बिहार विधानसभा चुनाव में जन सुराज पार्टी के बेहद खराब प्रदर्शन और एक भी सीट जीतने में नाकामयाब रहने के बावजूद प्रशांत किशोर ने हार नहीं मानी है. बिहार में परिवर्तन लाने की अपनी मुहिम को आगे बढ़ाते हुए प्रशांत किशोर ने अब एक बड़ा रणनीतिक बदलाव किया है. उन्होंने पटना शहर और जन सुराज पार्टी का मुख्य केंद्र रहे प्रसिद्ध 'शेखपुरा हाउस' को पूरी तरह से छोड़ दिया है. अब वह पटना से करीब 40-45 किलोमीटर दूर आईआईटी पटना के पास अपनी पार्टी का नया ठिकाना बना रहे हैं. प्रशांत किशोर ने इसके लिए एक विशाल आश्रम का निर्माण शुरू करवाया है, जहां से वे अगले 5 साल तक अपनी राजनीति और पार्टी का संचालन करेंगे.
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15 बीघे में तैयार हो रहा है 'बिहार नवनिर्माण आश्रम'
प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी का नया ठिकाना पटना से बाहर करीब 15 बीघा जमीन पर तैयार किया जा रहा है. इस पूरे सेटअप को 'बिहार नवनिर्माण आश्रम' का नाम दिया गया है, जिसकी तस्वीरें और निर्माण कार्य की शुरुआत भी सामने आ चुकी है. इस विशाल आश्रम को पूरी तरह से बनकर तैयार होने में लगभग तीन से छह महीने का समय लगेगा. हालांकि, दिलचस्प बात यह है कि प्रशांत किशोर ने पिछले दो-तीन दिनों से खुद इस आश्रम में रहना शुरू भी कर दिया है, क्योंकि उनके रहने लायक जगह को फिलहाल तैयार कर लिया गया है.
मरीन ड्राइव और शेखपुरा हाउस के बाद अब नया ठिकाना
इससे पहले प्रशांत किशोर पटना के शेखपुरा हाउस से ही अपनी पार्टी की सारी बैठकें, वर्कशॉप और ट्रेनिंग का संचालन करते थे. बीच में कुछ समय और महीनों के लिए उन्होंने पटना के मरीन ड्राइव के पास भी कार्यकर्ताओं की ट्रेनिंग के लिए एक अस्थाई सेटअप लगाया था, जिसे बाद में हटा दिया गया था. लेकिन अब शेखपुरा हाउस को पूरी तरह विदा कह दिया गया है और इस नए आश्रम को जन सुराज का परमानेंट वॉर रूम और ट्रेनिंग सेंटर बनाया जा रहा है.
आश्रम में होंगी कार्यकर्ताओं की ट्रेनिंग और बनेगा चुनावी वॉर रूम
प्रशांत किशोर का दावा है कि वह अगले 5 साल तक इसी आश्रम में रहकर अपनी राजनीति करेंगे, युवाओं को जोड़ेंगे और यहीं से पार्टी की सारी रणनीतियां तय होंगी. इस आश्रम को इस तरह से डिजाइन किया जा रहा है जहां एक समय में प्रशांत किशोर की टीम के करीब 300 लोग स्थायी रूप से रह सकेंगे. इसके अलावा, रोजाना ट्रेनिंग और मीटिंग के सिलसिले में आने-जाने वाले 500 से 700 लोगों के रहने, खाने-पीने और बैठक करने की पूरी व्यवस्था इसी परिसर के भीतर की जा रही है.
इसी आश्रम से लड़ा जाएगा साल 2030 का बिहार चुनाव
पिछले चुनाव के बाद से प्रशांत किशोर रुके नहीं हैं और लगातार बिहार के कई जिलों का दौरा कर अपने पुराने एजेंडे पर काम कर रहे हैं. पहले चुनाव में लगे तगड़े झटके के बाद यह आश्रम उनकी भविष्य की राजनीति का सबसे बड़ा केंद्र बनने जा रहा है. प्रशांत किशोर का कहना है कि अब इसी 'बिहार नवनिर्माण आश्रम' को मुख्य केंद्र बनाकर वह अपनी जमीनी पकड़ मजबूत करेंगे और साल 2030 में होने वाला अगला बिहार विधानसभा चुनाव भी यहीं से संचालित होकर लड़ा जाएगा.
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