें पूरी बात.

Prashant Kishore on Nitish Kumar
प्रशांत किशोर ने नीतीश कुमार पर कसा तंज(फाइल फोटो)

सैय्यद अलमदार हुसैन रिजवी

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बिहार की राजनीति में इन दिनों जबरदस्त हलचल मची हुई है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने और उनके बेटे निशांत कुमार की राजनीति में एंट्री को लेकर जन सुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर (PK) ने तीखा हमला बोला है. प्रशांत किशोर ने दावा किया है कि नीतीश कुमार अब शारीरिक और मानसिक रूप से मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारियां संभालने की स्थिति में नहीं हैं. आइए विस्तार से जानते है पूरी कहानी.

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'नीतीश कुमार अब कागजी मुख्यमंत्री'

प्रशांत किशोर ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि उन्होंने बहुत पहले ही भविष्यवाणी कर दी थी कि एनडीए की जीत के बावजूद नीतीश कुमार मुख्यमंत्री नहीं रहेंगे. उन्होंने तंज कसते हुए कहा, 'जुम्मा-जुम्मा तीन महीने हुए हैं और नीतीश कुमार अब मुख्यमंत्री नहीं हैं. वे अभी सिर्फ कागज पर मुख्यमंत्री हैं, इस्तीफा भले न दिया हो, लेकिन व्यवहारिक तौर पर पद छोड़ चुके हैं.' 

पीके ने आगे कहा कि 202 विधायकों का भारी बहुमत होने के बावजूद एक मुख्यमंत्री राज्य छोड़कर दिल्ली (राज्यसभा) क्यों जाना चाहता है? यह साफ दिखाता है कि नीतीश कुमार खुद जानते हैं कि वे अब शासन चलाने की स्थिति में नहीं हैं, भले ही सिस्टम इस बात को छिपाने की कितनी भी कोशिश करें.

बेटे निशांत की एंट्री पर 'शुभकामनाएं' और 'नसीहत'

नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार के राजनीति में आने की खबरों पर प्रशांत किशोर ने उन्हें शुभकामनाएं तो दीं, लेकिन साथ ही बिहार की जनता को आईना भी दिखाया. उन्होंने कहा कि यह एक और उदाहरण है जहां नेताओं ने अपने बच्चों के लिए राज सिंहासन सुरक्षित कर लिया है. 

प्रशांत किशोर ने आगे कहा कि, 'नीतीश कुमार जीवन भर वंशवाद के खिलाफ बोलते रहे, लेकिन आज उनका बेटा भी राजनीति में आ रहा है. नेता चाहे स्वस्थ हो या अस्वस्थ, सफल हो या असफल, वह अपने बेटे के लिए सिंहासन की चिंता जरूर करता है. लेकिन क्या बिहार की जनता ने अपने बच्चों के भविष्य की चिंता की?'

'मजदूरी और पलायन है बिहार के बच्चों का भविष्य'

बिहार की बदहाली पर दुख जताते हुए पीके ने कहा कि जहां नेताओं के बच्चे सत्ता संभाल रहे हैं, वहीं बिहार के आम बच्चे आज भी दूसरे राज्यों की फैक्ट्रियों में मजदूरी करने को मजबूर हैं. उन्होंने हाल की घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि पिछले चुनाव के बाद से 50 से ज्यादा बिहारी युवकों की दूसरे राज्यों की फैक्ट्रियों में काम करते समय हादसों में मौत हो चुकी है, लेकिन यह कहीं चर्चा का विषय नहीं है. प्रशांत किशोर ने बिहार के लोगों को चेतावनी देते हुए कहा कि जब तक समाज अपने बच्चों की शिक्षा और रोजगार के लिए जागरूक नहीं होगा, तब तक यही सिलसिला चलता रहेगा.

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