जन सुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर ने बिहार की व्यवस्था में बदलाव लाने के लिए एक और बड़ा और कड़ा संकल्प लिया है. प्रशांत किशोर अब किसी आलीशान घर, बंद कमरों या सुख-सुविधाओं में नहीं रहेंगे, बल्कि उन्होंने जनता के बीच रहकर संघर्ष करने का फैसला किया है. इसके लिए बकायदा आश्रम तैयार किया गया है, जहां से वे बिहार की मौजूदा सरकार के खिलाफ आवाज बुलंद करेंगे और राज्य के नवनिर्माण की लड़ाई को आगे बढ़ाएंगे.
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बिहटा के अमरा गांव में बना प्रशांत किशोर का नया ठिकाना
प्रशांत किशोर ने बिहार में संपूर्ण व्यवस्था परिवर्तन होने तक अपना घर-बार और सुख-सुविधाओं को पूरी तरह से त्याग दिया है. उनके रहने और कार्य करने के लिए पटना के आईआईटी बिहटा के पास स्थित अमरा गांव में एक आश्रम बनाया गया है. आज यानी 20 मई 2026 से प्रशांत किशोर इसी आश्रम में आकर रहने लगे हैं.
उन्होंने संकल्प लिया है कि जब तक बिहार की पूरी व्यवस्था को नहीं बदल देते, तब तक वे किसी घर या बंद कमरे में नहीं रहेंगे, न ही वे किसी लग्जरी गाड़ी या हेलीकॉप्टर का इस्तेमाल करेंगे. वे पूरी तरह से जमीन पर रहकर जनता के बीच, जनता के साथ और जनता के लिए ही कार्य करेंगे.
सरकार को दिया 6 महीने का समय हुआ पूरा
इस नए संकल्प के पीछे की पूरी रणनीति को स्पष्ट करते हुए बताया गया कि पिछले साल 14 नवंबर को जब चुनाव परिणाम आए थे, तो उसके ठीक छह दिन बाद यानी 20 नवंबर 2025 को प्रशांत किशोर और जन सुराज के तमाम नेताओं ने भितहरवा आश्रम जाकर आत्म-शुद्धिकरण किया था.
राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के सिद्धांतों पर चलते हुए प्रशांत किशोर ने वहां 24 घंटे का आमरण अनशन और मौन व्रत रखा था. उस दौरान जन सुराज ने संकल्प लिया था कि वे बिहार की नई सरकार को काम करने के लिए 6 महीने का समय देंगे. अब 20 मई 2026 को सरकार के 6 महीने का कार्यकाल पूरा हो चुका है, जिसके बाद जन सुराज ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है.
झूठे वादे करने वाली सरकार को चैन से सोने नहीं देंगे
जन सुराज के नेताओं का कहना है कि बिहार की मौजूदा सरकार जिन झूठे वादों के दम पर और जनता को ठग कर सत्ता की कुर्सी पर बैठी है, अब उन वादों पर घेरा जाएगा. सरकार के 6 महीने पूरे होने के बाद अब जन सुराज इस सरकार को चैन से सोने नहीं देगा. राज्य के किसी भी कोने में अगर जनता के साथ कोई अन्याय होगा, तो जन सुराज सड़कों पर उतरकर प्रखरता से जनता की आवाज बनेगा.
नेताओं ने भरोसा दिलाया कि चाहे बुलडोजर से लोगों के घर गिराए जा रहे हों या छात्रों के अधिकारों का हनन हो रहा हो, जन सुराज हर कदम पर जनता के साथ खड़ा है, जैसा कि उन्होंने बीपीएससी छात्रों के आंदोलन के दौरान पटना के गांधी मैदान में 15 दिनों तक आमरण अनशन करके दिखाया था.
'नेताओं के बच्चों का नहीं, बिहार के बच्चों का भविष्य बनाना है'
प्रशांत किशोर के इस आश्रम में रहने और नए सिरे से संघर्ष करने का मुख्य उद्देश्य बिहार को देश के अग्रणी राज्यों में शामिल कराना है. जन सुराज का मानना है कि पिछले 4 साल के कड़े संघर्ष के बाद भी बिहार में भ्रष्ट और अयोग्य नेताओं का राज है, जिसे बदलना बेहद जरूरी है. मौजूदा व्यवस्था पर कटाक्ष करते हुए कहा गया कि यहां ऐसे लोग मंत्री बन रहे हैं जिन्हें अपने विभागों तक का ज्ञान नहीं है, जहां शिक्षा मंत्री खुद को स्वास्थ्य मंत्री बता रहे हैं.
प्रशांत किशोर और जन सुराज का लक्ष्य किसी नेता के बच्चे का भविष्य संवारना नहीं बल्कि बिहार के आम बच्चों का भविष्य बेहतर बनाना है. इसी 'बिहार नवनिर्माण' के संकल्प के साथ प्रशांत किशोर अगले 5 सालों तक इसी आश्रम को केंद्र बनाकर पूरे बिहार की यात्रा करेंगे और यह संघर्ष तब तक थमेगा नहीं जब तक बिहार देश के टॉप 10 राज्यों की कतार में खड़ा न हो जाए.
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